आजमगढ़। जिले में परंपरागत धान की खेती के स्थान पर अब किसानों का रुझान धीरे-धीरे मोटे अनाज (श्री अन्न) की ओर बढ़ता जा रहा है। इसका प्रमुख कारण लगातार कुछ वर्षों से बारिश की कमी और धान की खेती में बढ़ती लागत के चलते होने वाला घाटा है। ऐसी स्थिति में कृषि विभाग किसानों को विकल्प के रूप में मोटे अनाज की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।

मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग द्वारा जिले के किसानों को निःशुल्क बीज मिनी किट उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इन बीजों का वितरण राजकीय बीज भंडारों के माध्यम से किया जा रहा है। इस अभियान के तहत अब तक जिले में तीन हजार से अधिक मिनी किट्स का वितरण किया जा चुका है।

इन मिनी किट्स में रागी, सांवा, ज्वार और बाजरा जैसे पोषक अनाज शामिल हैं। कृषि विभाग का मानना है कि इन अनाजों की खेती से किसानों को कम लागत में बेहतर उत्पादन मिलेगा, साथ ही लोगों के स्वास्थ्य में भी सुधार होगा। ये अनाज न केवल पर्यावरण के अनुकूल हैं, बल्कि जल संरक्षण में भी सहायक हैं।

उप कृषि निदेशक आशीष कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि मोटे अनाज की खेती को लेकर केंद्र और राज्य सरकार दोनों ही गंभीर हैं। उन्होंने कहा कि मोटा अनाज लोगों की थाली से गायब होता जा रहा है, जबकि यह स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है। आजमगढ़ में आज के दिन ही ज्वार के 330, बाजरा के 556, रागी के 1342 और सांवा के 880 मिनी किट्स वितरित किए गए।

उप कृषि निदेशक, आज़मगढ़

उन्होंने बताया कि एफपीओ के माध्यम से इन अनाजों की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और स्टोरेज यूनिट की स्थापना पर सरकार अनुदान भी दे रही है, ताकि मोटे अनाज का बाजार सशक्त हो सके और किसानों को अच्छा मूल्य मिल सके। किसानों से आह्वान किया गया कि वे मोटे अनाज की खेती अपनाएं और पुनः इसे लोगों की थाली तक पहुंचाने में सहभागी बनें।