आजमगढ़। आपसी प्रेम एवं सौहार्द का त्यौहार दीपावली के मौके पर लालगंज चौकी प्रभारी अमित कुमार त्रिपाठी ने गरीब परिवारों व उनके बच्चों के बीच पहुंचकर मिठाई, पटाखा और अन्य सामानों का वितरण किया।और देर शाम को बच्चों के साथ पटाखें जलाकर दीपावली का त्योहार मनाया।

इस मौके पर उन्होंने कहा कि दीपावली का त्योहार खुशी मनाने का त्यौहार है। हम सभी को आपसी द्वेष, ईर्ष्या, नफरत को मिटाते हुए एक दूसरे को गले लगाकर त्योहार मनाना चाहिए। यही हमारी संस्कृति है। उन्होंने बच्चों को राष्ट्रभक्ति और संस्कार का पाठ पढ़ाते हुए उन्हें मिठाइयां भी खिलाई और फुलझड़ी छुरछुरी पटाखा भी दिया । वहां उपस्थित लोगों से कहा कि प्यार बांटते चलो…. ।
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उन्होंने कहा कि कोई जाति के नाम पर बांट रहा है, कोई क्षेत्र के नाम पर बांट रहा है, कोई भाषा के नाम पर बांट रहा है, कोई अव्यवस्था पैदा करने का काम कर रहा है। बांटने वाले इन तत्वों में रावण और दुर्योधन का डीएनए काम कर रहा है। जो काम त्रेतायुग में रावण ने किया, वही काम बांटने वाले कर रहे हैं।

श्री अयोध्याधाम में बुधवार को दीपोत्सव का नया विश्व कीर्तिमान रचने के बाद गुरुवार पूर्वाह्न वनटांगिया गांव तिकोनिया नंबर तीन पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों के लिए 185 करोड़ रुपये की 74 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण किया।
इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को दीपावली की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देते हुए सीएम योगी ने कहा कि हम सभी को बांटने वाली ताकतों से सतर्क होकर एकजुट रहना होगा। अगर ऐसी ताकतों के धोखे में आकर उन्हें मौका दे दिया तो ये फिर वही काम करेंगे।
गुंडागर्दी का, अराजकता, दंगा कराने का। ये कहीं ताड़का को भेजेंगे, कहीं खर दूषण को भेजेंगे। कहीं चण्ड-मुण्ड को लेकर जाएंगे, अव्यवस्था पैदा करेंगे। बेटी-बहन की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करेंगे। कहीं गरीब की जमीन कब्जा करेंगे। कहीं व्यापारी का अपहरण करेंगे। कहीं राह चलते किसी राहगीर को गोली मारेंगे। कहीं पर्व और त्योहार के पहले दंगा भड़काएंगे। यही तो ये लोग करते थे, 2017 के पहले।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज सरकार ने सबको बिना भेदभाव सुरक्षा, सम्मान, विकास और समृद्धि की गारंटी दे रखी है। सुरक्षित माहौल में ही समृद्धि आती है। सुरक्षित माहौल में ही उज्ज्वल भविष्य की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है।
]]>दीपावली 2024। आज दीपावली का शुभ पर्व देशभर में मनाया जा रहा है।हिंदू धर्म में दिवाली का त्योहार एक प्रमुख त्योहार है। पूरे देश में इस पर्व को बड़े ही धूम-धाम के साथ मनाया जाता है।
दिवाली पर घरों को रोशनी और दीयों से सजाया जाता है और सूर्यास्त के बाद यानी प्रदोष काल में धन की देवी माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर देवता की पूजा होती है। ऐसी मान्यता है कि कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की अमावस्या की रात को मां लक्ष्मी पृथ्वी लोक में भ्रमण के लिए आती हैं और जिन घरों में साफ-सफाई, पूजा-पाठ और मंत्रोचार होता है, वहां पर निवास करने लगती हैं। इसलिए दिवाली की शाम महालक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व होता है। आइए जानते हैं इस बार दीपावली पर क्या है लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त।
हर वर्ष दीपावली का त्योहार कार्तिक माह की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष कार्तिक महीने की अमावस्या तिथि दो दिन रहेगी। कार्तिक अमावस्या तिथि की शुरुआत 31 अक्तूबर, गुरुवार को दोपहर बाद 3 बजकर 52 मिनट पर होगी और समापन तिथि 01 नवंबर को शाम को 06 बजकर 16 मिनट पर रहेगी, फिर प्रतिपदा तिथि लग जाएगी।
दिवाली पर लक्ष्मी- गणेश पूजन प्रदोष काल, अमावस्या तिथि और स्थिर लग्न में करने की धार्मिक मान्यता है। प्रदोष काल वह समय होता है जब सूर्यास्त हो जाता है और यह लगभग 2 घंटे 24 मिनट तक रहता है। हिंदू धर्म में कोई भी व्रत या त्योहार उदया तिथि के आधार पर तय होता है, लेकिन दिवाली पर माता महालक्ष्मी की पूजा अमावस्या तिथि को रात्रि में होती है। 31 अक्तूबर को पूरी रात अमावस्या तिथि रहेगी। पंचांग के मुताबिक कार्तिक माह की अमावस्या तिथि 31 अक्तबूर को 3 बजकर 52 मिनट पर आरंभ हो जाएगी और इसका समापन 01 नवंबर को शाम 06 बजकर 16 मिनट पर होगा। 31 अक्तूबर को दिवाली मनाई जाएगी और इसी दिन लक्ष्मी पूजा होगी।
दिवाली पर माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर देवता की पूजा अमावस्या व्यापिनी तिथि और प्रदोष काल में करने की मान्यता है। 31 अक्तूबर को प्रदोषकाल की शुरुआत शाम 05 बजकर 36 मिनट से होगी जबकि इसका समापन शाम 08 बजकर 11 मिनट पर होगा। इसके अलावा लक्ष्मी पूजन के लिए स्थिर लग्न बहुत ही शुभ और श्रेष्ठ माना जाता है। 31 अक्तूबर को वृषभ लग्न की शुरुआत शाम 06 बजकर 25 मिनट से लेकर रात 08 बजकर 20 मिनट तक होगा। इस तरह से 31 अक्तूबर को लक्ष्मी पूजन के लिए शुभ मुहूर्त शाम 06 बजकर 25 मिनट से लेकर रात 08 बजकर 20 मिनट के बीच अच्छा रहेगा। कुल मिलाकर 31 अक्तूबर को लक्ष्मी पूजन के लिए शुभ मुहूर्त शाम 05 बजकर 32 मिनट से लेकर रात 08 बजकर 51 मिनट तक रहेगा। इस शुभ मुहूर्त में लक्ष्मी पूजन विशेष फलदायी होगा।

दीपोत्सव से पहले भगवान राम, सीता और लक्ष्मण के साथ पुष्पक विमान (हेलीकाफ्टर) से पहुंचे। योगी ने उनका स्वागत किया। पूरा राम दरबार रथ पर सवार हुआ तो योगी ने अपने हाथों से रथ को खींचा और रामकथा पार्क लाया गया। यहां योगी ने राम की आरती उतारी और राज तिलक किया।


राम मंदिर निर्माण के बाद हो रही पहली दीपावली पर पूरे अयोध्या में खास रौनक है। दीपोत्सव के आठवें संस्करण के लिए रामनगरी कई दिनों से सज धज रही थी। बुधवार की सुबह से ही पूरा अयोध्या उत्सव सारिका के माहौल जैसा दिखाई देने लगा। एक तरफ झांकियों ने मन मोहा तो दूसरी तरफ सड़कों पर जश्न मनाते राम भक्त दिखाई देते रहे।

दीपोत्सव को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज कराने के लिए मंगलवार को ही कंसल्टेंट निश्चल बरोट के नेतृत्व में 30 सदस्यीय टीम ने दीपों की गणना देर रात तक पूरी कर ली थी। दीपोत्सव के बाद राम की पैड़ी पर ही सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू हो गए। इनमें लेजर शो इमेज प्रोटेक्शन शो खास आकर्षण है।


अयोध्या/ लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में दीपोत्सव प्रारंभ होने से पहले जनसमूह को संबोधित किया। उन्होंने कहा, अयोध्या के लोगों को अब साबित करना होगा कि मां सीता की अग्नि परीक्षा बार-बार न हाे। 500 साल बार राम अपने धरा धाम पर हैं।
राम मंदिर के लिए बलिदान देने वालों को नमन है। उन्होंने कहा, आज दुनिया अयोध्या आ रही है। वहीं, राम मंदिर का विरोध करने वालों पर हमला बाेलते हुए योगी ने कहा कि ये राम के अस्तित्व पर सवाल उठाते हैं, अयोध्या वासियों को आगे आना होगा ताकि राम का संदेश कभी पथ से विचलित न हो।

सीएम योगी ने कहा जिस तरह की भव्यता आज अयोध्या में है वैसी ही भव्यता काशी और मथुरा में हो। देश की हर धार्मिक नगरी में उत्सव जैसा माहौल हो।

सीएम ने कहा कि हम भेदभाव नहीं करते। हम भाषा, जाति और मजहब के नाम पर भेदभाव नहीं करते। राजा राम के गद्दी में बैठने के बाद जो हुआ था वही कर रहे हैं। आज उसी तर्ज पर श्रेष्ठ भारत जन्मा है।


सीएम योगी ने कहा कि प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या एक नया इतिहास रच रहा है। प्राण प्रतिष्ठा के बाद पूरी दुनिया में राम के नाम को जाना है। हमारी संस्कृति को जाना है। इस मौके पर सीएम योगी ने कहा कि सनातन धर्म एक ऐसा धर्म है जिसने सभी को अपने सीने से लगाया।



यह धर्म किसी से नफरत नहीं करता है। इस मौके पर लोगों को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि विपक्षी पार्टियां पहले राम के नाम प्रश्न खड़ा करती थीं। अब पूरी दुनिया राम को मान रही है। मंच पर पहुंचने के बाद सीएम योगी ने राजा राम और लक्ष्मण का तिलक किया।
रिपोर्ट:अरूण यादव
आजमगढ। दीपावली के दिन जिला महिला अस्पाताल में इमरजेंसी सेवा सुचारू रूप से चलेगी जबकि ओपीडी सेवा पूर्णतः बंद रहेगी। इसके साथ ही जिला महिला अस्पताल में सीएमएस ने लोगों से अपील किया कि दिवाली का त्यौहार हर्शो उल्लास के साथ मनाए लेकिन तेज आवाज वाले पटाखों को अस्पताल परिसर के आस-पास न फोड़े।
जिला महिला अस्पताल के सीएमएस डा0 विनय कुमार यादव ने दीपावली की शुभकामना देते हुए बताया कि इमरजेंसी सेवाएं 24 घंटे सातों दिन अनवरत चलती रहती है। दीपावली पर ही आपातकालीन सेवाएं चलती रहेगी। त्यौहार के कारण केवल ओपीडी सेवा पूर्णतः बंद रहेगी। इमरजेंसी सेवा के लिए सभी चिकित्सक के साथ वे स्वयं उपस्थित रहेगें।
उन्होंने बताया कि दिवाली पर पटाखे जलाते समय आंखों की सेहत का ध्यान रखना जरूरी है। बच्चे पटाखे को नजदीक से और सीधे न जलाएं। पटाखे जलने से होने वाले प्रदूषण से बच्चों व सांस के साथ ही अन्य रोगियों की परेशानी बढ़ सकती है । इस दिन हो सके तो बाहर न निकले अगर निकलना पड़ रहा है तो मास्क जरूर लगाएं।
उन्होने बताया कि इस समय मौसम बदलता है। जिससे बच्चे बीमार पड़ते है। उन्होने कहा कि इस समय यह प्रथा रहती है कि बच्चों को सुबह धूप दिखाए लेकिन यह फायदा की जगह नुकसान करता है। बच्चें को मां की गोद में ही रहने दे। उन्होने बताया कि बच्चों को काजल व कान में तेल भी न डाले।
उन्होने लोगों से अपील किया कि दीपावली पर तेज आवाज में पटाखे न छोड़े। खासकर हमारे ही अस्पताल नहीं बल्कि किसी भी अस्पताल के आस-पास तेज आवाज में पटाखे न छोड़े। तेज आवाज में पटाखा छोड़ने से बच्चों व मरीजों को परेशानी होती है।
पहली मान्यता यह है कि सूरन को दिवली के कुछ महीनों पहले ही आलू की तरह ही बोया जाता है और बड़ा होने पर दिवाली के कुछ दिनों पहले ही इसे निकाल लिया जाता है। दीपावली के दिन इसकी कोई भी डिश बनाकर खाई जाती है।इसके बड़े होने पर जब इसे मिट्टी के नीचे से निकाला जाता है तो इसकी जड़ें इतनी ज्यादा विकसित होती हैं कि कुछ न कुछ हिस्सा उनका अंदर रह ही जाता है, जो अगली दिवाली तक बहुत सारे सूरन के रूप में बढ़कर तैयार हो जाता है। इतना ही नहीं एक बार जहां इसकी उपज हो जाती है, वहां आगे भी अपने आप इसकी उपज होती रहती है। इसी बढ़ने की प्रक्रिया को माता लक्ष्मी के समृद्धि बढ़ने की प्रक्रिया से जोड़ कर देखा जाता है। इसलिए ही इसे दीपावली को खाने की परंपरा चली आ रही है।
दूसरी मान्यता यह भी है कि एक बार बहुत भयंकर अकाल पड़ा था तभी एक शिकारी जो जंगल में भूखा प्यासा घूम रहा था, उसने एक कंद को उगते हुए पाया। उसने सिर्फ अपनी भूख मिटाने के लिए और कहीं उसके कबीले वालों की नजर उस कंद पर न पड़ जाए, इसके लिए उसने उस कंद को जमीन में गाड़ दिया जिससे उसे कोई ले न सके और वहां से चला गया।कुछ महीनों बाद जब वह उस कंद को लेने के लिए आया तो उसने वहां अकाल होने के बाद भी वैसे ही बहुत सारे कंद को पाया और बहुत खुश हो गया। उसने सोचा कि इससे तो पूरे कबीले का पेट भर जाएगा,तभी से वहां के लोग इस सूरन को सुख और समृद्धि का प्रतीक मानते हैं और दीपावली पर इसे जरूर खाते हैं।
(लेख में उल्लेखित सलाह व सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना है,कोई भी सवाल या परेशानी हो तो हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें)
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