आजमगढ़।  जिले के तहसील बूढ़नपुर के गहजी गांव निवासी एक विधवा महिला उत्तमा सिंह ने पारिवारिक उत्पीड़न और कानूनी लड़ाई से टूटकर एसडीएम कार्यालय पर आमरण अनशन की चेतावनी दी है। पति की मौत के बाद जीवन संघर्ष से जूझ रही उत्तमा अब अपनी नाबालिग बेटी रूपाली के साथ न्याय की गुहार लगा रही है।

पीड़िता ने बताया कि उनके पति अशोक सिंह की मृत्यु 28 सितंबर 2019 को गंभीर बीमारी के कारण हुई थी। तीन बेटियों में दो की शादी हो चुकी है और छोटी बेटी मां के साथ ही रहती है। पति की मौत के बाद से ही उत्तमा सिंह चौका-बर्तन कर जैसे-तैसे अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं।

लेकिन दुखों का अंत यहीं नहीं हुआ। उत्तमा का आरोप है कि उनके जेठ और उनके बेटे अक्सर उनसे मारपीट और मानसिक उत्पीड़न करते हैं। वहीं गांव के ही एक अधिवक्ता पर भी फर्जी वसीयतनामा बनवाकर संपत्ति हड़पने की साजिश का आरोप लगाया है।

उत्तमा सिंह ने बताया कि उन्होंने 20 अक्टूबर 2020 को पति की संपत्ति की वरासत के लिए आवेदन दिया था। लेखपाल द्वारा 18 नवंबर 2020 को आख्या दी जा चुकी है, लेकिन अभी तक आदेश जारी नहीं हुआ है। आरोप है कि विपक्षी पक्ष चकबंदी न्यायालय में दबाव बनाकर आदेश रुकवाए हुए हैं और उन्हें धमकियां भी मिल रही हैं।

थक-हार कर अब उत्तमा सिंह ने चेतावनी दी है कि यदि 23 जुलाई 2025 तक चकबंदी अधिकारी द्वारा निर्णय नहीं दिया गया तो वह अपनी बेटी के साथ आमरण अनशन पर बैठने को विवश होंगी।

इस संबंध में तहसीलदार बूढ़नपुर शिव प्रकाश सरोज ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति ने मृत्यु से पहले संपत्ति की वसीयत की है, तो उसी के अनुसार वरासत होती है। उन्होंने कहा कि मामला संज्ञान में आने पर जांच कर उचित कार्यवाही की जाएगी।