
आजमगढ़। जिले के तरवा थाने में दलित युवक शनी कुमार के द्वारा थाने के शौचालय में की गई आत्महत्या के मामले में पुलिस अधीक्षक ने प्रथम दृष्टिया दोषी मानते हुए थानाध्यक्ष, सब इंस्पेक्टर और एक सिपाही को निलंबित कर दिया है।
बताते चले कि तरवा थाने के उमरी गांव निवासी शनि कुमार के खिलाफ छेड़खानी करने के आरोप में एफआईआर दर्ज किया गया था। पुलिस उसे गिरफ्तार कर थाने में लाई थी। आरोपी ने वहां मौजूद पुलिस कर्मी से शौच करने के लिए कहा। पुलिसकर्मी ने उसे शौचलय में जाने की इजाजत दी। वह शौच के लिए अंदर गया लेकिन बाहर नहीं आया। काफी देर तक वह बाहर नहीं आया तो पुलिस ने दरवाजा खटखटाया लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। काफी मशक्कत के बाद पुलिस ने शौचालय का दरवाजा खोला तो अंदर शनि ने फांसी लगाकर जान दे दी थी।
दलित युवक की हत्या से आक्रोशित ग्रामीणों ने आज पुलिस के वाहनों में तोड़फोड़ की मौके पर पहुंचे आला अधिकारियों ने किसी तरह से लोगों को समझ कर मामले को शांत कराया।
एसएसपी हेमराज मीणा ने बताया कि छेड़खानी के आरोप में युवक को 30 मार्च को थाने पर लाया गया था । उसे सोमवार को जेल भेजा जाना था। सोमवार की सुबह करीब 6:00 नित्यक्रिया के लिए शौचालय में गया और वहीं पर पैजामें के नाड़े से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली । इस मामले में शव का पोस्टमार्टम कराया गया। पीएम तीन डॉक्टरों के टीम ने किया है साथ में वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई गई है। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आ गई है । जिसमें शरीर पर कोई चोट के निशान नहीं पाया गया है। मौत फांसी लगाने से हुई है।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि चूंकि घटना थाने के अंदर हुई है, इसलिए इस मामले में प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए थानाध्यक्ष तरवा अखिलेश पटेल, सब इंस्पेक्टर भीम सिंह और एक सिपाही प्रमोद यादव को निलंबित कर दिया गया है। घटना की मजेस्ट्रीयल जांच के आदेश दे दिए गए है। मौके पर शांति व्यवस्था कायम है।