बताया जा रहा है कि शनिवार की शाम वह उसी थाना क्षेत्र में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने गई थी। कार्यक्रम के दौरान ही तीन युवकों ने उसे बहला-फुसलाकर दूसरी जगह चलने के लिए कहा। आरोप है कि वहां ले जाकर तीनों ने उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया। पीड़िता द्वारा विरोध करने और शोर मचाने पर उसके साथ मारपीट भी की गई। घटना के बाद वह किसी तरह वहां से निकलकर अपने परिचितों तक पहुंची और पूरी जानकारी दी।
रविवार की सुबह पीड़िता और नाच पार्टी के संचालक की ओर से थाने में शिकायत दी गई। शिकायत मिलते ही पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए संभावित ठिकानों पर दबिश दी और तीनों आरोपितों को हिरासत में ले लिया। बताया जा रहा है कि तीनों करनामेपुर थाना क्षेत्र के अलग-अलग गांवों के निवासी हैं।
पुलिस ने पीड़िता को मेडिकल जांच के लिए भेजा है। साथ ही न्यायालय में बयान दर्ज कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। थानाध्यक्ष के अनुसार नर्तकी की लिखित शिकायत के आधार पर कार्रवाई की गई है। फिलहाल आरोपितों से पूछताछ की जा रही है और मेडिकल रिपोर्ट व बयान के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अभियोजन कहानी के अनुसार वादी मुकदमा जितेंद्र यादव निवासी दौलतपुर थाना मेंहनगर के पिता हरिलाल यादव को रानी की सराय थाने की पुलिस ने 29 मार्च 2003 को एक बैटरी चोरी के मुकदमे में हिरासत में लिया था। उसी रात हरिलाल के बारे में जानकारी होने पर जितेंद्र यादव अपने रिश्तेदार रामवचन यादव के साथ 29 मार्च को 2003 को थाने पर पहुंचा था।
जितेंद्र यादव के सामने ही पूछताछ के दौरान थानाध्यक्ष जे के सिंह के ललकारने पर दरोगा नरेंद्र बहादुर सिंह ने हरिलाल यादव को गोली मार दी।घायल हरिलाल यादव को जिला अस्पताल ले जाया गया जहां हरिलाल यादव की मृत्यु हो गई।घटना के समय जितेंद्र यादव तथा रामवचन यादव को हवालात में बंद कर दिया गया।घटना के दूसरे दिन 30 मार्च को कोतवाली में जितेंद्र की तहरीर पर यह मुकदमा दर्ज किया गया।उधर घटना के बाद इसी मामले में रानी की सराय थाने में हत्या का मुकदमा दरोगा नरेंद्र बहादुर सिंह के विरुद्ध पहले ही दर्ज कर लिया गया था।जिसके कारण शहर कोतवाली में दर्ज मुकदमे को रानी की सराय थाने में दर्ज मुकदमे में शामिल कर लिया गया।बाद में शासन ने सितंबर 2003 में इस मामले की जांच सी बी सी आई डी को सौंप दी।
सी बी सी आई डी ने फरवरी 2005 में चार्जशीट न्यायालय में प्रेषित किया।दौरान मुकदमा आरोपी दरोगा नरेंद्र बहादुर सिंह की मृत्यु हो गई। अभियोजन पक्ष की तरफ से जिला शासकीय अधिवक्ता प्रियदर्शी पियूष त्रिपाठी तथा सहायक शासकीय अधिवक्ता दीपक कुमार मिश्रा ने कुल सात गवाहों को न्यायालय में परीक्षित कराया।
दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने आरोपी तत्कालीन थानाध्यक्ष जे के सिंह को आजीवन कारावास तथा एक लाख पांच हजार रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
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