
रिपोर्ट______अरुण यादव
आजमगढ़ में रक्षाबंधन के मौके पर भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के रिश्ते को एक अनूठी पहल से जोड़ा गया। “राखी के साथ सुरक्षा का संकल्प” अभियान के तहत आज दोपहिया वाहन चला रही और बाइक पर पीछे बैठकर सफर कर रही 50 से अधिक महिलाओं और लड़कियों लाइफ़ लाइन की तरफ से हेलमेट वितरित किए गए। इस अभियान का उद्देश्य सिर्फ हेलमेट बांटना नहीं, बल्कि महिलाओं को सुरक्षित दोपहिया यात्रा, हेलमेट के नियमित इस्तेमाल और यातायात नियमों के प्रति जागरूक करना रहा। अभियान के दौरान संदेश दिया गया कि बहन की रक्षा का वादा केवल राखी बांधने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसकी हर यात्रा को सुरक्षित बनाने की जिम्मेदारी भी परिवार और समाज की है। इसी कड़ी में लाइफलाइन हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर की ओर से करीब 50 हेलमेट वितरित किए गए। हेलमेट उन महिलाओं और लड़कियों को भी दिए गए, जो खुद दोपहिया वाहन चला रही थीं या बाइक पर पीछे बैठकर यात्रा कर रही थीं।
कार्यक्रम में लाइफलाइन हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के वरिष्ठ न्यूरो सर्जन डॉ. अनूप कुमार सिंह, डॉ. गायत्री कुमारी, डॉ. आकाश, डॉ. अब्दुल रहमान, डॉ. ओबैदुर रहमान, आजमगढ़ पुलिस की ओर से पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार और क्षेत्राधिकारी नगर शुभम तोड़ी, हाफ लेमन परिवार, लाइफलाइन हॉस्पिटल के चिकित्सक एवं स्टाफ और सम्मानित मीडिया बंधुओं की मौजूदगी रही।कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं में सिर की चोट गंभीर नुकसान का कारण बन सकती है। ऐसे में दोपहिया वाहन चलाने वाले के साथ-साथ पीछे बैठकर यात्रा करने वाले व्यक्ति के लिए भी हेलमेट बेहद जरूरी है। डॉ. अनूप कुमार सिंह, वरिष्ठ न्यूरो सर्जन, ने लोगों को सड़क दुर्घटनाओं में सिर की चोट और हेलमेट की उपयोगिता को लेकर जागरूक किया। वहीं डॉ. गायत्री कुमारी ने महिलाओं से दोपहिया वाहन पर सुरक्षित और संतुलित तरीके से बैठकर यात्रा करने की अपील की। अभियान के दौरान यह भी बताया गया कि कई बार महिलाएं दोपहिया वाहन पर दोनों पैर एक ही ओर रखकर यात्रा करती हैं। अचानक ब्रेक, मोड़, स्पीड ब्रेकर या सड़क पर सामने आई किसी अप्रत्याशित स्थिति में इससे संतुलन बिगड़ने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए हेलमेट के साथ-साथ दोपहिया वाहन पर सुरक्षित और संतुलित तरीके से बैठना भी जरूरी है। आजमगढ़ पुलिस की ओर से भी लोगों को यातायात नियमों का पालन करने और हेलमेट को सिर्फ चालान से बचने का साधन न समझकर अपनी और अपनों की जिंदगी की सुरक्षा का माध्यम बनाने की अपील की गई।
रक्षाबंधन के मौके पर इस अभियान का संदेश बेहद खास रहा—
“बहन की रक्षा केवल शब्दों से नहीं, उसकी हर यात्रा को सुरक्षित बनाकर करें।” भाई अपनी बहन की कलाई पर राखी बांधकर उसकी रक्षा का संकल्प लेता है, लेकिन यह संकल्प तभी सार्थक होगा, जब बहन जब भी दोपहिया वाहन से निकले, तो उसकी सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाए। लाइफ लाइन हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर की ओर से करीब 50से ज्यादा हेलमेट का वितरण इसी सामाजिक जिम्मेदारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा। आयोजकों का मानना है कि रक्षाबंधन जैसे भावनात्मक पर्व के माध्यम से यदि सड़क सुरक्षा का संदेश घर-घर तक पहुंचाया जाए, तो हेलमेट के इस्तेमाल को लेकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। राखी का धागा जहां भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम और सुरक्षा का भरोसा मजबूत करता है, वहीं हेलमेट उस भरोसे को व्यवहार में बदलने का माध्यम बन सकता है।
इस रक्षाबंधन संदेश है____
“एक राखी, एक हेलमेट और एक संकल्प… बहन की हर यात्रा सुरक्षित बनाने का।” क्योंकि हर बहन ऐसे भाई की हकदार है, जो केवल उसकी रक्षा का वादा न करे, बल्कि उसकी हर यात्रा के बाद उसे सुरक्षित घर लौटते हुए देखे।
