
आजमगढ़। जिले में महाराजा सुहेलदेव राज्य विश्वविद्यालय, विवादों के घेरे में है। विश्वविद्यालय प्रशासन पर भ्रष्टाचार, नियुक्तियों में धांधली और लचर परीक्षा प्रणाली के गंभीर आरोप लगाते हुए छात्र नेताओं ने कलेक्ट्रेट चौराहे पर मोर्चा खोल दिया है। छात्र नेता अविनाश सिंह ‘बंटी के नेतृत्व में विश्वविद्यालय के दर्जनों छात्रों ने के बाहर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और कुलपति व रजिस्ट्रार का पुतला दहन कर अपना आक्रोश व्यक्त किया। प्रदर्शन के दौरान छात्रों को संबोधित करते हुए अविनाश सिंह ‘बंटी’ ने कहा कि जिस मंशा के साथ इस महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय की स्थापना हुई थी, प्रशासन उसे पूरी तरह मटियामेट करने पर तुला है। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में पठन-पाठन का माहौल पूरी तरह समाप्त हो चुका है। कक्षाएं समय पर नहीं चल रही हैं और शिक्षकों की कमी के कारण छात्रों का भविष्य अंधकार में है। सबसे तीखा हमला विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली पर बोला गया। छात्र नेताओं का कहना है कि नई शिक्षा नीति की आड़ में सेमेस्टर सिस्टम को इस तरह लागू किया गया है कि छात्रों पर आर्थिक बोझ दोगुना हो गया है। पहले जहां साल में एक बार परीक्षा होती थी, वहीं अब साल में दो बार परीक्षाएं कराकर छात्रों से भारी-भरकम फीस वसूली जा रही है। परीक्षा परिणामों में देरी और मार्कशीट में गड़बड़ी अब यहाँ की आम बात हो गई है। छात्र नेता अविनाश सिंह ने विश्वविद्यालय के भीतर चल रहे कथित **’वसूली के खेल’** पर सनसनीखेज दावे किए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के छोटे-बड़े हर काम के लिए दलालों का सहारा लेना पड़ रहा है। बिना पैसे लिए कोई फाइल आगे नहीं बढ़ती। हाल ही में एक कर्मचारी के पकड़े जाने के मामले का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, “यह तो केवल भ्रष्टाचार की एक छोटी सी बानगी है; असलियत में जड़ें बहुत गहरी हैं। प्रशासन के संरक्षण में भ्रष्टाचार का यह तंत्र फल-फूल रहा है।”
प्रदर्शनकारियों ने केवल वित्तीय भ्रष्टाचार ही नहीं, बल्कि **बैकडोर नियुक्तियों** पर भी सवाल उठाए।
छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय में पदों पर नियुक्तियां योग्यता के आधार पर नहीं, बल्कि राजनीतिक सिफारिशों के दम पर की जा रही हैं। हाल ही में विवादों में आए एक आरोपी कर्मचारी का संबंध एक पूर्व सांसद से है। छात्रों का दावा है कि राजनीतिक प्रभाव के चलते ही ऐसे लोगों को महत्वपूर्ण पदों पर बैठाया गया है, जिससे विश्वविद्यालय की गरिमा धूमिल हो रही है। कलेक्ट्रेट चौराहे पर हुए हुए इस उग्र प्रदर्शन में भारी संख्या में छात्र एकजुट रहे। प्रदर्शन में मुख्य रूप से ,आनंद यादव ,बृजेश सोनकर ,अमन दुबे ,शौर्य सिंह,कौशिक,अनुराग ओझा ,रितेश चौहान विशाल दुबे,दीपक कुमार,अंकुर इन सभी छात्र नेताओं ने एक सुर में विश्वविद्यालय प्रशासन की तानाशाही और भ्रष्टाचार के खिलाफ नारेबाजी की। छात्रों का कहना है कि यदि जल्द ही कुलपति ने इन व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया, तो वे विश्वविद्यालय के कामकाज को ठप करने के लिए बाध्य होंगे।प्रदर्शन के अंत में छात्र नेताओं ने प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यह तो केवल शुरुआत है। यदि नियुक्तियों की जांच नहीं हुई और परीक्षा प्रणाली को छात्र-हितैषी नहीं बनाया गया, तो पूरे आजमगढ़ मंडल में उग्र आंदोलन छेड़ा जाएगा। उन्होंने आम जनता और अभिभावकों से भी अपील की है कि वे अपने बच्चों के भविष्य के लिए इस भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाएं।
