राजीव चौहान
आज़मगढ़। प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर एक बार फिर अपने विशिष्ट और आक्रामक राजनीतिक अंदाज को लेकर चर्चा के केंद्र में हैं। पूर्वांचल की राजनीति में अपनी ताकत को और धार देने की रणनीति के तहत राजभर ने आज़मगढ़ जनपद के अतरौलिया क्षेत्र में बड़ा शक्ति प्रदर्शन किया है, जिसने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है।
अतरौलिया के खजुरी गांव में आयोजित राष्ट्रीय सुहेलदेव सेना के प्रशिक्षण शिविर में ढाई हजार से अधिक युवाओं को संगठन से जोड़ा गया। इस आयोजन में चारों ओर पीले रंग की छटा दिखाई दी। युवाओं को पीली वर्दी पहनाई गई और पारंपरिक प्रशिक्षण के प्रतीक के रूप में पीला डंडा भी प्रदान किया गया। पूरे शिविर का दृश्य किसी अनुशासित सैन्य अभ्यास जैसा नजर आया, जिसने कार्यक्रम को खास बना दिया।
इस दौरान ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि राष्ट्रीय सुहेलदेव सेना का उद्देश्य समाज के गरीब, वंचित और शोषित वर्ग को संगठित करना है। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करना और उन्हें अनुशासन के साथ आगे बढ़ने के लिए तैयार करना ही इस संगठन का मुख्य लक्ष्य है। राजभर ने युवाओं से आह्वान किया कि वे गांव-गांव जाकर पार्टी की नीतियों और महाराजा सुहेलदेव के विचारों को जन-जन तक पहुंचाएं।
डंडा (सोटा)वितरण को लेकर उठे सवालों पर मंत्री राजभर ने बेबाक अंदाज में जवाब दिया। वे कहते है कि इसे किसी भी तरह से अवैध हथियार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक यह केवल पारंपरिक प्रशिक्षण का हिस्सा है, जो आत्मरक्षा, अनुशासन और शारीरिक मजबूती का प्रतीक है। राजभर ने कहा कि भारतीय परंपरा में लाठी-डंडा सदियों से रहा है और इसे गलत नजरिए से देखना अनुचित है।
राजनीतिक के जानकारों का मानना है कि इस तरह के प्रशिक्षण शिविरों के जरिए राजभर पूर्वांचल में अपने सामाजिक और राजनीतिक आधार को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं। एक समान वर्दी, संगठित ढांचा और बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी से संगठन की ताकत और एकजुटता का संदेश दिया गया है। इसे आने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारी से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
हालांकि, इस आयोजन के बाद विपक्षी दलों ने सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि एक जिम्मेदार पद पर बैठे मंत्री द्वारा इस तरह के कार्यक्रम कानून-व्यवस्था के लिहाज से चिंता पैदा करते हैं। वहीं सुभासपा इसे पूरी तरह सामाजिक और संगठनात्मक गतिविधि बताते हुए विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज कर रही है।
गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों से कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर और उनके पुत्र अतरौलिया स्थित डाक बंगले में लगातार डेरा डाले हुए हैं। इस दौरान वे क्षेत्र का नियमित भ्रमण कर रहे हैं और जनसुनवाई के माध्यम से लोगों की समस्याएं सुन रहे हैं। सियासी हलकों में चर्चा है कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में अतरौलिया सीट से ओम प्रकाश राजभर अपने पुत्र को चुनावी मैदान में उतार सकते हैं। इसी को लेकर संगठन विस्तार, युवाओं को जोड़ने और क्षेत्र में सक्रियता बढ़ाने की रणनीति पर लगातार काम किया जा रहा है।
