आजमगढ़। उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम की धारा 52 के तहत प्रकाशन के बाद भी चकबंदी अधिकारियों द्वारा कब्जा परिवर्तन में लापरवाही बरते जाने पर जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि यदि प्रकाशन के उपरांत भी कब्जा परिवर्तन नहीं कराया गया तो संबंधित चकबंदी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
जिलाधिकारी ने बन्दोबस्त अधिकारी चकबन्दी लालता प्रसाद अहिरवार एवं अतिरिक्त बन्दोबस्त अधिकारी रामप्रवेश को विशेष रूप से निर्देशित किया है कि वे धारा 52 के अंतर्गत प्रस्ताव प्रस्तुत करते समय यह प्रमाणपत्र अवश्य संलग्न करें कि संबंधित ग्राम में कोई भी चक परिवर्तन शेष नहीं है। साथ ही यह भी स्पष्ट करें कि ग्राम में चकबंदी से जुड़ी कोई वैध शिकायत लंबित नहीं है और 1359फ के भू-अभिलेखों में दर्ज ग्रामसभा की भूमि का मिलान कर लिया गया है।
जिलाधिकारी ने कहा कि अक्सर यह देखा गया है कि धारा 52 के प्रकाशन के बावजूद कब्जा परिवर्तन नहीं किया जाता, जिससे ग्रामीणों की ओर से लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। यह स्थिति शासन की मंशा के विरुद्ध है और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। ऐसे में अब सख्ती बरती जाएगी और लापरवाह अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि ग्रामसभा की भूमि को सुरक्षित रखते हुए किसी भी प्रकार की क्षति से बचाना जरूरी है और इस दिशा में चकबंदी अधिकारियों की जिम्मेदारी सर्वोपरि है। विभागीय कार्यों में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को पूरी तत्परता से कार्य करना होगा।
