इसका उद्घाटन करने के लिए सपा मुखिया अखिलेश यादव का आज जनपद आगमन हो रहा है। उद्घाटन व गृह प्रवेश के बाद वहीं आवास परिसर में ही अखिलेश की जनसभा के लिए जर्मन हैंगर टेंट लगाया गया है। कार्यक्रम के लिए आवास परिसर को फूलों से आकर्षक ढंग से सजाया गया है। आवास परिसर और आजमगढ़-फैजाबाद मार्ग को अखिलेश यादव के होर्डिंग-बैनर से पाट दिया गया है। कार्यक्रम को भव्य बनाने के लिए सपाइयों ने पूरी ताकत झोंक दी है। अखिलेश यादव के चचेरे भाई और सांसद धर्मेंद्र यादव ने खुद मोर्चा संभाल रखा है। इसके अलावा सभी दसों विधानसभा के विधायकों को भी कार्यक्रम को बेहतर ढंग से संपन्न कराने के लिए जिम्मेदारी दी गई है।
सपा मुखिया अखिलेश यादव पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से कार के जरिये यहां पहुंचेंगे। वह आवासीय भवन के साथ सपा कार्यालय का उद्घाटन करेंगे। जनसभा को भी संबोधित करेंगे। कार्यक्रम की सारी तैयारियां पूरी हो चुकी है।
]]>लखनऊ। गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के शुभारंभ के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी और अध्यक्ष अखिलेश यादव पर बड़ा हमला बोला। सपा की पिछली सरकार के संबंध डी-कंपनी और दाउद इब्राहिम से जोड़ दिया। इस पर अखिलेश यादव ने भी पलटवार किया है। अखिलेश यादव ने गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे को सबसे महंगा हाईवे करार देते हुए दावा किया कि यह एक्सप्रेसवे नहीं बल्कि चार-लेन वाला राजमार्ग है। अखिलेश यादव ने लखनऊ में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि जो लोग दूसरों के बनाए राजमार्ग पर उंगली उठाते हैं, वे अपनी सरकार बनने के बाद तरह-तरह के बयान देते हैं। भ्रष्टाचार पर कितनी बातें की गईं। आज सबसे महंगा राजमार्ग बना है। अखिलेश ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री को एक्सप्रेसवे और राजमार्ग का अंतर ही नहीं पता है।
अखिलेश ने गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे की लागत पर उठाए सवाल
अखिलेश ने गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण की लागत पर सवाल उठाते हुए कहा कि कल तक हम अखबारों में खोजते थे कि कितने हजार करोड़ रुपये में राजमार्ग बना है। लेकिन, मैं धन्यवाद देना चाहता हूं कि आज सभी अखबारों ने बताया है कि राजमार्ग सात हजार करोड़ रुपये में बना है और इसे कब बनना चाहिए था? अगर किसानों का मुआवजा दो हजार करोड़ रुपये है, तो पांच हजार करोड़ रुपये (बचे हुए) हैं। अगर हम पांच हजार करोड़ रुपये को 91 किलोमीटर सड़क (लंबाई) से विभाजित करते हैं, तो इसकी लागत 50 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर से अधिक होगी, और वह भी चार-लेन।
उन्होंने कहा कि यह 4-लेन राजमार्ग है, एक्सप्रेसवे नहीं। अखिलेश ने कहा कि हमारे मुख्यमंत्री को 4-लेन राजमार्ग और एक्सप्रेसवे के बीच का अंतर नहीं पता है। यह सड़क भारतीय सड़क कांग्रेस के मानकों के अनुसार नहीं बनाई गई है। और जिसने भी मानकों के साथ खिलवाड़ किया है, क्या यह सरकार ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कभी कार्रवाई करेगी।
डी कंपनी पर अखिलेश ने दिया जबाब
डी कंपनी पर एक सवाल के जवाब में सपा प्रमुख ने कहा कि डी कंपनी क्या है, यह बताइए। आप किस डी कंपनी का जिक्र कर रहे हैं? मैं आपको बता रहा हूं कि डी कंपनी क्या है, यह एक विकास कंपनी है। उन्होंने कहा कि पूर्वांचल एक्सप्रेसवे किसी नेता ने नहीं मांगा था। जब आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे बना था, उस समय नेताजी (मुलायम सिंह यादव) की बदौलत, जिन्हें आजमगढ़ ने (अपने लोकसभा सांसद के रूप में) चुना था, मैंने इसकी घोषणा की थी, शिलान्यास किया था और भूमि अधिग्रहण किया था। अखिलेश ने यह भी कहा कि यदि सपा सत्ता में आती है, तो हम आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे की तुलना में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर बेहतर काम करेंगे, ताकि यह बेहतर दिखे।
क्या बोले थे सीएम योगी
गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे का शुभारंभ करते समय सीएम योगी ने अखिलेश की पिछली सराकर पर निशाना साधते हुए कहा कि 2017 से पहले सड़कों का हाल ऐसा था कि गड्ढे में सड़क थी या सड़क में गड्डा, पता ही नहीं चलता था। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का शिलान्यास तो हो गया था, लेकिन जमीन तक नहीं खरीदी गई थी। 15,200 करोड़ रुपए में 110 मीटर चौड़ा एक्सप्रेसवे बनाना चाहते थे, हमने उसे 120 मीटर चौड़ा करके 11,800 करोड़ रुपये में बनवाया। बचे हुए पैसों की डकैती किसकी होती, जनता समझती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारें विकास की बजाय डी-कंपनी और दाऊद गिरोह के साथ साझेदारी करती थीं, सुरक्षा में सेंध लगाती थीं और आजमगढ़ को आतंक का गढ़ बना दिया था। 2007-08 में शिबली नेशनल कॉलेज में अजीत राय की हत्या वंदे मातरम गाने की वकालत के लिए हुई थी, लेकिन अब ऐसा दुस्साहस कोई नहीं कर सकता। आज कोई प्रदेश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश करता है तो उसके लिए यमराज का टिकट पहले से कट जाता है।
]]>आजमगढ़। भारतीय जनता पार्टी जिलाध्यक्ष आजमगढ़ सदर ध्रुव सिंह ने जिला कार्यालय पर आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि भारतीय जनता पार्टी जहां एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की सरकार, अपराधमुक्त उत्तर प्रदेश बनने का काम कर रही है। वहीं सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव गंभीरपुर थाना के मंगरावां क्षेत्र के एक अपराधी गैंगस्टर के घर वोट बैंक के लिए दावतें वलीमा में शामिल होते हैं। आजमगढ़ की जनता ने अखिलेश यादव और उनके भाई को आजमगढ़ से सांसद बनाकर सम्मान दिया था लेकिन वह आजमगढ़ के आम जनता के दुःख सुख में कभी नहीं आते।
ये लोग दिखावे के लिए संविधान हाथ में लेकर घूमते हैं लेकिन किसी दलित के घर किसी गरीब के घर किसी साधारण कार्यकर्ता के घर कभी नहीं जाते।अभी हाल ही में एक दलित के साथ दुखद घटना घटी है लेकिन अखिलेश यादव को उस दलित परिवार से मिलने की फुर्सत नहीं है। अखिलेश यादव सिर्फ, जो उनके फाइनेंसर है, माफिया है, गुन्डे है ,जमीन कब्जा करने वाले लोग हैं जिनके उपर सरकारी विभागों के कई मुकदमे दर्ज हैं,उनके घर दावत उड़ानें जाते हैं।वह किसी भी गरीब के आंसू पोंछने कभी भी आजमगढ़ नहीं आते हैं।
हमारी सरकार ने आजमगढ़ में हमारे सांसद विधायक ना होने के बाद भी आजमगढ़ के विकास में कोई कोर कसर नहीं छोड़ा है। आजमगढ़ में विश्वविद्यालय, अटल आवासीय विद्यालय, पूर्वांचल एक्सप्रेस वे, एयर पोर्ट सभी सड़कें फोर लेन ,सिक्स लेन से जोड़ी जा रही है, संगीत विद्यालय जैसी तमाम योजनाओं से आजमगढ़ का विकास करने का काम कर रहीं हैं। अपराधियों का आजमगढ़ से धीरे-धीरे खात्मा हो रहा है। लेकिन सपा को आजमगढ़ ने दस विधायक और दो सांसद दिया जिसके बदले में सपा मुखिया अखिलेश यादव आजमगढ़ में गुन्डे,अपराधियों ,माफियाओं को बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं।
इस अवसर पर प्रदेश कार्यसमिति सदस्य अखिलेश मिश्रा गुड्डू और पूर्व विधायक वंदना सिंह मोजूद रहे।
अखिलेश यादव ने कहा कि पहले 13 नवंबर को चुनाव की तारीख तय थी। इस दौरान त्योहारों पर लोग घर आए हुए थे। छुट्टियों पर आये लोगों ने भाजपा के खिलाफ वोट करने का मन बना लिया था। कहा कि बीजेपी को हार की भनक पहले ही लग गई थी। इसलिए बीजेपी ने 13 तारीख से चुनाव टाल कर 20 नवंबर को करवा दिया।
अखिलेश ने कहा कि नौकरी और रोजगार को लेकर युवाओं को धरने पर बैठना पड़ रहा है। यूपी सरकार को छात्रों की एकजुटता को देखते हुए पीछे हटना पड़ा। उन्होंने कहा कि वन नेशन वन इलेक्शन का नारा देने वाले अब परीक्षा तक नहीं करा पा रहे हैं। जबकि इन्होंने रिकॉर्ड परीक्षा करवाने का वादा किया था। अखिलेश ने कहा कि नौकरी ना मिले इसलिए इस मामले को उलझाने के लिए यह लोग हाईकोर्ट जाते हैं।झांसी में बच्चों की मौत पर भी अखिलेश ने दुख प्रकट किया। अखिलेश ने कहा कि आज के समय में इस तरह की घटनाएं दुखद हैं। अखिलेश ने कहा कि जब गोरखपुर में ऑक्सीजन की कमी से बच्चे मरे थे सरकार को तभी सावधान हो जाना चाहिए था। कहा कि सरकार की नजरअंदाजी की वजह से 10 बच्चों की जान चली गई।
सीएम योगी पर तंज करते हुए अखिलेश ने कहा कि हमारे मुख्यमंत्री पहले से डरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि इलेक्शन करीब आने के बाद से सीएम योगी ढीले दिखाई दे रहे हैं। बंटोगे तो कटोगे के नारे पर अखिलेश ने कहा कि बंटोगे तो कटोगे की भाषा अंग्रेजों की थी। अंग्रेजों की आदत थी बांटकर राज करने की। अब यह काम हमारे सीएम योगी भी कर रहे हैं। अखिलेश ने कहा कि उन्हें तो सीएम के अच्छे विचारों का इंतजार है। कहा कि हमारे यहां संत चुप रहते हैं लेकिन यहां सब उल्टा पुल्टा है। हमारे मुख्यमंत्री जी बोल रहे हैं क्योंकि इंसान वस्त्र से नहीं विचार से साधु होता है।
]]>मालूम हो कि अंबेडकरनगर जनपद का सृजन करीब तीन दशक पहले अयोध्या (तत्कालीन फैजाबाद ) जनपद को ही विभक्त कर हुआ था। ऐसे में अयोध्या से खासी नजदीकी अभी भी यहां के लोगों को रहती है। इसे भांपते हुए ही बीजेपी और सरकार की तरफ से लगातार यह कहा जा रहा है कि अयोध्या की तर्ज पर यहां का भी विकास होगा।
हालांकि यह वायदे तो लोकसभा चुनाव के पहले भी किए गए थे। लेकिन, उसका कोई असर यहां हुआ नहीं। सवा एक लाख से अधिक मतों के अंतर से बीजेपी प्रत्याशी को करारी हार का सामना करना पड़ा था। अब उपचुनाव में फिर से कटेहरी और पूरे जिले के विकास का मुद्दा उठा है। इस बार यहां ज्यादा विकास कराने की बात स्वयं सीएम योगी आदित्यनाथ कर रहे हैं। वह बार-बार कटेहरी पहुंच रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बीजेपी यह सीट जीतकर अयोध्या की हार के बाद बड़ा संदेश देना चाहती है। वह बताना चाहती है कि अयोध्या और आसपास के जिलों में भगवा राजनीति का दबदबा अभी कायम है। कटेहरी की जीत का एक असर यह भी होगा कि लोकसभा चुनाव में पूर्वांचल में सामने आई सपा की धमक के असर को कम किया जा सकेगा। इसका फायदा आगे होने वाले मिल्कीपुर विधानसभा के उपचुनाव में उठाया जा सकेगा।
]]>छात्रों की मांग थी कि लोक सेवा आयोग की परीक्षा केवल एक बार आयोजित की जाए, ताकि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और आसान बनाया जा सके।प्रदर्शनकारी छात्र सरकार और आयोग की नीतियों का विरोध करते हुए सड़कों पर बैठ गए, जिससे यातायात बाधित हुआ।
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए उन्हें बसों में भरकर इको गार्डन की ओर भेज दिया, जहां उन्हें कुछ समय के लिए हिरासत में रखा गया। छात्रों का कहना है वे परीक्षा में पारदर्शिता और निष्पक्षता के लिए लगातार आवाज उठाते रहेंगे।
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उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट करते हुए लिखा कि, सुना है, किसी बड़े अधिकारी को स्थाई पद देने और उसका कार्यकाल दो वर्ष तक बढ़ाने की व्यवस्था बनाई जा रही है। अब सवाल यह है कि व्यवस्था बनाने वाले खुद दो वर्ष रहेंगे या नहीं ? इसके बाद उन्होंने तंज कसते हुए लिखा कि कहीं ये दिल्ली के हाथ से लगाम अपने हाथ में लेने की कोशिश तो नहीं है? दिल्ली बनाम लखनऊ 2.0। प्रदेश में अब डीजीपी की नियुक्ति राज्य सरकार के स्तर से ही हो सकेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को कैबिनेट ने इस बाबत पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश (उत्तर प्रदेश के पुलिस बल प्रमुख) चयन एवं नियुक्ति नियमावली 2024 को मंजूरी प्रदान कर दी। इसमें हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में मनोनयन समिति गठित करने का प्राविधान किया गया है। वहीं डीजीपी का न्यूनतम कार्यकाल दो वर्ष निर्धारित किया गया है।मनोनयन समिति में मुख्य सचिव, संघ लोक सेवा आयोग द्वारा नामित अधिकारी, उप्र लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या नामित अधिकारी, अपर मुख्य सचिव गृह, बतौर डीजीपी कार्य कर चुके एक सेवानिवृत्त डीजीपी सदस्य होंगे। इस नियमावली का उद्देश्य डीजीपी के पद पर उपयुक्त व्यक्ति की नियुक्ति के चयन के लिए स्वतंत्र एवं पारदर्शी तंत्र स्थापित करना है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उसका चयन राजनीतिक या कार्यकारी हस्तक्षेप से मुक्त है।
]]>उन्होंने एक्स पर कहा कि टालेंगे तो और भी बुरा हारेंगे! पहले मिल्कीपुर का उपचुनाव टाला, अब बाकी सीटों के उपचुनाव की तारीख, भाजपा इतनी कमजोर कभी न थी।
दरअसल बात ये है कि उत्तर प्रदेश में ‘महा-बेरोज़गारी’ की वजह से जो लोग पूरे देश में काम-रोजगार के लिए जाते हैं, वो दिवाली और छठ की छुट्टी लेकर यूपी आए हुए हैं और उपचुनाव में भाजपा को हराने के लिए वोट डालने वाले थे। जैसे ही भाजपा को इसकी भनक लगी उसने उपचुनावों को आगे खिसका दिया, जिससे लोगों की छुट्टी खत्म हो जाए और वो बिना वोट डाले ही वापस चले जाएं।
यूपी में नौ सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए मतदान की तारीख एक सप्ताह के लिए बढ़ा दी गई है। अब 13 की जगह 20 नवंबर को मतदान होगा। इस संबंध में चुनाव आयोग ने आदेश जारी कर दिया गया है। चुनाव आयोग ने जारी किए गए आदेश में कहा है कि 15 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा का स्नान पर्व होने की वजह से भाजपा, कांग्रेस सहित क्षेत्रीय दलों ने मतदान की तारीख बदलने की मांग की थी जिस पर यह निर्णय लिया गया है। यूपी में 10 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने थे जिनमें से एक सीट मिल्कीपुर का मामला कोर्ट में होने के कारण इस सीट पर चुनाव की तारीखों का एलान नहीं किया गया है। शेष नौ सीटों पर अब मतदान 20 नवंबर को होगा।
]]>मध्य प्रदेश, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और महाराष्ट्र की तरह ही इंडिया गठबंधन के दलों ने झारखंड में भी सपा को कोई सीट नहीं दी। हरियाणा के चुनाव में तो सपा ने अपने प्रत्याशी नहीं उतारे, लेकिन महाराष्ट्र के बाद अब झारखंड में भी अपने प्रत्याशी दे दिए हैं। झारखंड में कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा से सीटों के बंटवारे पर सपा अनुसूचित जनजाति प्रकोष्ठ के अध्यक्ष व्यासजी गोंड वार्ता कर रहे थे। वे बताते हैं कि ऐन वक्त पर उन्हें सीटें देने से इन्कार किया गया। झामुमो ने पहले कहा कि कांग्रेस के कोटे में से सपा सीट ले। कांग्रेस से बात की तो उसने भी कह दिया कि उसे अपने कोटे से राजद को सीटें देनी पड़ रही हैं। इस टालमटोल के चलते पहले सपा को आश्वासन मिले, लेकिन अंतत: उसके हाथ कुछ नहीं आया।
इस पर सपा ने पहले चरण की 11 सीटों गढ़वा, बरही, मनिका, हुसैनाबाद, भनवाथपुर, छतरपुर, विश्रामपुर, जमशेदपुर, बरकट्ठा, बड़कागांव और कांके में प्रत्याशी उतार दिए हैं। इसके अलावा दूसरे चरण की 10 सीटों पाकुड़, महेशपुर, जरमुंडी, राजमहल, बोरयो, सारठ, जमुआ, निरसा, टुंडी और बाघमारा में भी प्रत्याशियों के नामों का एलान कर दिया है। सपा के झारखंड प्रभारी गोंड ने कहा कि राज्य की पांच सीटों पर सपा बहुत ही मजबूती से लड़ रही है। इस बार उसे झारखंड में भी सफलता मिलेगी।
महाराष्ट्र में 10 सीटों पर सपा मैदान में
महाराष्ट्र में अब तक सपा 10 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार चुकी है। ये सीटें हैं- मानखुर्द शिवाजी नगर, भिवंडी पूर्व, मालेगांव मध्य, धुले शहर, भिवंडी पश्चिम, तुलजापुर, परांडा, औरंगाबाद पूर्व, भायखला समेत कुल दस सीटें। वहां सपा गठबंधन के तहत 12 सीटें मांग रही थी। बात न बनने पर अपने प्रत्याशी दे दिए।
सांसद धर्मेंद्र यादव ने मंच से अपने जीजा और भाजपा प्रत्याशी अनुजेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि 2019 में ही जब उन्होंने भाजपा ज्वाइन की थी तभी मैंने पत्र लिखकर उनसे अपने संबंध खत्म कर लिए थे। भाजपा प्रत्याशी को यह सोचना चाहिए कि आज जिनकी गोद में वह बैठे हैं, उन्होंने ही जनता का सबसे ज्यादा शोषण और उनके साथ अत्याचार और अन्याय किया है।
मैनपुरी से सपा सांसद डिंपल यादव ने कहा, “चुनाव के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। मुझे विश्वास है कि करहल विधानसभा सहित हमारा पूरा क्षेत्र समाजवादी पार्टी के साथ खड़ा है। मेरा मानना है कि भाजपा ने केवल अन्याय का शासन राज्य में स्थापित किया है। योगी और मोदी सरकार सभी मोर्चों पर विफल साबित हुई है। इस क्षेत्र का विकास हमारा मुद्दा है और इसी आधार पर हम जनता के बीच जा रहे है। यह रिश्तेदारी नहीं बल्कि पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) विचारधारा और सिद्धांतों को बचाने की लड़ाई है। हमें उम्मीद है कि करहल के साथ-साथ उत्तर प्रदेश में हो रहे सभी नौ सीटों पर उपचुनाव में समाजवादी पार्टी जीत हासिल करेगी।
उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले की करहल विधानसभा सीट से अनुजेश यादव उम्मीदवार बनाए जाने पर सियासत तेज हो चली है।करहल सीट सपा का गढ़ मानी जाती है। अनुजेश यादव मुलायम सिंह की भतीजी और सांसद धर्मेंद्र यादव की बहन संध्या यादव के पति हैं। संध्या उर्फ बेबी यादव 2015 से 2020 तक मैनपुरी की जिला पंचायत अध्यक्ष रहीं, जबकि अनुजेश खुद इसी दौरान फिरोजाबाद से जिला पंचायत सदस्य थे।
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