आजमगढ़,।  उ०प्र० राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ एवं जिला न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, आजमगढ़ के निर्देशानुसार आज जिला कारागार का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान जेल अधीक्षक ने बताया कि वर्तमान में जेल में विचाराधीन बंदियों की संख्या 889 तथा सिद्धदोष बंदियों की संख्या 281 है।

निरीक्षण के दौरान बंदियों द्वारा कौशल विकास के अंतर्गत बनाए जा रहे मिट्टी के बर्तनों का अवलोकन किया गया। मौके पर बंदियों द्वारा मिट्टी के कुल्हड़ बनाए जा रहे थे। सचिव ने जेल अधीक्षक को निर्देश दिया कि 13 सितंबर 2025 को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में बंदियों द्वारा बनाए गए मिट्टी के सामानों का स्टॉल लगवाया जाए। जेल परिसर में सफाई और व्यवस्था संतोषजनक पाई गई।

महिला बैरक निरीक्षण में कुल 31 महिला बंदियां निरूद्ध पाई गईं। सभी के मुकदमों की पैरवी हेतु अधिवक्ता नामित हैं। किसी भी महिला बंदी को कानूनी समस्या नहीं है। जेल में महिला बंदियों के चिकित्सीय इलाज के लिए महिला डॉक्टर की नियुक्ति मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने की है, लेकिन वर्तमान में वह ड्यूटी पर नहीं हैं। जेल अधीक्षक को निर्देशित किया गया कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी को पत्राचार कर स्थिति से अवगत कराएँ।

सचिव ने जेल अधीक्षक को कहा कि किसी बंदी की समस्या का समुचित निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही ऐसे विचाराधीन बंदियों की सूची तैयार की जाए जिनके मुकदमों के लिए अधिवक्ता नहीं हैं या जिन्होंने अपने सजा का आधा भाग काट लिया है, और इसे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में प्रेषित किया जाए।

निरीक्षण में जेल अधीक्षक आदित्य कुमार, जेलर रामनरेश गौतम, डिप्टी जेलर वीरेश्वर प्रताप सिंह, आशीष कुमार राय, चीफ एवं डिप्टी लीगल एड डिफेन्स काउन्सिल, तथा जेल के पराविधिक स्वयंसेवक उपस्थित रहे।