रिपोर्ट: आशीष निषाद

अतरौलिया, आज़मगढ़।  प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीबों को छत दिलाने की मंशा को उस समय झटका लगा, जब विकासखंड अतरौलिया की ग्राम पंचायत सेल्हरापट्टी में आवास के नाम पर धन उगाही का मामला उजागर हुआ। इसमें ग्राम विकास अधिकारी राजेश यादव और ग्राम प्रधान प्रतिनिधि सन्नी पर पात्र लाभार्थियों से सत्यापन के नाम पर 10 से 20 हजार रुपये की अवैध वसूली का आरोप है।

इस भ्रष्टाचार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें एक महिला आवास के बदले रुपये देती दिख रही है। पीड़ित महिला केवली, जो चाय-समोसे की दुकान चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करती हैं, ने बताया कि उनसे ₹15,000 की मांग की गई थी। जब उन्होंने असमर्थता जताई, तो अधिकारी ने सख्त लहजे में कहा,’पैसा दोगी तभी आवास मिलेगा, नहीं तो नाम काट दिया जाएगा।‘  (वायरल वीडियो की पुष्टि न्यूज 8पीएम नहीं करता)

इसी गांव के एक अन्य निवासी मंटू ने आरोप लगाया कि उन्होंने पहले ₹20,000 ग्राम प्रधान प्रतिनिधि को दिए, फिर दोबारा ₹20,000 मांगे गए। कुल ₹40,000 देने के बाद ही उनका आवास स्वीकृत हुआ। उन्होंने कहा कि यह पूरा खेल सत्यापन प्रक्रिया के नाम पर किया गया।

भाजपा के जिला मंत्री नीरज तिवारी ने नाराजगी जताते हुए कहा, मेरे ही ग्राम सभा की एक महिला से जबरन पैसा वसूला गया, जिसका वीडियो उपलब्ध है। मैंने इस पूरे मामले को खंड विकास अधिकारी के संज्ञान में लाया है और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।

उन्होंने बताया कि इसी अधिकारी ने अशोक मिश्रा नामक व्यक्ति से भी पैसे की मांग की थी, लेकिन उनके हस्तक्षेप के चलते वह राशि नहीं दी गई।

स्थानीय जनता सवाल कर रही है कि जब केंद्र और राज्य सरकारें अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने का दावा कर रही हैं, तो फिर ज़मीनी स्तर पर यह भ्रष्टाचार कब रुकेगा? ग्रामीणों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि गरीबों का हक सुरक्षित रह सके।

खंड विकास अधिकारी अतरौलिया सागर सिंह ने बताया कि शिकायती पत्र और वीडियो प्राप्त हुआ है । ग्राम विकास अधिकारी राजेश यादव से इस संदर्भ में स्पष्टीकरण मांगा गया है। जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।