रिपोर्ट: अरुण यादव
आज़मगढ़। कोई बहन भाई का चेहरा देखकर आंसू नहीं रोक पा रही थी, तो कोई भाई अपनी बहन को गले लगाकर फूटकर रोया। लेकिन, जब राखी बांधने की बारी आई तो दोनों के चेहरे की खुशी देखते ही बन रही थी। यह नजारा शनिवार को जिला कारागार में दिखा, जहां बहनें अपने भाइयों से मिलीं तो उनकी भावनाएं आंसुओं के रूप में छलक उठीं।

रक्षाबंधन पर आज़मगढ़ के इटौरा स्थित जिला कारागार में सुबह से ही बहनों का पहुंचना शुरू हो गया था। जेल प्रशासन ने पहले से पूरी तैयारी कर रखी थी। बाहर की मिठाई व अन्य खाद्य सामग्री ले जाने पर प्रतिबंध था। जेल प्रशासन ने राखी व मिष्ठान की व्यवस्था निःशुल्क की थी। इसके लिए अतिरिक्त कर्मियो के साथ ही अपराध नियंत्रक समिति के लोगों की मदद से गेट पर टेंट लगाया गया था। बहनों को बैठने के लिए मैट व पानी पीने की भी व्यवस्था की गई थी। शनिवार को 510 बहनों ने जेल में बंद अपने भाइयों को राखी के रूप में प्यार बांधा। कतार में खड़े होने के दौरान कुछ महिलाओं के आंसू छलक उठे। जैसे ही भाई को अंदर जाकर निहारा तो खुद को संभाल न सकीं। भाई-बहन का प्यार देखकर जेल के अधिकारी व कर्मचारी भी भावुक हो गए।
जेलर आरएन गौतम ने बताया कि रक्षाबंधन पर बहनों को कोई दिक्कत न हो, इसके लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए थे। महिलाओं को लाइन में लगाकर प्रवेश दिया गया, जिससे अव्यवस्था न फैले। जेल पहुंचीं सभी महिलाओं ने अपने भाइयों से मुलाकात कर राखियां बांधीं। इस दौरान हर चेहरा अपने रिश्ते की ममता और स्नेह से भरा दिखा, जिससे माहौल भावुक हो गया।
