रिपोर्ट: शीतला त्रिपाठी

आज़मगढ़। जिले के महाराजगंज थाना क्षेत्र के शिवपुर गांव निवासी नंदलाल राजभर को रविवार को हार्ट अटैक आने पर परिजन शहर के  कोलघाट स्थित विनायक अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने उनकी हालत गंभीर बताते हुए पेसमेकर लगाने की सलाह दी।

परिजनों का आरोप है कि जब उन्होंने मरीज को दूसरे अस्पताल ले जाने की बात कही तो अस्पताल स्टाफ ने डिस्चार्ज में डेढ़ घंटे की देरी की और एंबुलेंस में बैठाने के दौरान पेसमेकर खींचने की कोशिश की, जिससे मरीज की तबीयत और बिगड़ गई। विरोध करने पर अस्पताल कर्मियों ने तीमारदारों से मारपीट की।

मरीज के पुत्र विनय राजभर ने बताया कि डॉक्टरों ने पेसमेकर लगाने के लिए ₹2.20 लाख की मांग की थी, जबकि पहले ही ₹22 हजार जमा किया जा चुका था जिसकी रसीद उनके पास है। उन्होंने कहा कि भर्ती के बाद से अब तक ₹50 हजार से अधिक रुपये चिकित्सक ले चुके हैं।

विनय ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने इतने पैसों का इंतजाम न होने की बात कहकर किसी दूसरे अस्पताल ले जाने की इच्छा जताई, तब स्टाफ ने अस्पताल छोड़ने में बाधा डाली और मारपीट तक की नौबत आ गई। परिजनों ने प्रशासन से मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की है।


वहीं विनायक अस्पताल के चिकित्सक डॉ. विनय चौहान ने बताया कि मरीज गंभीर हालत में लाया गया था। उसे अस्थायी पेसमेकर लगाकर राहत दी गई थी। परिजनों ने स्वयं मरीज को दूसरे अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया और एंबुलेंस में पेसमेकर बदलते समय मरीज को दोबारा अटैक आया। उन्होंने कहा कि मारपीट का आरोप निराधार है, अस्पताल स्टाफ ने किसी से हाथापाई नहीं की।