क्रूर आक्रांता सैयद सालार मसूद गाजी के नाम पर हर वर्ष लगने वाले नेजा मेला की ढाल संभल कोतवाली के सामने गाढ़ी जाती थी। इसके एक सप्ताह बाद अगले मंगलवार को चंदौसी रोड स्थित ग्राम शाहपुर सूरा नगला से मेले की शुरुआत होती थी।
अगले दिन शहर के नगर पालिका मैदान में और बाद में ग्राम बादल गुम्बद में मेले का आयोजन किया जाता था। इस बार पुलिस ने मेला लगाने की इजाजत नहीं दी है।
अपर पुलिस अधीक्षक श्रीशचंद्र का कहना है कि सोमनाथ मंदिर के लुटेरे की याद में लगने वाले मेले को किसी भी दशा में नहीं लगने दिया जाएगा। कहा कि कोई कुरीति सालों से चली आ रही है तो उसे बदलने की जरूरत है। गजनवी के भांजे मसूद गाज़ी ने भारत में क्रूरता की थी। ऐसे लुटेरे-हत्यारे देशद्रोही की याद में मेला लगाने वाले भी देशद्रोही होंगे।
एएसपी ने आयोजन न करने की दी हिदायत
उन्होंने दो टूक कहा है कि मेले का आयोजन किसी भी दशा में नहीं होने दिया जाएगा। धार्मिक नगर नेजा कमेटी की ओर से झंडा बरदार शाहिद अली मसूदी व सचिव कारी कमाल को उस समय मेले का आयोजन किसी भी दशा में न करने की हिदायत दी जब वह इसके लिए पुलिस प्रशासन से अनुमति लेने गए थे।
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