आजमगढ़। जिलाधिकारी  रविंद्र कुमार ने आज कलेक्ट्रेट परिसर से फसल अवशेष प्रबंधन के संबंध में जागरूकता हेतु तीन प्रचार वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। जिलाधिकारी ने बताया कि ये प्रचार वाहन रोस्टर के अनुसार जनपद के सभी विकास खंडों में पराली जलाने की समस्या से प्रभावित क्षेत्रों में जाकर किसानों को फसल अवशेष जलाने से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक करेंगी। उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि जिन विकास खंडों में पिछले तीन वर्षों में पराली जलने की घटनाएँ हुई हैं, वहां विशेष प्रचार अभियान चलाया जाएगा।

जिलाधिकारी ने प्रचार वाहनों के माध्यम से जनपद के सम्मानित कृषक बंधुओं से अपील की कि कटाई के समय कम्बाइन हार्वेस्टर से एस0एम0एस0, मल्चर, सुपर सीडर और अन्य कृषि यंत्रों का अनिवार्य रूप से प्रयोग करें, अन्यथा वाहन सीज कर दिए जाएंगे।

उप कृषि निदेशक  आशीष कुमार ने बताया कि उत्तर प्रदेश शासन एवं राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा दिए गए निर्देशों के क्रम में, कृषि विभाग आजमगढ़ जनपद में धान की पराली, गन्ने की पत्ती और कूड़ा अपशिष्ट को जलाने से रोकने और उसका उचित प्रबंधन करते हुए इसे कम्पोस्ट खाद में परिवर्तित कर अगली फसल में उपयोग करने हेतु कृषकों को विभिन्न माध्यमों से जागरूक कर रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि खेत में फसल अवशेष जलाने से पर्यावरण को नुकसान के साथ-साथ मृदा की संरचना और खेत के मित्र कीटों की मृत्यु होती है, जिससे फसल की उत्पादकता और मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

उप कृषि निदेशक ने कृषकों से अपील की कि वे वेस्ट डी-कम्पोजर का उपयोग कर फसल अवशेष को कम्पोस्ट खाद के रूप में परिवर्तित करें और फसल अवशेष जलाने पर लगने वाले अर्थदंड से बचें। उन्होंने स्पष्ट किया कि फसल अवशेष जलाना दंडनीय अपराध है और इसके लिए 2,500 से 15,000 रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।

इस अवसर पर जिला कृषि अधिकारी, भूमि संरक्षण अधिकारी (ऊ0सु0) और जिला कृषि रक्षा अधिकारी जनपद-आजमगढ़ भी उपस्थित रहे।