रिपोर्ट______अरुण यादव
आजमगढ़। जिले की साइबर सेल और महाराजगंज थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर बजरंग चौक स्थित एसबीआई बैंक के पास से विकास यादव निवासी उरसकुड़वा, थाना महाराजगंज को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तारी के दौरान उसके पास से एक मोबाइल फोन, फर्जी आधार कार्ड तथा ₹1,220 नकद बरामद हुए। पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि वह फर्जी आधार कार्ड बनाकर विभिन्न लोगों के नाम से बैंक खाते खुलवाता था और साइबर ठगी से प्राप्त रकम इन खातों में मंगाकर जनसेवा केंद्रों व एटीएम के माध्यम से नकद निकालता था।
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने अपने भाई आकाश यादव, राजू निषाद और मोहन त्रिपाठी समेत अन्य साथियों के साथ मिलकर संगठित तरीके से यह नेटवर्क संचालित करने की बात कबूल की। गिरोह फेसबुक पर विदेशी नागरिक बनकर फर्जी प्रोफाइल तैयार करता, महिलाओं से दोस्ती कर महंगे गिफ्ट भेजने का झांसा देता और बाद में कस्टम चार्ज के नाम पर ठगी करता था।
जांच में आरोपी के बैंक खाते से जुड़ी साइबर शिकायत भी सामने आई है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 317(2), 318(4), 336(3), 340(2) तथा आईटी एक्ट की धारा 66 के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे न्यायालय में पेश किया। मामले में फरार अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
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रिपोर्ट_____अरुण यादव
आजमगढ़। फर्जी मोबाइल एप के जरिए लखनऊ निवासी एक व्यक्ति से 21.17 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में साइबर सेल की जांच के बाद आजमगढ़ के एक युवक और उसके लखनऊ निवासी साथी के खिलाफ कोतवाली पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। जांच में सामने आया कि साइबर ठगी की रकम का हिस्सा आरोपी के बैंक खाते में भेजा गया था, जिसे एटीएम से कई बार में निकाल लिया गया। पुलिस के मुताबिक, लखनऊ के सरोजनीनगर निवासी संजय महरोत्रा ने एनसीआरपी (NCRP) पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी कि फर्जी मोबाइल एप के माध्यम से उनसे 21.17 लाख रुपये की साइबर ठगी कर ली गई। शिकायत के आधार पर साइबर सेल ने तकनीकी जांच शुरू की। वहीं जांच में पता चला कि ठगी की रकम में से 90 हजार रुपये 28 नवंबर 2025 को एक बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए थे। तकनीकी विश्लेषण से यह भी सामने आया कि उसी दिन लखनऊ में एटीएम के जरिए नौ बार में पूरी रकम निकाल ली गई। बैंक खाते की जांच में उसकी पहचान आजमगढ़ शहर के आसिफगंज निवासी मो. जैद के रूप में हुई। पूछताछ में मो. जैद ने बताया कि उसकी पहचान ऑनलाइन PUBG गेम खेलने के दौरान लखनऊ निवासी ताहा से हुई थी। ताहा ने अधिक पैसे कमाने का लालच देकर उसका बैंक पासबुक और एटीएम कार्ड अपने पास रख लिया और खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी से प्राप्त रकम के लेनदेन के लिए किया। इसके बदले उसे 5 हजार रुपये कमीशन भी मिला था। वहीं साइबर सेल की जांच में यह भी सामने आया कि मो. जैद का बैंक खाता एक अन्य साइबर धोखाधड़ी के मामले में भी इस्तेमाल किया गया था। इसके बाद कोतवाली पुलिस ने मो. जैद और ताहा के खिलाफ साइबर धोखाधड़ी में सहयोग सहित अन्य सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
]]> सिविल लाइन थाना कोतवाली जनपद आजमगढ़ निवासी आदर्श पुत्र राम सिंह ने थाना कोतवाली स्थित साइबर हेल्प डेस्क पर प्रार्थना पत्र देकर बताया कि उसके क्रेडिट कार्ड से उसकी जानकारी के बिना लगभग 48 हजार रुपये की धनराशि कट गई है। मामले को गंभीरता से लेते हुए साइबर हेल्प डेस्क ने प्रकरण की जांच शुरू की।
जांच के बाद कोतवाली साइबर टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित बैंक और पोर्टल से संपर्क कर उक्त धनराशि को होल्ड कराया। नियमानुसार प्रक्रिया पूरी करने के बाद पुलिस ने पीड़ित के खाते में 48 हजार रुपये की पूरी रकम वापस करा दी।
रकम वापस मिलने पर पीड़ित आदर्श ने आजमगढ़ पुलिस का आभार जताया।
वहीं पुलिस ने उसे भविष्य में साइबर अपराध से बचाव के लिए जागरूक करते हुए बताया कि ऐसी किसी भी घटना पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in वेबसाइट पर शिकायत दर्ज करें, अथवा नजदीकी थाने में स्थापित साइबर हेल्प डेस्क को सूचित करें।
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मिली जानकारी के अनुसार, थाना सिधारी क्षेत्र के शाहगढ़ निवासी छात्र मुलायम चौहान पुत्र रामजनम चौहान टेलीग्राम ऐप पर प्राप्त एक संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने के बाद साइबर ठगी का शिकार हो गए थे। इस दौरान उनके बैंक खाते से ₹18,481.90 की धनराशि कट गई। पीड़ित द्वारा शिकायत दर्ज कराए जाने पर थाना सिधारी की साइबर टीम ने साइबर सेल आजमगढ़ की तकनीकी सहायता से त्वरित कार्रवाई करते हुए पूरी धनराशि पीड़ित के खाते में वापस करा दी।
वहीं, थाना मुबारकपुर क्षेत्र के ग्राम कटरा निवासी सूरज कुमार पुत्र नन्दलाल गुप्ता से 18 अगस्त 2025 को गलती से ₹18,422 की रकम किसी अन्य के खाते में ट्रांसफर हो गई थी। इस मामले में पीड़ित ने NCRP पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत मिलते ही थाना मुबारकपुर की स्थानीय साइबर क्राइम टीम ने नियमानुसार कार्रवाई करते हुए पूरी धनराशि वापस कराई।
पुलिस द्वारा दोनों पीड़ितों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करते हुए आवश्यक परामर्श भी दिया गया। पुलिस ने बताया कि साइबर अपराध के प्रमुख कारणों में गलत खाते या क्यूआर कोड पर पैसा ट्रांसफर करना, जल्दबाजी में ऑनलाइन भुगतान करना, फर्जी लिंक या कॉल पर भरोसा करना और डिजिटल लेनदेन की जानकारी का अभाव शामिल है।
पुलिस ने आमजन से अपील की है कि पैसे ट्रांसफर करने से पहले खाता विवरण की जांच करें, अनजान लिंक या क्यूआर कोड से भुगतान न करें, किसी को भी ओटीपी, पिन या पासवर्ड साझा न करें। किसी भी संदिग्ध स्थिति में तुरंत लेनदेन रोकें और साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।
अतरौलिया/आज़मगढ़। साइबर अपराधियों के बढ़ते जाल के बीच आज़मगढ़ की अतरौलिया पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक महिला के साथ हुई 25,000 रुपये की साइबर ठगी की पूरी राशि वापस करा दी है। अपने डूबे हुए पैसे वापस पाकर पीड़िता ने पुलिस टीम का आभार व्यक्त किया है।
जानकारी के अनुसार, थाना क्षेत्र के गंगापुर खास निवासी नीलम पत्नी विपिन कुमार के पास बीते 3 सितंबर 2025 को एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया था। जालसाज ने फर्जी कॉल के जरिए झांसा देकर नीलम के खाते से 25,000 रुपये की ठगी कर ली। ठगी का अहसास होने पर पीड़िता ने तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर अपनी शिकायत दर्ज कराई और अतरौलिया थाने में मामला पंजीकृत कराया।
शिकायत मिलते ही थानाध्यक्ष देवेन्द्र नाथ दूबे के निर्देशन में साइबर हेल्पडेस्क टीम सक्रिय हो गई। प्रभारी उपनिरीक्षक अभिषेक यादव और कंप्यूटर ऑपरेटर आशीष कुमार ने तकनीकी जांच करते हुए मामले को आगे बढ़ाया। माननीय न्यायालय से फंड रिलीज ऑर्डर प्राप्त करने के बाद पुलिस ने संबंधित बैंक के नोडल अधिकारी से संपर्क कर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की। पुलिस की इस तत्परता का परिणाम यह रहा कि पीड़िता के खाते में ठगी गई पूरी राशि 25,000 रुपये वापस करा दी गई।
इस सफलता में साइबर हेल्प डेस्क के प्रभारी उपनिरीक्षक अभिषेक यादव, कंप्यूटर ऑपरेटर ग्रेड-ए आशीष कुमार तथा महिला कांस्टेबल प्रियंका की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
थानाध्यक्ष ने अपील करते हुए कहा कि साइबर ठगी होने की स्थिति में थानाध्यक्ष ने कहा कि पीड़ित व्यक्ति घबराए नहीं, बल्कि तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या नजदीकी थाने के साइबर हेल्प डेस्क पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। उन्होंने बताया कि समय पर शिकायत दर्ज होने से संबंधित बैंक खातों को तुरंत फ्रीज कराया जा सकता है, जिससे ठगी की रकम वापस मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है। साथ ही उन्होंने आमजन से अपील की कि किसी भी अज्ञात कॉल, लिंक या ओटीपी साझा करने से बचें और साइबर सुरक्षा के प्रति सतर्क रहें।
आजमगढ़। जिले के कप्तानगंज थाना क्षेत्र में साइबर ठगी के शिकार हुए एक व्यक्ति को पुलिस की त्वरित कार्रवाई से ₹25,000 की पूरी राशि वापस मिल गई। थाना कप्तानगंज पुलिस ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में तत्परता दिखाते हुए यह सफलता हासिल की।
मिली जानकारी के अनुसार बीते, 27 सितंबर को रामदरश विश्वकर्मा पुत्र श्यामकेर विश्वकर्मा निवासी बनकट जगदीश (कोइरीपुर), थाना कप्तानगंज, जनपद आजमगढ़ के मोबाइल से उनके ही एक सहकर्मी द्वारा फोनपे के माध्यम से ₹25,000 बिना अनुमति के अपने खाते में स्थानांतरित कर लिए गए थे।
पीड़ित ने तत्काल थाना कप्तानगंज के साइबर हेल्प डेस्क में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायत को साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 एवं पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर पंजीकृत किया (Ack No. 23109250150300)। तत्पश्चात साइबर हेल्प डेस्क ने एनसीआरपी पोर्टल के माध्यम से राशि को होल्ड करा दिया।
पुलिस की मेहनत और सतर्कता से संबंधित खाते (India Post Payments Bank, नई दिल्ली, खाता संख्या – 05561024***) से संपर्क कर ₹25,000 की पूरी राशि आवेदक को वापस करा दी गई। पैसे मिलने पर पीड़ित ने कप्तानगंज पुलिस को धन्यवाद दिया।
कप्तानगंज पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की साइबर ठगी या ऑनलाइन फ्रॉड की घटना होने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल (www.cybercrime.gov.in) पर शिकायत दर्ज करें। पुलिस ने कहा कि लोग पासवर्ड, ओटीपी या बैंक विवरण किसी के साथ साझा न करें और संदिग्ध लिंक, ईमेल या संदेशों पर क्लिक करने से बचें।
इसके साथ ही ऑनलाइन लेनदेन करते समय केवल सुरक्षित वेबसाइटों या अधिकृत ऐप्स का उपयोग करने और अंजान नंबरों से आने वाली कॉल्स पर सोच-समझकर निर्णय लेने की सलाह दी गई है। पुलिस ने कहा कि जागरूक रहकर ही साइबर अपराधों से बचा जा सकता है।