रिपोर्ट: अरुण यादव

अब तक 661 लावारिश शवों का कर चुके है अंतिम संस्कार

आजमगढ़। मृत्यु सबके लिए सत्य है, लेकिन हर किसी को विदाई देने वाले अपने नहीं होते। कई बार सड़क किनारे, अस्पतालों या सुनसान जगहों पर पड़े लावारिस मृतक बेनाम रह जाते हैं, जिन्हें अंतिम संस्कार तक का सहारा नहीं मिलता। ऐसे मृतकों की दुर्गति देखकर भारत रक्षा दल ने समाज में मानवता की मिसाल कायम की है। जब परिवार अपने पितरों के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर उनके लिए शांति की प्रार्थना करता है, तब यह संगठन उन अनजान आत्माओं का यजमान बनकर उनकी आत्मा की तृप्ति हेतु धार्मिक अनुष्ठान करता है। यह संवेदनशील पहल वर्ष 2013 से लगातार की जा रही है और हर पितृपक्ष में इसकी विशेष आयोजन के रूप में परंपरा निभाई जाती है।

शनिवार को राजघाट पर लावारिस मृतकों के लिए तर्पण, पिंडदान और पूजा का अनुष्ठान सम्पन्न हुआ। इसके बाद कलेक्ट्रेट रिक्शा स्टैंड पर सामूहिक श्राद्ध भोज का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जैनेंद्र चौहान, आर.पी. श्रीवास्तव, शक्ति शरण, अनूप श्रीवास्तव, मनीराम, विनोद शर्मा, प्रदीप चौहान, चंद्रप्रकाश, हरेंद्र यादव आदि ने लावारिसों का यजमान बनकर तर्पण व पिंडदान किया। पुरोहित सभाजीत पांडे के नेतृत्व में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा संपन्न हुई। इसके बाद ब्राह्मणों को वस्त्र, धन और धातु का दान देकर सामूहिक श्राद्ध भोज का आयोजन किया गया। जिसमें सैकड़ों लोगों ने भाग लिया।

इस अवसर पर  भारत रक्षा दल के हरिकेश विक्रम श्रीवास्तव ने कहा कि लावारिस मृतकों को कोई पूछने वाला नहीं होता, लेकिन उनकी आत्मा की शांति के लिए हम सब मिलकर उनका अंतिम संस्कार करते हैं। समाज में यह संवेदनशील कार्य मानवता की सेवा है। इसलिये हम लोग वर्ष 2013 से निरंतर लावारिश शवो का अंतिम संस्कार करने के साथ पितृपक्ष में तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करते है। उन्होंने कहा कि अब तक 661 लावारिश शवों का अंतिम संस्कार कर चुके है।