आजमगढ़ से वाराणसी, जौनपुर, सुल्तानपुर और प्रयागराज जाने वाले प्रमुख मार्ग पर स्थित बेलइसा ओवरब्रिज पर आए दिन जाम की समस्या बनी रहती थी। लगातार बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए शासन ने वर्ष 2023 में 62.51 करोड़ रुपये की लागत से दूसरे (समानांतर) रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण को मंजूरी दी थी।
करीब 717.42 मीटर लंबे और 7.50 मीटर चौड़े टू-लेन ओवरब्रिज का निर्माण शुरू में तेज गति से हुआ। दक्षिणी हिस्से का कार्य लगभग पूरा हो चुका है और लक्ष्य था कि जनवरी 2026 तक पूरा पुल चालू कर दिया जाए।
लेकिन नान जेड-ए की भूमि पर बने 12 आवासीय भवन निर्माण में बड़ी बाधा बन गए। इन भवनों को हटाए बिना आगे का कार्य संभव नहीं था। ऐसे में सेतु निगम ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर मुआवजे को लेकर दिशा-निर्देश मांगे।
इसके बाद डीएम ने एडीएम वित्त एवं राजस्व गंभीर सिंह की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया। काफी समय तक कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका, जिससे परियोजना लटकती रही। अब कमेटी ने 60–40 के अनुपात में भुगतान का फैसला लिया है, जिसमें 60 प्रतिशत राशि सरकार के खाते में जमा होगी, जबकि 40 प्रतिशत धनराशि नान जेड-ए की भूमि पर आवास बनाने वाले प्रभावित लोगों को दी जाएगी।
प्रशासनिक स्तर पर निर्णय होने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही भवन हटाने की प्रक्रिया शुरू होगी और बेलइसा दूसरे ओवरब्रिज का निर्माण कार्य फिर रफ्तार पकड़ेगा, जिससे शहरवासियों को जाम से बड़ी राहत मिल सकेगी।
अधिशासी अभिंयता, सेतु निगम ज्ञानेंद्र वर्मा ने बताया कि मुआवजे का निर्धारण हो गया है। अब एसडीएम स्तर से ही निर्माणों को हटाया जाना है। साथ ही जिन लोगों की खुद की जमीन है उनका बैनामा कराना है, इसके बाद ओवर ब्रिज के शेष निर्माण को पूरा कराया जाएगा।
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