
रिपोर्ट_____आशीष निषाद
आजमगढ़। जिले में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी (सपा) और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला। शनिवार को निरीक्षण भवन में पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव रंग बदलने में माहिर हो गए हैं और अब उन्हें अपनी पहचान बन चुकी लाल टोपी से भी डर लगने लगा है।
अखिलेश यादव के हाल के नीले गमछे और लाल टोपी वाले पहनावे पर तंज कसते हुए राजभर ने आरोप लगाया कि यह दलितों को गुमराह करने की कोशिश है। उन्होंने 2 जून 1995 के लखनऊ गेस्ट हाउस कांड का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय सपा कार्यकर्ताओं ने बसपा प्रमुख मायावती पर हमला किया था। राजभर के मुताबिक, उस दौरान भाजपा नेताओं ने मौके पर पहुंचकर मायावती की जान बचाई थी।
राजभर ने आरोप लगाया कि सपा सरकार के कार्यकाल में दलित अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रमोशन में आरक्षण समाप्त किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि दलित महापुरुषों और संतों के नाम पर बनाए गए कुछ जिलों और अस्पतालों के नाम बदले गए तथा दलित कल्याण से जुड़ी योजनाएं बंद की गईं। उन्होंने कहा कि अब वही लोग नीला गमछा पहनकर दलित हितैषी बनने का दिखावा कर रहे हैं। सपा के बदलते राजनीतिक रुख पर निशाना साधते हुए राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव को जमीन पर वास्तविकता का अहसास हो चुका है। उनके अनुसार, इसी वजह से अब भगवा रंग, गेरुआ बस और सनातन का सहारा लिया जा रहा है। राजभर ने अयोध्या में रामभक्तों पर गोली चलाए जाने की घटना का उल्लेख करते हुए सपा पर सवाल उठाया। उन्होंने मुजफ्फरनगर दंगों को लेकर भी सपा सरकार पर आरोप लगाया कि मुआवजा वितरण में एक वर्ग के साथ भेदभाव किया गया। राजभर ने कहा कि अब अखिलेश यादव योगी आदित्यनाथ सरकार के मॉडल की नकल करते हुए अपराध और माफिया से दूरी दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। अखिलेश यादव की नई हाईटेक बस को लेकर भी राजभर ने कटाक्ष किया। उन्होंने आरोप लगाया कि करीब 20 करोड़ रुपये की गाड़ी इसलिए ली गई है, ताकि अखिलेश यादव को दलितों और पिछड़ों से हाथ न मिलाना पड़े। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब अखिलेश बस की छत से निकलकर जनता को सिर्फ ‘टाटा’ करेंगे। राजभर ने नाई, पाल, प्रजापति, लोहार, निषाद, बिंद, केवट, मल्लाह, कश्यप, बंजारा, राजभर, चौहान, गुप्ता, चौरसिया, सोनकर और खटीक समेत विभिन्न पिछड़े और वंचित वर्गों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन समाजों के लोगों से हाथ मिलाना भी अखिलेश यादव को पसंद नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा प्रमुख खुद को बड़ा नेता मानकर वंचित तबकों को अछूत समझने लगे हैं।
सपा नेता माता प्रसाद पांडेय से मुलाकात की चर्चाओं पर राजभर ने कहा कि उनकी उनसे कोई मुलाकात नहीं हुई है। वहीं, डॉ. संजय निषाद से मुलाकात के सवाल पर उन्होंने कहा कि बीमारी या संकट के समय नेताओं का एक-दूसरे से मिलना सामान्य शिष्टाचार है।
अतरौलिया में डॉ. संजय निषाद द्वारा उनके बेटे की हार की भविष्यवाणी किए जाने के सवाल पर राजभर ने कहा, “परीक्षक कोई नेता नहीं होता, असली परीक्षक जनता होती है।” उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति जनता के बीच जाकर वास्तविक स्थिति देख सकता है। यूपीआई लेन-देन पर अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने की खबरों को राजभर ने भ्रामक बताया। उन्होंने कहा कि 95 प्रतिशत आम नागरिकों और छोटे दुकानदारों पर इसका कोई अतिरिक्त भार नहीं पड़ेगा। उनके अनुसार, यह व्यवस्था बड़े व्यावसायिक लेन-देन तक सीमित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर सरकारी मशीनरी के इस्तेमाल के विपक्ष के आरोपों पर भी राजभर ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं बचा है। गरीबों में फल वितरण, विश्वकर्मा जयंती और दीपोत्सव जैसे सेवा कार्यों का विरोध करना विपक्ष की नकारात्मक मानसिकता को दर्शाता है।
