आज़मगढ़। रंगमंच की रौशनी, संवादों की धार और तालियों की गूंज के बीच हुनर रंग महोत्सव के दूसरे दिन भी कला प्रेमियों का उत्साह चरम पर रहा। सामाजिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक चेतना को रंगमंच के ज़रिये जीवंत करने वाले इस महोत्सव में नृत्य, व्यंग्य और सामाजिक यथार्थ से जुड़े नाटकों ने दर्शकों को बाँधे रखा।

रंगमंच एवं ललित कलाओं के क्षेत्र में समर्पित ‘हुनर’ सामाजिक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था द्वारा पिछले 24 वर्षों से लगातार आयोजित हो रहे हुनर रंग महोत्सव के दूसरे दिन का उद्घाटन माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया।

व्यंग्य की तीखी धार: ‘ताजमहल का टेंडर’

द्वितीय सत्र में पहली नाट्य प्रस्तुति ड्रामाटरजी आर्ट एंड कल्चर सोसायटी, दिल्ली द्वारा मंचित ‘ताजमहल का टेंडर’ रही। अजय शुक्ला द्वारा लिखित यह व्यंग्यात्मक नाटक इस कल्पना पर आधारित है कि अगर मुग़ल बादशाह शाहजहाँ आज के दौर में ताजमहल बनवाने निकलें, तो सरकारी दफ्तरों, टेंडरों और लालफीताशाही के बीच उनका सपना कैसे उलझ कर रह जाएगा।

नाटक में दिखाया गया कि कैसे प्रेम की याद में बनना वाला स्मारक, काग़ज़ी कार्रवाई, भ्रष्टाचार और सरकारी देरी की भेंट चढ़ जाता है। चुटीले संवादों और तीखे हास्य के ज़रिये यह प्रस्तुति दर्शकों को हँसाती भी है और मौजूदा व्यवस्था पर सोचने को भी मजबूर करती है।

संघर्ष से रोमांस तक: ‘जंगली भालू’

दूसरी नाट्य प्रस्तुति विकेंड थिएटर एंड फ़िल्म्स, दिल्ली द्वारा प्रस्तुत ‘जंगली भालू’ रही। नाटक की कहानी गुलगुल रानी, एक युवा विधवा, के इर्द-गिर्द घूमती है, जो पति की याद में खुद को दुनिया से काट चुकी है।

कहानी तब मोड़ लेती है जब भोला सिंह, एक गुस्सैल और दबंग व्यक्ति, उधारी के पैसे मांगने उसके घर पहुँचता है। तंज़, टकराव और शब्दों की जंग के बीच मामला इतना बढ़ जाता है कि पिस्तौल से ड्यूएल का चैलेंज तक आ जाता है। लेकिन यहीं से कहानी नया रंग लेती है — गुस्सा धीरे-धीरे आकर्षण में बदलता है और अंत में प्रेम का अप्रत्याशित इज़हार दर्शकों को चौंका देता है।

कलाकारों का यथार्थ: ‘काल कोठरी’

तीसरी प्रस्तुति कला संगम, गिरिडीह (झारखंड) द्वारा मंचित स्वदेश दीपक लिखित नाटक ‘काल कोठरी’ रही। यह नाटक रंगमंच से जुड़े कलाकारों के जीवन संघर्ष को बेहद संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करता है, जिसमें पारिवारिक दबाव, आर्थिक तंगी और व्यवस्था की उपेक्षा के बीच कलाकार अपनी कला को जीवित रखने की जद्दोजहद करता दिखाई देता है।

नृत्य प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में अष्टभुजा मिश्र (वाराणसी) एवं अशोक शर्मा (अलवर, राजस्थान) शामिल रहे।
इस अवसर पर हेमंत श्रीवास्तव सहित संस्थान के पदाधिकारी गौरव, मौर्या, सपना बनर्जी, प्रमोद कुमार सिंह, गजराज प्रसाद, कमलेश सोनकर, राज पासवान, रवि गोंड समेत बड़ी संख्या में रंगमंच प्रेमी मौजूद रहे।