आजमगढ़। जिले के मुबारकपुर स्थित एक पुराने अनुदानित मदरसे पर बड़ी कार्रवाई हुई है। मदरसा शिक्षा परिषद ने गंभीर अनियमितताओं और वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों के बाद 78 साल पुराने मदरसे की मान्यता निलंबित कर दी है। यह कार्रवाई मदरसा प्रबंधन और एक शिक्षक पर लगे आरोपों की जांच के बाद की गई है।
मिली जानकारी के अनुसार, मदरसा शिक्षा परिषद ने शुक्रवार को आजमगढ़ के मुबारकपुर स्थित दारुल उलूम अहले सुन्नत मदरसा अशरफिया मिस्बाहुल उलूम की मान्यता निलंबित कर दी। यह मदरसा सरकार से अनुदानित है और इसे 28 सितंबर 1948 को उच्च आलिया स्तर की स्थायी मान्यता दी गई थी
मदरसा प्रबंधन पर आरोप है कि सहायक शिक्षक शमसुल हुदा खान द्वारा ब्रिटेन की नागरिकता लेने और वर्ष 2007 से विदेश में निवास करने के बावजूद उनका वेतन आहरित किया जाता रहा। परिषद की रजिस्ट्रार अंजना सिरोही के अनुसार, जांच में सामने आया कि शमसुल हुदा खान को अवैतनिक अवकाश के नाम पर 5 वर्ष 7 माह 3 दिन की अनियमित अनुपस्थिति दी गई, साथ ही 502 दिनों का चिकित्सीय अवकाश भी स्वीकृत किया गया।
जांच में यह भी पाया गया कि शमसुल हुदा ने ब्रिटेन की नागरिकता लेने के बाद वहीं एक मस्जिद में इमाम के रूप में नियुक्त होकर विदेश में निवास किया, लेकिन इसके बावजूद मदरसे से वेतन लेते रहे। सेवाओं के संतोषजनक सत्यापन के अभाव में उनकी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति कराई गई और पेंशन, जीपीएफ समेत अन्य सेवानिवृत्त देयों का भी अनियमित भुगतान कराया गया।
रजिस्ट्रार ने बताया कि यह मामला शमसुल हुदा और मदरसा प्रबंधन की मिलीभगत से राजकोश को वित्तीय नुकसान पहुंचाने वाले संगठित आपराधिक कृत्य जैसा है। मदरसा सेवा नियमावली और वित्तीय अनुशासन के उल्लंघन को गंभीर मानते हुए परिषद ने मदरसे की मान्यता निलंबित करने का निर्णय लिया।
गौरतलब है कि मदरसा शिक्षा परिषद ने इससे पहले बीते बुधवार को शमसुल हुदा खान से जुड़े संतकबीर नगर स्थित मदरसा कुल्लियात बनातिर रजबिया की मान्यता भी निलंबित की थी।
