रिपोर्ट: आशीष निषाद

अतरौलिया, आज़मगढ़। स्थानीय नगर पंचायत सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बुधवार को श्रद्धा और उत्साह के साथ गोवर्धन पूजा का पर्व बड़े ही भक्ति भाव से मनाया गया। सुबह से ही श्रद्धालुओं में अपार आस्था देखने को मिली। लोगों ने अपने घरों, मंदिरों और आँगनों में गोबर से गोवर्धन पर्वत का प्रतीक रूप बनाकर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना की।
नगर के विभिन्न मोहल्लों व गांवों में महिलाओं ने मंगल गीत गाते हुए गोवर्धन की परिक्रमा की और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।

बच्चों और युवाओं ने दीपक, फूल, रंगोली और तोरण से घरों को सजाया। बाजारों में भी दिनभर रौनक रही मिठाई, दूध, दही, माखन और प्रसाद की दुकानों पर भीड़ उमड़ी रही। नगर के प्रमुख मंदिरों जैसे कैलेश्वर धाम, दुर्गा मंदिर और हनुमानगढ़ी परिसर में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया।

श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण की आरती उतारकर भोग लगाया। कई स्थानों पर प्रसाद वितरण के कार्यक्रम भी हुए पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र के अहंकार को दूर करने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठ उंगली पर उठाकर वृंदावनवासियों को मूसलाधार वर्षा से बचाया था। इसी उपलक्ष्य में हर वर्ष दीपावली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा की जाती है। इस दिन गौ-सेवा, गोवर्धन पर्वत की पूजा, और अन्नकूट भोग का विशेष महत्व होता है। यह पर्व प्रकृति, गोवंश और अन्न के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का संदेश देता है।


त्योहारों की इस श्रृंखला में अतरौलिया क्षेत्र भक्ति, उल्लास और भाईचारे की भावना से सराबोर रहा। लोगों ने कहा कि गोवर्धन पूजा और भैया दूज जैसे पर्व भारतीय संस्कृति में प्रेम, प्रकृति और पारिवारिक एकता के प्रतीक हैं।