आजमगढ़। जनपद पहुँचे भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने समाजवादी पार्टी और सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव पर तीखे तंज कसे। उन्होंने केदारनाथ मंदिर निर्माण को ‘दिखावा’ बताते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी की राजनीति ‘वोट के देवता’ के इर्द-गिर्द घूमती है। यूजीसी के मुद्दे पर भी उन्होंने अपनी राय रखी और कहा, ‘तेल नहीं, तेल की धार देखिए।’ भाजपा प्रवक्ता के इस बयान के कई सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं।
नगर के बाइपास मार्ग पर एक अस्पताल के उद्घाटन अवसर पर पहुंचे भाजपा प्रदेश प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने मीडिया से बातचीत में समाजवादी पार्टी पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव द्वारा केदारनाथ मंदिर बनाने की बात केवल दिखावटी राजनीति है। त्रिपाठी ने कहा, ‘जो वोट के देवता को ही पूछते हैं, वे भगवान राम को क्या पूछेंगे!‘
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के विकास पर उन्होंने कहा कि यह परियोजना सपा की नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की देन है। उन्होंने कहा कि आज पूर्वांचल तेज़ी से विकास कर रहा है और यह क्षेत्र अब रोजगार और कृषि के नए अवसरों की पहचान बना रहा है।
यूजीसी बिल पर पूछे गए सवाल पर त्रिपाठी ने मुस्कुराते हुए कहा, “थोड़ा इंतजार कीजिए, अभी कई बिल लोकसभा में पेश होने हैं… तेल नहीं, तेल की धार देखिए।” उनके इस बयान के कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं।
रणवीर सेना के कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट पहुंचे और नारेबाजी करते हुए राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में संगठन ने कहा कि जातिगत, धार्मिक, रंग-भेद, नस्लीय, लिंग आधारित एवं दिव्यांगता आधारित भेदभाव किसी भी नागरिक के साथ हो सकता है, इसलिए ऐसा कानून केवल SC, ST और OBC तक सीमित न रहकर देश के हर नागरिक पर समान रूप से लागू होना चाहिए।
संगठन ने संविधान के अनुच्छेद 14 का हवाला देते हुए कहा कि यह सभी नागरिकों को समानता और कानून के समान संरक्षण का अधिकार देता है। इसके बावजूद सवर्ण वर्ग को समानता समिति में शामिल न करना और सामान्य वर्ग को शोषित वर्ग की सूची से बाहर रखना संविधान की मूल भावना का उल्लंघन है।
रणवीर सेना ने यह भी मांग की कि यदि किसी मामले में शिकायत झूठी पाई जाती है तो शिकायतकर्ता के खिलाफ जुर्माना या सजा का स्पष्ट प्रावधान होना चाहिए। संगठन ने जाति के आधार पर कानून निर्माण का विरोध करते हुए सभी नागरिकों के लिए समान कानून लागू करने की अपील की।
इस दौरान संगठन के अध्यक्ष सुधीर कुमार पाठक ने कहा कि राष्ट्रपति को इस मामले में हस्तक्षेप कर न्यायोचित निर्णय लेना चाहिए, ताकि समाज में सभी नागरिकों को समान अधिकार और अवसर मिल सकें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए तो समाज में असमानता और भेदभाव और बढ़ सकता है।