रिपोर्ट_______अरुण यादव

आजमगढ़। शहर कोतवाली क्षेत्र के बिलरिया की चुंगी स्थित न्यू यशलोक हॉस्पिटल में भर्ती एक महिला के उपचार के दौरान कथित लापरवाही का मामला सामने आया है। मुबारकपुर थाना क्षेत्र के लाडपुर नैठी गांव निवासी तीमारदार धर्मराज यादव ने अस्पताल के चिकित्सक पर उनकी पत्नी को अप्रशिक्षित दाई से एनिमा लगवाने का आरोप लगाया है। तीमारदार के मुताबिक एनिमा लगाने के बाद महिला को खून के साथ लगातार दस्त होने लगे और बाद में कराई गई एंडोस्कोपिक जांच में आंत में छाले पाए गए। शिकायत के बाद रविवार को पहुंची पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाकर शांत कराया और आगे की कार्रवाई के लिए दोनों को शहर कोतवाली बुलाया है।

धर्मराज यादव के अनुसार उनकी पत्नी डिंपल यादव के पित्त की थैली में पथरी है। उन्होंने 12 अगस्त को न्यू यशलोक हॉस्पिटल के चिकित्सक डॉ. पीडी यादव को दिखाया था। चिकित्सक ने ऑपरेशन की सलाह दी। इसके बाद 18 अगस्त को वह पत्नी को अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उन्हें भर्ती कर लिया गया।

धर्मराज का आरोप है कि ऑपरेशन से पहले पेट साफ करने के लिए एनिमा लगाने की बात कही गई। चिकित्सक के कहने पर अस्पताल में कार्यरत दाई सरोज ने उनकी पत्नी को एनिमा लगाया। आरोप है कि एनिमा गर्म होने और उससे भाप निकलने की शिकायत मरीज ने की, लेकिन इसके बावजूद एनिमा लगा दिया गया। इसके बाद महिला को खून के साथ लगातार दस्त होने लगे और उसकी हालत बिगड़ती चली गई।

तीमारदार का आरोप है कि चिकित्सक को इसकी जानकारी देने के बावजूद करीब तीन दिनों तक महिला की हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। उनका कहना है कि मरीज को न तो दूसरे अस्पताल के लिए रेफर किया गया और न ही समुचित उपचार मिला। बाद में कराई गई एंडोस्कोपिक जांच में आंत में छाले होने की जानकारी सामने आई। धर्मराज ने आरोप लगाया कि अप्रशिक्षित दाई से एनिमा लगवाने के कारण उनकी पत्नी की तबीयत बिगड़ी।

पुलिस पहुंची तो हुई नोकझोंक

रविवार को धर्मराज ने मामले की सूचना पुलिस को दी। सूचना पर डायल 112 की टीम अस्पताल पहुंची। तीमारदार का आरोप है कि पुलिस काफी देर तक अस्पताल का दरवाजा खटखटाती रही, लेकिन चिकित्सक या अस्पताल का कोई जिम्मेदार व्यक्ति सामने नहीं आया। बाद में मैनेजर के माध्यम से चिकित्सक को बुलाया गया। कुछ देर बाद चिकित्सक नीचे आए और पुलिस से बातचीत की।

इस दौरान मरीज को डिस्चार्ज करने और ऑपरेशन के लिए जमा कराए गए 15 हजार रुपये वापस करने को लेकर तीमारदार और चिकित्सक के बीच जमकर नोकझोंक हुई। पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाकर मामला शांत कराया। इसके बाद दोनों पक्षों को शहर कोतवाली बुलाया गया।

चिकित्सक ने आरोपों को बताया निराधार

अस्पताल के चिकित्सक डॉ. पीडी यादव ने तीमारदार के आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि पित्त की थैली के ऑपरेशन से पहले मरीज का पेट साफ करने के लिए एनिमा लगाया जाता है और अस्पताल में यह कार्य दाई द्वारा ही किया जाता है। उन्होंने कहा कि मरीज को दस्त होने में उनकी कोई गलती नहीं है। चिकित्सक के अनुसार मरीज को कोलाइटिस की समस्या थी, जिसकी दवा दी गई है और अब मरीज पहले से ठीक है।

डॉ. यादव ने कहा कि मरीज को डिस्चार्ज कर दिया गया है। उनके मुताबिक यदि अस्पताल का कोई हिसाब-किताब बाकी है तो मरीज अपना पैसा लेकर जा सकता है।

तहरीर मिलने पर होगी कार्रवाई : कोतवाल

शहर कोतवाल यादवेंद्र पांडेय ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है और डायल 112 की पुलिस टीम मौके पर गई थी। परिजन मरीज को किसी अन्य अस्पताल में भर्ती कराने के लिए ले गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि इस मामले में तहरीर मिलती है तो जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।