आज़मगढ़। आधुनिक हिंदी नाटक के जनक, महाकवि एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पं. लक्ष्मी नारायण मिश्र की 123वीं जयंती के अवसर पर नगर पालिका परिषद चौराहे पर स्थित उनकी प्रतिमा पर श्रद्धा और सम्मान के साथ कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार ने प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया और उनके योगदान को स्मरण किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार ने कहा कि आजमगढ़ की धरती सदैव महान विभूतियों की जन्मस्थली रही है। इस भूमि ने साहित्य, नाटक और कविता के क्षेत्र में ऐसे-ऐसे रत्न दिए हैं, जिनका योगदान समाज और राष्ट्र निर्माण में अतुलनीय है। उन्होंने कहा कि राहुल सांस्कृत्यायन और अयोध्या सिंह ‘उपाध्याय’ जैसे महान साहित्यकार यहीं से निकलकर पूरे देश को दिशा देने का कार्य कर चुके हैं।
जिलाधिकारी ने कहा कि पंडित लक्ष्मी नारायण मिश्र जैसे महापुरुषों की जयंती मनाने का उद्देश्य केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि उनके विचारों और आदर्शों से प्रेरणा लेना है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को यह संदेश मिलता है कि समाज और राष्ट्र निर्माण में व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर कार्य करना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।
उन्होंने यह भी कहा कि समय के साथ समाज की सोच बदल रही है, लेकिन आज भी बहुत से लोग निस्वार्थ भाव से समाज और जरूरतमंदों के हित में कार्य कर रहे हैं। स्वयंसेवी संस्थाएं गरीबों, शोषितों और पीड़ितों को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं, जिससे समाज की नींव मजबूत हो रही है।
जिलाधिकारी ने युवाओं से आह्वान किया कि वे पं. लक्ष्मी नारायण मिश्र के जीवन से प्रेरणा लेकर समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करें। उन्होंने कहा कि स्व की भावना से ऊपर उठकर परहित और राष्ट्रहित में किया गया कार्य ही सच्चे अर्थों में समाज को आगे बढ़ाता है।
