
दिल्ली/लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी से बगावत करके भाजपा प्रत्याशी का समर्थन करने वाले सात में से तीन विधायकों ने मंगलवार को दिल्ली में गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की है। बाहुबली विधायक अभय सिंह के साथ राकेश सिंह और विनोद चतुर्वेदी की अमित शाह से मुलाकात के दौरान भाजपा के राज्यसभा सांसद संजय सेठ भी मौजूद रहे। इस मुलाकात के बाद एक बार फिर यूपी की योगी कैबिनेट के विस्तार की चर्चाएं तेज हो गई हैं। कहा जा रहा है कि सपा से बगावत करने के बाद से ही यह विधायक भविष्य की राजनीति को लेकर चिंतित हैं। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले इन विधायकों ने भाजपा का समर्थन किया था। हालांकि विधायकों के भगवा ब्रिगेड में आने के बाद भी भाजपा को लोकसभा चुनाव में फायदा नहीं हुआ था। ऐसे में इनके भविष्य को लेकर तभी से तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
इस बीच भाजपा में संगठन चुनाव हो रहे हैं और योगी कैबिनेट के विस्तार की चर्चाओं के बीच यह मुलाकात बेहद अहम मानी जा रही है। सपा के बागी विधायक इससे पहले भी भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से लगातार मुलाकात करते रहे हैं। कहा जा रहा है कि आज की मुलाकात में भविष्य में इनकी क्या भूमिका होगी, इस पर चर्चा हुई है। अगले विधानसभा चुनाव में भाजपा की क्या रणनीति होगी और इन विधायकों को किस तरह से इस्तेमाल होगा, इस पर भी बातचीत हुई है।
मुलाकात की जानकारी खुद विधायक अभय सिंह की तरफ से ही सार्वजनिक हुई है। अभय सिंह ने एक्स पर तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा कि भारतीय राजनीति के चाणक्य, देश के यशस्वी गृह एवं सहकारिता मंत्री आदरणीय श्री अमित शाह जी से शिष्टाचार भेंट कर आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन प्राप्त किया। आपका प्रेरणादायी मार्गदर्शन व आशीर्वाद सदैव ही नव-ऊर्जा एवं उत्साह के संचार को गति प्रदान करता है।
पिछले दिनों से ही अभय सिंह को जानलेवा हमले के मामले में लखनऊ हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली थी। उनकी विधायकी पर लटकी तलवार हट गई थी। जानलेवा हमले के मामले में हाईकोर्ट के ही दो न्यायाधीशों की पीठ ने पहले अलग अलग फैसला सुना दिया था। एक न्यायाधीश ने अभय सिंह को दोषी ठहरा दिया था तो दूसरे न्यायधीश ने इसके उलट फैसला दिया था। इसी के बाद तीसरे न्यायाधीश के पास मामला पहुंचा और अभय सिंह को राहत मिल गई थी।
कोर्ट से राहत के बाद ही अभय सिंह एक बार फिर एक्टिव हुए हैं। अगले विधानसभा चुनाव में अभी दो साल का समय है। ऐसे में माना जा रहा है कि यह विधायक अपने लिए कोई भूमिका चाहते हैं। ताकि अपने इलाके में अपनी और भाजपा की स्थिति को मजबूत कर सकें।