जिले में शीतलहर के साथ चल रही सर्द हवाओं ने गलन को और बढ़ा दिया है। हाड़ कंपा देने वाली ठंड से आम जनजीवन प्रभावित हो गया है। न्यूनतम के साथ ही अधिकतम तापमान में भी लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। रविवार को आसमान में बादलों की मौजूदगी और धुंध के कारण लोगों की दिनचर्या पर असर पड़ा। इंसानों के साथ-साथ पशु-पक्षी भी ठंड से बेहाल नजर आए।
मौसम विभाग के अनुसार तापमान में अभी और गिरावट होने की संभावना है। न्यूनतम तापमान गिरकर नौ डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जिससे गलन भरी ठंड ने लोगों की कंपकंपी छुड़ा दी। वहीं अधिकतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी का असर अब मैदानी इलाकों में भी देखने को मिल रहा है।
बीते एक सप्ताह से जिले में बादलों की आवाजाही बनी हुई थी, लेकिन बादलों के छंटते ही शीतलहर का प्रकोप बढ़ गया। लगातार चल रही सर्द हवा के चलते तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है। बीते चार दिनों से दोपहर बाद निकलने वाली धूप भी सर्द हवाओं के आगे बेअसर साबित हो रही है। शनिवार की देर शाम से एक बार फिर आसमान में बादल छाए रहे।
डीएम ने रैन बसेरे में गर्म पानी और अलाव की सुविधा भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान खुली नालियों को तुरंत ढकवाने तथा पानी की सीलिंग की मरम्मत और पेंट कराने को कहा। उन्होंने रैन बसेरा प्रवेश द्वार की सफाई पर भी विशेष जोर दिया। इसके अलावा डीएम ने निर्देश दिया कि रैन बसेरे में उपलब्ध कंबलों को मोटा या डबल किया जाए ताकि कड़ाके की ठंड में लोगों को अधिक राहत मिल सके।
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नवंबर माह के तीसरे दिन घना कोहरा पड़ने से मौसम में ठंडक आ गई। अचानक ठंड बढ़ने से ज्यादातर लोग फुल स्वेटर और जैकेट पहने नजर आए। कुछ लोगों को अलाव की भी आवश्यकता महसूस हुई। रविवार को कोहरा के कारण लोगों को ठंड का अहसास हुआ। कोहरे की चादर इतनी घनी थी कि भगवान भास्कर के दर्शन करीब 10 बजे ही हो सका।
दरअसल, ठंड व कोहरे का असर शनिवार की रात से दिखाई देने लगा था। रविवार को धीरे-धीरे कोहरा घना होता चला गया और सुबह होते-होते पूरा जिला कोहरे से ढंक गया। धूप नहीं निकलने के कारण लोगों को बिस्तर छोड़ने में दिक्कत का सामना करना पड़ा या लोग बिस्तर से लेट उठे। घना कोहरा होने के कारण दृश्यता बहुत कम थी। लगभग 10 मीटर दूर भी नहीं दिखाई दे रहा था। वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा
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