रिपोर्ट_____अरुण यादव
आजमगढ़। जिला अस्पताल से मानवता और सरकारी सेवा के दायित्व पर सवाल खड़े करने वाला एक वीडियो सामने आया है। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे इस वीडियो में अस्पताल के मुख्य दवा वितरण कक्ष के भीतर ड्यूटी के दौरान जन्मदिन की पार्टी मनाई जाती दिखाई दे रही है। आरोप है कि इस दौरान दवा लेने पहुंचे सैकड़ों मरीज और उनके तीमारदार घंटों तक पर्चा हाथ में लिए खिड़की के बाहर लाइन में खड़े रहे, जबकि अंदर स्वास्थ्य कर्मी केक काटने और फोटो खिंचवाने में व्यस्त थे।
जानकारी के अनुसार, मंगलवार को दवा कक्ष प्रभारी अनिल चौधरी का जन्मदिन था। सुबह से ही दवा कक्ष में पार्टी की तैयारियां शुरू हो गई थीं। दोपहर करीब 12 बजे दवा वितरण का काम प्रभावित हो गया और दवा कक्ष के भीतर केक काटकर जन्मदिन मनाया गया। इस दौरान दवाओं के स्टॉक रूम को गुब्बारों और रिबन से सजाया गया था, जबकि बाहर मरीज गर्मी और उमस में अपनी बारी का इंतजार करते रहे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दूर-दराज के गांवों से आए बुजुर्ग, महिलाएं और गोद में बीमार बच्चों को लेकर पहुंचे परिजन काफी देर तक लाइन में खड़े रहे, लेकिन दवा वितरण की गति बेहद धीमी रही। आरोप है कि ड्यूटी के समय सरकारी परिसर में पार्टी आयोजित कर अस्पताल के नियमों और अनुशासन की खुलकर अनदेखी की गई।
मामले को लेकर अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि घटना के दौरान जिम्मेदार अधिकारी स्थिति पर ध्यान देने के बजाय अपने कक्ष में मौजूद रहे और मरीजों की परेशानी को गंभीरता से नहीं लिया गया।
इस पूरे मामले में एसआईसी डॉ. सतीश चंद्र कन्नौजिया ने कहा कि दवा कक्ष में ड्यूटी के दौरान पार्टी मनाना उचित नहीं है। यदि वायरल वीडियो और लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो पूरे मामले की जांच कर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
घटना का वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर लोगों में नाराजगी है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच के बाद जिम्मेदार कर्मचारियों पर वास्तव में कार्रवाई होती है या मामला केवल जांच तक ही सीमित रह जाता है।
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रिपोर्ट_____अरुण यादव
आजमगढ़। जनपद के मेंहनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र अंतर्गत ठोठिया गांव में कालरा जैसी बीमारी की आशंका ने ग्रामीणों और स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। गांव में अचानक बड़ी संख्या में लोगों में उल्टी-दस्त के लक्षण मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल मेडिकल टीम भेजकर जांच और उपचार शुरू कर दिया। इस बीच 20 वर्षीय अंतिमा की उपचार से पहले ही मौत हो गई, जिससे पूरे गांव में दहशत का माहौल है। हालांकि स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि बीमारी की वास्तविक पुष्टि लैब जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब तक करीब डेढ़ दर्जन ग्रामीण बीमार पाए गए हैं। इनमें ममता (30), प्रीति (27), कुमार सनाप (25), तेतरी (45), आराध्या (15), राजपत (70), निर्जला (32), रीता (60), प्रमिला (52), आंचल (23), लक्ष्मी (22) और दीपचंद सनाप (85) समेत अन्य लोग शामिल हैं। सभी मरीजों की चिकित्सकीय जांच कर आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई गईं तथा गांव में विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाया गया।
गंभीर स्थिति वाले मरीजों में ममता, मंती देवी, आराध्या और राजपत को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कर प्राथमिक उपचार दिया गया। उपचार के बाद तीन मरीजों की हालत में सुधार होने पर उन्हें घर भेज दिया गया, जबकि मंती देवी का इलाज जौनपुर के एक निजी अस्पताल में जारी है।
घटना की सूचना मिलते ही जिला अस्पताल से डिप्टी सीएमओ डॉ. अजीजी स्वास्थ्य टीम के साथ गांव पहुंचे और हालात का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि पेयजल स्रोतों, खाद्य पदार्थों और संभावित संक्रमण के कारणों की गहन जांच कराई जा रही है। प्रभावित इलाके में साफ-सफाई, दवा का छिड़काव और जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है।
सीएचसी मेंहनगर के अधीक्षक डॉ. जैनेंद्र मिश्रा ने बताया कि प्रथम दृष्टया कुछ मरीजों में कालरा जैसे लक्षण मिले हैं, लेकिन अंतिम पुष्टि लैब जांच रिपोर्ट आने के बाद ही होगी। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग पूरे गांव की लगातार निगरानी कर रहा है और लोगों से उबला पानी पीने तथा स्वच्छता का विशेष ध्यान रखने की अपील की गई है।
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रिपोर्ट______अरुण यादव
आजमगढ़। जिले में प्रान्तीय चिकित्सा सेवा संघ (PMS) आजमगढ़ के चुनाव की आधिकारिक घोषणा कर दी गई है। संघ के चुनाव के लिए 5 अगस्त 2026 को मतदान कराया जाएगा। चुनाव प्रक्रिया की जिम्मेदारी मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला महिला चिकित्सालय आजमगढ़ डॉ. विनय कुमार सिंह को चुनाव अधिकारी तथा मण्डलीय जिला चिकित्सालय के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. जे.पी. श्रीवास्तव को रिटर्निंग अधिकारी के रूप में सौंपी गई है।
चुनाव अधिकारी डॉ. विनय कुमार सिंह ने बताया कि चुनाव प्रक्रिया 22 जुलाई 2026 से प्रारंभ हो चुकी है और 5 अगस्त 2026 को मतदान एवं मतगणना के साथ संपन्न होगी।
चुनाव कार्यक्रम
नामांकन: 22 जुलाई से 28 जुलाई 2026 तक
नाम वापसी: 29 जुलाई 2026
नामांकन पत्रों की जांच: 29 जुलाई 2026
मतदान: 5 अगस्त 2026, दोपहर 12:00 बजे से शाम 7:00 बजे तक
मतगणना एवं परिणाम: 5 अगस्त को शाम 7:00 बजे के बाद
चुनाव की घोषणा के बाद जिले के सरकारी चिकित्सकों के बीच चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। आगामी दिनों में विभिन्न पदों के लिए उम्मीदवारों के नामांकन के साथ चुनावी गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।
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रिपोर्ट______अरुण यादव
आजमगढ़। जिले से एक ऐसी झकझोर देने वाली खबर आ रही है, जिसे सुनकर आपकी रूह कांप जाएगी। अस्पताल, जिसे हम जिंदगी बचाने का मंदिर कहते हैं, वहीं पर जिंदगी का सौदा करने वाले कुछ सफेदपोश लोग सक्रिय हैं! मामला मंडलीय जिला अस्पताल के ब्लड बैंक का है, जहाँ सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि मरीजों की मौत का सामान तैयार किया जा रहा था!
शिकायत मिली है कि यहाँ खून की भारी कालाबाजारी हो रही है। और बात सिर्फ पैसों के अवैध लेन-देन तक ही सीमित नहीं है… आरोप इससे भी कहीं ज्यादा संगीन और घिनौना है! आरोप है कि यहाँ खून को ‘डाइल्यूट’ यानी पानी मिलाकर पतला किया जा रहा था! जी हां, आपने सही सुना… मरीजों की रगों में दौड़ने वाले जीवन रक्षक खून में मिलावट का खेल चल रहा था।
सोचिए, एक लाचार मरीज जो जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है, उसका परिवार पाई-पाई जोड़कर खून का इंतजाम करता है। लेकिन उसे क्या मिल रहा है? मिलावटी और पतला किया हुआ खून! यह सीधा-सीधा हत्या का प्रयास है। इस सनसनीखेज शिकायत के बाद जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है। जिलाधिकारी रविंद्र कुमार के निर्देश पर आनन-फानन में सीएमओ डॉ. एनआर वर्मा और एसआईसी डॉ. सतीश चंद्र कन्नौजिया ने पूरी टीम के साथ ब्लड बैंक पर धावा बोल दिया।
छापेमारी के दौरान स्टॉक रजिस्टर, ब्लड स्टोरेज और डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम की बारीकी से जांच की गई है। कर्मचारियों से पूछताछ हो रही है, फाइलों को खंगाला जा रहा है। हालांकि, अधिकारी अभी कैमरे पर खुलकर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। सीएमओ का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पुष्टि होगी और दोषियों पर एफआईआर (FIR) दर्ज कर जेल भेजा जाएगा। लेकिन सवाल यह उठता है कि,आखिर किसकी शह पर ब्लड बैंक में यह मौत का खेल इतने दिनों से चल रहा था? क्या चंद रुपयों के लालच में इंसानी जिंदगियों को दांव पर लगाने वाले इन गिद्धों को कानून का कोई खौफ नहीं है? और सबसे बड़ा सवाल—यह इस ब्लड बैंक का पहला विवाद नहीं है, तो फिर पहले हुई शिकायतों पर इतनी ढील क्यों दी गई कि इनके हौसले इतने बुलंद हो गए?प्रशासन भले ही अब सख्त कार्रवाई का दावा कर रहा हो, लेकिन इस मामले ने स्वास्थ्य विभाग की साख पर एक बड़ा धब्बा लगा दिया है। हम इस खबर पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। जांच में क्या निकलकर आता है और इन दोषियों को क्या सजा मिलती है, यह देखना बाकी है।
]]> जूनियर हाई स्कूल जाफरपुर में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का भव्य शुभारम्भ जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार द्वारा छात्र-छात्राओं को अल्बेन्डाजोल की दवा खिलाकर किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय के स्काउट-गाइड के बच्चों द्वारा सलामी एवं तालियों के साथ स्वागत से हुई, जिससे वातावरण उत्साहपूर्ण हो गया।
दवा वितरण से पूर्व जिलाधिकारी ने स्वयं अल्बेन्डाजोल दवा का सेवन कर यह संदेश दिया कि यह दवा पूरी तरह सुरक्षित है और इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं होता। उन्होंने बताया कि कृमिनाशक दवा बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य, मानसिक तीव्रता और शारीरिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। पेट में कीड़े होने से बच्चों में कुपोषण, एनीमिया और कमजोरी जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं, जिन्हें इस दवा से रोका जा सकता है।
जिलाधिकारी ने बताया कि यह अभियान 1 वर्ष से 19 वर्ष तक के बच्चों एवं किशोरों के लिए संचालित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जो बच्चे किसी कारणवश आज दवा नहीं ले पाएंगे, उनके लिए 13 फरवरी को मॉप-अप राउंड आयोजित किया जाएगा, ताकि कोई भी पात्र बच्चा दवा से वंचित न रह जाए। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को अल्बेन्डाजोल की दवा अवश्य दिलाएं।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एन.आर. वर्मा ने कहा कि यह दवा पूरी तरह सुरक्षित है और बच्चों के पोषण स्तर व मानसिक विकास के लिए अत्यंत लाभकारी है। वहीं डिप्टी सीएमओ एवं नोडल एनडीडी डॉ. अरविंद चौधरी ने बताया कि अभियान के तहत जनपद के सभी सरकारी एवं निजी विद्यालयों तथा आंगनबाड़ी केंद्रों पर निःशुल्क दवा दी जा रही है।
इस अवसर पर शिक्षा व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, चिकित्सक, शिक्षक और कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और अभियान को सफल बनाने का संकल्प लिया।
जिलाधिकारी के आदेश एवं मुख्य चिकित्साधिकारी के निर्देशानुसार जनपद में अवैध व अनियमित रूप से संचालित चिकित्सकीय प्रतिष्ठानों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में आज बिलरियागंज स्थित हेरा चाइल्ड सेंटर का स्वास्थ्य विभाग की टीम ने औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान गंभीर खामियां पाए जाने पर सेंटर को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया।
इस कार्रवाई का नेतृत्व डिप्टी सीएमओ/नोडल निजी चिकित्सालय प्रतिष्ठान डॉ. आलेन्द कुमार ने किया। उनके साथ पटल सहायक धीरेन्द्र शुक्ला एवं सीएचसी बिलरियागंज के चिकित्सक डॉ. निलेश भी मौजूद रहे।
निरीक्षण में पाया गया कि सेंटर में लगभग पाँच बेड पर नवजात शिशुओं का उपचार किया जा रहा था, जबकि मौके पर कोई अधिकृत या योग्य चिकित्सक उपस्थित नहीं था। इसके अलावा प्रतिष्ठान के पास वैध पंजीकरण भी नहीं मिला। जांच के दौरान अग्निशमन सुरक्षा, प्रदूषण नियंत्रण तथा बायो-मेडिकल वेस्ट निस्तारण से जुड़े मानकों के उल्लंघन की भी पुष्टि हुई।
गौरतलब है कि हाल ही में लालगंज क्षेत्र में एक मासूम की मौत की घटना के बाद मुख्य चिकित्साधिकारी ने गैर-पंजीकृत, अनधिकृत और अप्रशिक्षित चिकित्सकों द्वारा संचालित संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। उसी के तहत यह कार्रवाई की गई।
फिलहाल हेरा चाइल्ड सेंटर को पूरी तरह सील कर आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है।
मिली जानकारी के अनुसार देवगांव कोतवाली क्षेत्र के नगर पंचायत कटघर लालगंज स्थित गीता चाइल्ड केयर में थाना तरवां क्षेत्र के लोकईपुर ऊंचाहुआ गांव निवासी चार वर्षीय कार्तिक की इलाज के दौरान मौत हो गई। बताया गया कि कार्तिक को डेंगू और मलेरिया की शिकायत पर 3 फरवरी को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां कई दिनों से उसका इलाज चल रहा था।
शनिवार की दोपहर करीब दो बजे इलाज के दौरान बालक की मौत हो गई। मासूम की मौत की सूचना मिलते ही परिजन आक्रोशित हो गए और अस्पताल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। सूचना पर मौके पर पुलिस भी पहुंच गई और स्थिति को संभाला।
घटना की जानकारी मिलते ही डिप्टी सीएमओ अलेंद्र कुमार भी मौके पर पहुंचे और अस्पताल की जांच की। जांच के दौरान जब अस्पताल प्रशासन से रजिस्ट्रेशन संबंधी कागजात मांगे गए तो वे कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। इसके बाद अस्पताल को अवैध रूप से संचालित पाए जाने पर तत्काल सीज कर दिया गया।
अस्पताल में भर्ती करीब आधा दर्जन मरीजों को एहतियातन संयुक्त सौ शैय्या चिकित्सालय लालगंज में स्थानांतरित कराया गया।
वहीं शिवम सोनोग्राफी सेंटर भी बिना वैध पंजीकरण संचालित पाया गया। केंद्र के भीतर छोटी अल्ट्रासाउंड मशीन मिली, लेकिन छापेमारी के समय न मरीज मौजूद था और न ही कोई पंजीकृत डॉक्टर। अनियमितताओं के चलते इस केंद्र को भी सीज कर दिया गया।
कार्रवाई के दौरान नायब तहसीलदार हरैया, स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी, सहायक धीरेंद्र शुक्ला, फार्मासिस्ट समेत अन्य अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे। टीम ने मौके पर उपकरणों की इन्वेंटरी तैयार कर फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी के माध्यम से पूरी प्रक्रिया दर्ज की। इसके बाद दोनों केंद्रों को लॉक कर सीज कर दिया गया।
मुख्य चिकित्साधिकारी ने कहा कि बिना वैध पंजीकरण और पंजीकृत चिकित्सक के किसी भी अल्ट्रासाउंड/सोनोग्राफी केंद्र का संचालन प्रतिबंधित है। आगे भी ऐसे अवैध केंद्रों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।