आजमगढ़। कोडीन युक्त कफ सिरप के अवैध कारोबार के खिलाफ चल रही कार्रवाई में STF ने तस्करी के सरगना शुभम जायसवाल के करीबी और बड़े राजदार विकास सिंह नरवे को नेपाल बॉर्डर के पास सिद्धार्थनगर जिले से मंगलवार को गिरफ्तार किया गया है। उसके साथ दो अन्य आरोपियों को भी पकड़ा गया है। तीनों नेपाल भागने की फिराक में थे। विकास समेत तीन की गिरफ्तारी के बाद इस नेटवर्क में हड़कंप मच गया है। वहीं जांच में विकास सिंह का नाम सामने आने के बाद अब आजमगढ़ पुलिस मुकदमे में उसका नाम जोड़ने की तैयारी कर रही है।
मिली जानकारी के अनुसार दीदारगंज थाना क्षेत्र के नरवे गांव निवासी विकास सिंह पहले से चर्चा में था, जबकि जेठारी गांव के विपेंद्र सिंह ने जौनपुर न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया है। पुलिस की गहन विवेचना में दोनों के बीच संपर्क के ठोस साक्ष्य मिले हैं।
मामले में थाना दीदारगंज में औषधि निरीक्षक सीमा वर्मा की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। ड्रग इंस्पेक्टर सीमा वर्मा ने बताया था कि दीदारगंज थाना क्षेत्र के जेठारी नरवे निवासी विपेंद्र सिंह की मार्टीनगंज के बनगांव में एएस फार्मा नाम से मेडिकल स्टोर है। उसने आजमगढ़ की दो, बस्ती की तीन और जौनपुर की एक फर्म से कुल 3.28 लाख बोतल कोडीन कफ सिरप खरीदी थीं।
28 नवंबर 2025 को निरीक्षण के दौरान दुकान बंद मिली। पूछताछ में मकान मालिक ने बताया कि करीब एक साल पहले ही वह दुकान छोड़ चुका है। उसके घर जाने पर भी वह नहीं मिला। कई बार फोन किया गया, लेकिन रिसीव नहीं हुआ। व्हाट्सएप और ईमेल के जरिये भी खरीद-बिक्री का विवरण मांगा गया, पर उपलब्ध नहीं कराया गया। जीएसटी अकाउंट विवरण भी नहीं मिला, जिससे कफ सिरप के दुरुपयोग की आशंका जताई गई। विपेंद्र सिंह पर कुल 11 मुकदमे दर्ज हैं।
वहीं नरवे गांव निवासी विकास सिंह का नाम भी जांच में सामने आया था। दोनों की गिरफ्तारी के लिए लुक आउट जारी किया गया था। विपेंद्र ने कोर्ट में समर्पण कर दिया, जबकि विकास को STF ने नेपाल बॉर्डर के पास से मंगलवार को दबोच लिया।
ड्रग इंस्पेक्टर सीमा वर्मा की तहरीर पर पुलिस ने केस दर्ज कर आरोपितों के बैंक खातों की गहन जांच शुरू कर दी है। जिले के कई मेडिकल स्टोर भी जांच के दायरे में आ गए हैं।
7 लाख से अधिक शीशियों की सप्लाई, करोड़ों का खेल
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने आजमगढ़ समेत विभिन्न जनपदों के मेडिकल स्टोरों पर करीब सात लाख शीशी से अधिक कोडीनयुक्त सिरप सप्लाई किया, जिसकी कीमत करोड़ों रुपये बताई जा रही है।
वित्तीय वर्ष 2023–24 और 2024–25 में रांची से भारी मात्रा में सिरप की खेप मंगाई गई थी। आजमगढ़ की दो फर्मों ने अपना माल एएस फार्मा को बेचा, जबकि मऊ, बलिया और आजमगढ़ की कई फर्मों ने सप्लाई के लिए दूसरे जिलों को चुना।
मामला खुलने के बाद औषधि एवं ड्रग विभाग की छानबीन में आजमगढ़ मंडल की 12 फर्मों की संलिप्तता सामने आई है।
हिस्ट्रीशीटर विपेंद्र के खिलाफ 12 मुकदमे
ड्रग इंस्पेक्टर की तहरीर पर जेठारी निवासी विपेंद्र सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
उस पर प्रयागराज, मऊ, जौनपुर और आजमगढ़ में कुल 12 मुकदमे दर्ज हैं। वह दीदारगंज थाने का हिस्ट्रीशीटर है और उसका नाम मार्टीनगंज पुलिस चौकी पर अंकित सूची में भी दर्ज है।
शुभम के पार्टनर की गिरफ्तारी के बाद बढ़ी दबिश
एसटीएफ की लखनऊ टीम द्वारा आरोपी अमित सिंह टाटा और आलोक की गिरफ्तारी के बाद अब नरवे निवासी विकास सिंह को पकड़ने के लिए एसटीएफ और एसआईटी लगातार दबिश दे रही है। लखनऊ एसटीएफ उसकी लोकेशन ट्रेस करने में लगी हुई है।
बैंक खातों से खुल रहा करोड़ों का खेल
विपेंद्र और विकास सिंह के बैंक खातों में संदिग्ध लेनदेन की जांच जारी है। पुलिस को पता चला है कि करोड़ों रुपये के कोडीनयुक्त सिरप की सप्लाई जिले के कई मेडिकल स्टोरों को की गई है।
आज़मगढ़ एसएसपी डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि फर्मों ने रांची से कोडीनयुक्त सिरप मंगाया था। विपेंद्र और विकास सिंह के बैंक खाते को खंगाला जा रहा है। जांच में पता चला कि करोड़ों रुपये के सात लाख से अधिक कोडीनयुक्त सिरप की शीशी जिले के मेडिकल स्टोर को सप्लाई की गई है। जांच जारी है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस दबिश दे रही है।
]]>आज़मगढ़। कोडीन कफ सीरप की खरीद-बिक्री का बड़ा मामला जिले में भी सुर्खियों में है। जिले में ड्रग इंस्पेक्टर की तहरीर पर आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। जांच में सामने आया कि आरोपी ने लाखों बोतलें खरीदीं, लेकिन उनका कोई रिकार्ड उपलब्ध नहीं कराया गया।
मिली जानकारी के अनुसार, दीदारगंज थाना क्षेत्र के जेठारी नरवे निवासी बीपेंद्र सिंह, जो मार्टीनगंज के बनगांव में एएस फार्मा नाम से मेडिकल स्टोर चलाते थे, उन्होंने आजमगढ़, बस्ती और जौनपुर की फर्मों से कुल 3 लाख 28 हजार कोडीन कफ सीरप की बोतलें खरीदीं।
बीते 28 नवंबर को निरीक्षण के दौरान उनकी दुकान बंद मिली। पूछताछ में मकान मालिक ने बताया कि वह दुकान एक साल पहले ही छोड़ चुके हैं। आरोपी घर पर भी नहीं मिले और फोन, ई-मेल व व्हाट्सएप के जरिए भी खरीद-बिक्री का विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया।
ड्रग इंस्पेक्टर सीमा वर्मा ने बताया कि जीएसटी और एकाउंट्स का कोई विवरण उपलब्ध नहीं कराया जा रहा, जिससे सीरप के दुरुपयोग की आशंका जताई जा रही है।
एसएसपी डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि ड्रग इंस्पेक्टर की तहरीर पर आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और जल्द ही पूछताछ की जाएगी।