रिपोर्ट____अरुण यादव
हत्या के मुकदमे में सुनवाई पूरी करने के बाद अदालत ने तीन आरोपियों को सश्रम आजीवन कारावास तथा प्रत्येक को पचास पचास हजार रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई। जबकि एक आरोपी को पर्याप्त सबूत के अभाव में दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने जुर्माना की अस्सी प्रतिशत धनराशि मृतक की पत्नी को देने का आदेश दिया है। मुकदमे की विवेचना ठीक से न करने पर अदालत विवेचक मनीष पाल के विरुद्ध कार्यवाही करने के लिए पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया है।यह फैसला जिला एवं सत्र न्यायाधीश जय प्रकाश पांडेय ने शुक्रवार को सुनाया। अभियोजन पक्ष के अनुसार वादी मुकदमा विनोद चौहान निवासी आलमपुर थाना अहरौला की गांव के रामसेवक चौहान से रंजिश चल रही थी। इस रंजिश को लेकर वादी विनोद चौहान की पत्नी इसरावती ने 22 सितंबर 2024 को एक मुकदमा दर्ज कराया था। जिससे नाराज होकर 29 सितंबर 2024 की रात शुभम चौहान चौहान, रामसेवक चौहान सुरेंद्र आदि ने वादी विनोद चौहान के पिता श्रीराम की गोली मारकर हत्या कर दी।इस हत्या के लिए वादी विनोद चौहान ने शुभम चौहान समेत दस लोगों के विरुद्ध नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई। जांच पूरी करने के बाद पुलिस ने चार आरोपियों के विरुद्ध चार्जशीट न्यायालय में प्रेषित किया। अभियोजन पक्ष की तरफ से जिला शासकीय अधिवक्ता प्रियदर्शी पियूष त्रिपाठी, सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता दीपक कुमार मिश्रा तथा जितेन्द्र यादव एडवोकेट ने कुल नौ गवाहों को न्यायालय में परीक्षित कराया। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने आरोपी शुभम चौहान, रामसेवक तथा सुरेंद्र को सश्रम आजीवन कारावास तथा प्रत्येक को पचास पचास हजार रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई।जबकि एक आरोपी सतिराम को पर्याप्त सबूत के अभाव में दोषमुक्त कर दिया।
]]>अभियोजन पक्ष के अनुसार बसंत राम निवासी धनार बांध, थाना जहानागंज की पुत्री कविता की शादी वर्ष 2018 में रतन उर्फ रजनीश निवासी बड़हलगंज, थाना जहानागंज के साथ हुई थी। आरोप है कि शादी के बाद ससुराल पक्ष द्वारा नकद रुपये की मांग और संतान न होने को लेकर कविता का लगातार उत्पीड़न किया जाता था। बताया गया कि तीन अक्टूबर 2022 को ससुराल में कविता की फांसी लगाकर हत्या कर दी गई। इस मामले में मृतका के पिता बसंत राम ने पति रतन उर्फ रजनीश, सास ज्ञानमती, ससुर रमेश, ननद प्रियंका तथा देवर मनीष के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कराया था।
पुलिस ने जांच पूरी कर सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता अभय दत्त गोंड और हरेंद्र सिंह ने अदालत में कुल 11 गवाहों को परीक्षित कराया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आरोपी पति रतन उर्फ रजनीश को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में सास ज्ञानमती, ससुर रमेश, ननद प्रियंका और देवर मनीष को दोषमुक्त कर दिया।
]]>आजमगढ़। करीब 12 वर्ष पूर्व दलित युवक की हत्या के मुकदमे में सुनवाई पूरी करने के बाद एससी एसटी कोर्ट के जज विजय कुमार वर्मा ने सोमवार को तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत दो आरोपियों पर पच्चीस हजार रुपए अर्थदंड तथा एक आरोपी पर पचास हजार रुपए अर्थदंड भी लगाया है। जबकि पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में एक आरोपी को दोष मुक्त कर दिया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार हेमा कुमारी निवासी रोवापार थाना मेहनाजपुर के भाई अर्जुन से रोहित उर्फ कमलेश निवासी विनैकी थाना मेहनाजपुर से रंजिश चल रही थी। इसी रंजिश के चलते 31 अगस्त 2014 की सुबह जब अर्जुन अपनी बेटी और भांजी के साथ बाइक से घर लौट रहा था। तब कूबा डिग्री कॉलेज के सामने रोहित उर्फ कमलेश, सरजू, डम्पी उर्फ तेजप्रताप सिंह निवासी रोवापार तथा जितेंद्र सिंह सिंह निवासी शाहपुर थाना मेहनाजपुर ने अर्जन को रोक लिया। सभी हमलावरों ने अर्जुन को गोली मार दिया। जिससे अर्जुन की मौके पर ही मृत्यु हो गई।
इस घटना में पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद सभी आरोपियों के विरुद्ध चार्जशीट न्यायालय में प्रेषित किया। अभियोजन पक्ष की तरफ से लोक अभियोजक आलोक त्रिपाठी ने कुल 13 गवाहों को न्यायालय में परीक्षित कराया ।
दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने आरोपी रोहित उर्फ कमलेश, सरजू को आजीवन कारावास तथा पच्चीस हजार रुपए अर्थदंड जबकि डंपी उर्फ तेज प्रताप सिंह को आजीवन कारावास तथा पचास हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई। वही जितेंद्र सिंह को सबूत के अभाव में कोर्ट ने दोषमुक्त कर दिया।
]]>अभियोजन पक्ष के अनुसार मुबारकपुर थाना क्षेत्र के गांव पूरा सोफी में 10 फीट जमीन के लिए शिया और सुन्नी समुदाय के लोगों में विवाद चल रहा था। 27 अप्रैल 1999 को शिया समुदाय के लोग मोहर्रम का जुलूस निकाल रहे थे। इसी दौरान दूसरे पक्ष की ओर से जुलूस रोकने पर विवाद हो गया। पथराव भी हुआ था। पुलिस प्रशासन ने किसी तरह हालात काबू किए थे। शाम को पूरा ख्वाजा के अली अकबर ताजिया दफन करने हैदराबाद स्थित शाह के पंजे पर गए थे। इसके बाद वह लापता हो गए थे। अली अकबर के पुत्र जैगम ने 28 अप्रैल को थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी। 30 अप्रैल को अली अकबर की सिर कटी लाश राजा भाट के पोखरे में मिली थी लेकिन सिर आज तक नहीं मिल सका। 30 अप्रैल को ही भतीजे नासिर हुसैन ने मुबारकपुर थाने में हत्या की प्राथमिकी कराई थी। पुलिस की विवेचना में सामने आया कि मोहर्रम के जुलूस से लौटते समय अली अकबर की पीटकर हत्या कर दी गई थी।
इस मामले में पुलिस ने 16 लोगों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान हाजी मोहम्मद सुलेमान, नजीबुल्लाह, हमीदुल्लाह उर्फ झीनक और हाजी अब्दुल खालिक की मौत हो चुकी है।
अभियोजन पक्ष की ओर से डीजीसी फौजदारी एवं एडीजीसी ने 9 गवाहों की न्यायालय में गवाही कराई। अदालत ने 13 फरवरी को ही 12 आरोपियों को दोषी करार दिया और अदालत ने सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए 17 फरवरी मंगलवार की तिथि तय की थी ।
मंगलवार आज सजा पर सुनवाई करते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश जय प्रकाश पांडेय की अदालत ने हुसैन अहमद निवासी हैदराबाद, मोहम्मद अयूब फैजी, फहीम अख्तर, असरार अहमद, मोहम्मद याकूब सभी निवासी दुल्हनपूरा, अली जहीर, इरशाद निवासी पूरा सोफी, मोहम्मद असद, अफजाल, अलाउद्दीन, दिलशाद व वसीम निवासी हैदराबाद को आजीवन कारावास की सजा और प्रत्येक को 66 हज़ार 500 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। इनमें मोहम्मद अयूब फैजी, फहीम अख्तर और मोहम्मद याकूब सगे भाई हैं।
]]>अभियोजन कहानी के अनुसार वादी मुकदमा जितेंद्र यादव निवासी दौलतपुर थाना मेंहनगर के पिता हरिलाल यादव को रानी की सराय थाने की पुलिस ने 29 मार्च 2003 को एक बैटरी चोरी के मुकदमे में हिरासत में लिया था। उसी रात हरिलाल के बारे में जानकारी होने पर जितेंद्र यादव अपने रिश्तेदार रामवचन यादव के साथ 29 मार्च को 2003 को थाने पर पहुंचा था।
जितेंद्र यादव के सामने ही पूछताछ के दौरान थानाध्यक्ष जे के सिंह के ललकारने पर दरोगा नरेंद्र बहादुर सिंह ने हरिलाल यादव को गोली मार दी।घायल हरिलाल यादव को जिला अस्पताल ले जाया गया जहां हरिलाल यादव की मृत्यु हो गई।घटना के समय जितेंद्र यादव तथा रामवचन यादव को हवालात में बंद कर दिया गया।घटना के दूसरे दिन 30 मार्च को कोतवाली में जितेंद्र की तहरीर पर यह मुकदमा दर्ज किया गया।उधर घटना के बाद इसी मामले में रानी की सराय थाने में हत्या का मुकदमा दरोगा नरेंद्र बहादुर सिंह के विरुद्ध पहले ही दर्ज कर लिया गया था।जिसके कारण शहर कोतवाली में दर्ज मुकदमे को रानी की सराय थाने में दर्ज मुकदमे में शामिल कर लिया गया।बाद में शासन ने सितंबर 2003 में इस मामले की जांच सी बी सी आई डी को सौंप दी।
सी बी सी आई डी ने फरवरी 2005 में चार्जशीट न्यायालय में प्रेषित किया।दौरान मुकदमा आरोपी दरोगा नरेंद्र बहादुर सिंह की मृत्यु हो गई। अभियोजन पक्ष की तरफ से जिला शासकीय अधिवक्ता प्रियदर्शी पियूष त्रिपाठी तथा सहायक शासकीय अधिवक्ता दीपक कुमार मिश्रा ने कुल सात गवाहों को न्यायालय में परीक्षित कराया।
दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने आरोपी तत्कालीन थानाध्यक्ष जे के सिंह को आजीवन कारावास तथा एक लाख पांच हजार रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
]]>अभियोजन पक्ष के अनुसार वादी मुकदमा राजेश कुमार निवासी बड़ौदा खुर्द थाना जहानगंज की गांव के ही राजकुमार से जमीनी विवाद की रंजिश चल रही थी। इसी विवाद को लेकर 3 जनवरी 2023 की सुबह दस बजे राजकुमार उनके तीनों लड़के दीपक उर्फ अमित, मनीष उर्फ डंपी सतीश उर्फ पंपी, राजकुमार की पत्नी आशा, तथा एक रिश्तेदार अलका लाठी डंडा, कुल्हाड़ी आदि से लैस होकर राजेश के घर में घुस गए। सभी हमलावरों ने राजेश तथा राजेश की पत्नी कौशल्या, राकेश तथा राकेश की पत्नी बबीता को बुरी तरह से मारा पीटा। इस हमले में कौशल्या की मौके पर ही मृत्यु हो गई।
पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद सभी आरोपियों के विरुद्ध चार्जशीट न्यायालय में प्रेषित कर दिया। अभियोजन पक्ष की तरफ से जिला शासकीय अधिवक्ता प्रियदर्शी पियूष त्रिपाठी तथा सहायक शासकीय अधिवक्ता दीपक मिश्रा ने कुल आठ गवाहों को न्यायालय में परीक्षित कराया। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने आरोपी राजकुमार, दीपक उर्फ अमित, मनीष उर्फ डंपी, सतीश उर्फ पम्पी तथा आशा को आजीवन कारावास और प्रत्येक पर 61500 रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं पर्याप्त सबूत के अभाव में अलका को दोष मुक्त कर दिया।
]]>अभियोजन पक्ष के अनुसार वादी मुकदमा जय प्रकाश सिंह निवासी मसीरपुर थाना देवगांव के घर का 7 अप्रैल 2019 को दिन में दस बजे बारजे का निर्माण कार्य चल रहा था।तभी पड़ोस के राणा प्रताप सिंह ने निर्माण कार्य रोक दिया। निर्माण कार्य रोकने पर जय प्रकाश सिंह तथा उनके छोटे भाई अनिल सिंह ने ऐतराज जताया। इसी विवाद में राणा प्रताप और उनके भाई विजय प्रताप, बेटे नितेश, चचेरे भाई योगेश, ज्ञानेश ,ओमप्रकाश तथा एक साथी अखिलेश सिंह उर्फ पप्पू ने ईंट पत्थर चलाने लगे व असलहों से फायर किया। राणा प्रताप ने लक्ष्य करके अनिल सिंह को गोली मार दी। जिससे अनिल सिंह की मौके पर ही मृत्यु हो गई।इस हमले में वादी के घर के कई अन्य लोग भी बुरी तरह घायल हो गए।पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद न्यायालय में चार्जशीट भेज दिया। अभियोजन पक्ष की तरफ से सहायक शासकीय अधिवक्ता निर्मल कुमार शर्मा तथा ओमप्रकाश सिंह ने कुल आठ गवाहों को न्यायालय में परीक्षित कराया। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने आरोपी राणा प्रताप सिंह को आजीवन कारावास तथा पैंसठ हजार रूपये अर्थ दंड की सजा सुनाई। जबकि पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में आरोपी विजय प्रताप ,ज्ञानेश, योगेश, नितेश, ओम प्रकाश तथा अखिलेश सिंह उर्फ पप्पू को दोषमुक्त कर दिया।
]]>अभियोजन पक्ष के अनुसार वादी मुकदमा सूर्यभान निवासी निकासीपुर थाना दीदारगंज की लड़की की शादी 21 मई 2017 को थी।उस शादी में गांव के केदार यादव के लड़के तथा सूर्यभान के भतीजे ओमप्रकाश से नाच गाने के प्रोग्राम को लेकर विवाद हो गया था।इसी विवाद को लेकर 15 जून 2017 की सुबह सात बजे जब ओम प्रकाश, उनका लड़का अभिषेक,पत्नी निर्मला खेत में खाद फेंक रहे थे तब केदार यादव तथा उनके लड़के राधेश्याम,रघु तथा घनश्याम ने लाठी डंडा तथा टांगी से उन पर हमला कर दिया। हमलावरों ने अभिषेक की हत्या कर दिया तथा निर्मला को मरणासन्न स्थिति में पहुंचा दिया।पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद सभी आरोपियों के विरुद्ध चार्जशीट न्यायालय में प्रेषित कर दी।
गवाहों के बयान व दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने केदार,रघु, घनश्याम तथा राधेश्याम को आजीवन कारावास तथा प्रत्येक को साढ़े बाइस हजार रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
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