
रिपोर्ट_______अरुण यादव
आजमगढ़। आजमगढ़ की समृद्ध साहित्यिक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को समर्पित एक भव्य आयोजन में प्रख्यात साहित्यकार स्वर्गीय डॉ. कन्हैया सिंह की जयंती पर शनिवार को डी.ए.वी. पी.जी. कॉलेज के सेमिनार हॉल में राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। हिन्दुस्तानी एकेडेमी, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज एवं हिन्दी विभाग, डी.ए.वी. पी.जी. कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर से आए शिक्षाविदों, साहित्यकारों और शोधकर्ताओं ने डॉ. कन्हैया सिंह के साहित्यिक अवदान को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
राष्ट्रीय संगोष्ठी का विषय “हिन्दी सूफी काव्य में हिन्दू संस्कृति” रहा। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता महाराजा सुहेल देव विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने की। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण ‘डॉ. कन्हैया सिंह साहित्य सम्मान-2026’ रहा, जिससे वरिष्ठ साहित्यकार एवं उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. सदानन्द प्रसाद गुप्त को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय, बलिया के कुलपति प्रो. एन.के. शुक्ला, माँ पाटेश्वरी विश्वविद्यालय, बलरामपुर के कुलपति रविशंकर सिंह तथा जी.बी. पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. योगेन्द्र प्रताप सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं मां सरस्वती की प्रतिमा तथा डॉ. कन्हैया सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुआ। स्वागत भाषण डॉ. पंकज सिंह ने दिया, जबकि कार्यक्रम की प्रस्तावना हिन्दी विभाग के सहायक आचार्य अवनीश राय ने प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि डॉ. कन्हैया सिंह केवल एक शिक्षक ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सूफी साहित्य के अप्रतिम अध्येता थे, जिनके साहित्य का मूल आधार प्रेम और सांस्कृतिक समन्वय रहा।
सम्मान ग्रहण करने के बाद प्रो. सदानन्द प्रसाद गुप्त ने अपने संबोधन में कहा कि जायसी और सूफी काव्य परंपरा को नई पहचान दिलाने में डॉ. कन्हैया सिंह का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने कहा कि भारतीय प्रेमाख्यानक काव्य पूरी तरह भारतीय संस्कृति की देन है और सूफी कवियों के साहित्य में भारतीय दर्शन, योग साधना और सांस्कृतिक समन्वय स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
जी.बी. पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. योगेन्द्र प्रताप सिंह ने अपने संस्मरण साझा करते हुए कहा कि शोध छात्र जीवन में उन्हें डॉ. कन्हैया सिंह के मार्गदर्शन में कार्य करने का अवसर मिला, जिन्होंने हमेशा नए साहित्यिक तथ्यों की खोज के लिए प्रेरित किया। वहीं प्रो. एन.के. शुक्ला ने पाठानुसंधान के क्षेत्र में डॉ. कन्हैया सिंह के योगदान को उल्लेखनीय बताया।
अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने कहा कि डॉ. कन्हैया सिंह जैसी महान विभूति का आजमगढ़ से जुड़ा होना पूरे जिले के लिए गौरव की बात है। उन्होंने घोषणा की कि पाठानुसंधान विषय का पाठ्यक्रम तैयार कर महाराजा सुहेल देव विश्वविद्यालय में लागू कराने का प्रयास किया जाएगा।
कार्यक्रम का संचालन प्रो. गीता सिंह एवं अवनीश राय ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सहायक आचार्य डॉ. विनम्र सेन सिंह ने किया। आयोजन की सफलता पर तीनों कुलपतियों ने संयोजक प्रो. गीता सिंह को स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया।
द्वितीय सत्र में डॉ. निरंजन, डॉ. सुजीत कुमार सिंह, प्रो. रवींद्र नाथ श्रीवास्तव ‘परिचय दास’, प्रो. निर्मला एस. मौर्य, डॉ. सुनील विपुल एवं प्रो. देवेंद्र प्रताप सिंह सहित कई विद्वानों ने विषय पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्राध्यापकों, शोधार्थियों और साहित्य प्रेमियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
