राजीव चौहान
आज़मगढ़। नई दिल्ली के लाल किले के पास हुए धमाके के बाद एक बार फिर आज़मगढ़ का नाम आतंक के पुराने नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है। अब फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी, जो दिल्ली धमाके में कथित तौर पर “व्हाइट कॉलर” आतंक और मनी लॉन्ड्रिंग जांच के केंद्र में आया है, से आज़मगढ़ का एक छात्र पहले भी इस यूनिवर्सिटी से पढ़ा था जो गोरखपुर, अहमदाबाद और जयपुर के सीरियल बम विस्फोटों में शामिल होने का भी आरोप था, और करीब 18 वर्षों से वह फरार भी चल रहा है।
इस बीच जांच एजेंसियों ने पूर्वी उत्तर प्रदेश से जुड़े कई फरार हैंडलरों की तलाश में अभियान तेज कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, इनकी निगरानी के लिए वाराणसी ज़ोन में नई रणनीति पर काम शुरू हो गया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली धमाके के बाद एजेंसियां उन आतंकी हैंडलरों की तलाश में जुटी हैं, जिनका नाम 2005 के श्रमजीवी एक्सप्रेस ब्लास्ट, 2008 के बाटला हाउस एनकाउंटर और 2011 के दिल्ली हाईकोर्ट धमाके के बाद सामने आया था। इनमें आज़मगढ़ के डॉ. शाहनवाज़, बड़ा साजिद, सलमान, खालिद, आरिफ जुनेद, डॉ. असदुल्लाह अख्तर और मिर्ज़ा शादाब बेग शामिल हैं, जो अब तक फरार बताए जा रहे हैं। इन हैंडलरों के तार हरकत-उल-जिहाद-ए-इस्लामी (हूजी, HUJI) और इंडियन मुजाहिदीन (IM) से जुड़े नेटवर्क से हैं।
अब आज़मगढ़ के मिर्ज़ा शादाब बेग का नाम कथित तौर पर इन संदिग्ध हैंडलरों में प्रमुख हैं, जिसने अल-फलाह यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की थी। बताया जा रहा है कि शादाब बेग ने इसी विश्वविद्यालय से वर्ष 2007 में इलेक्ट्रॉनिक्स और इंस्ट्रूमेंटेशन में बी.टेक पूरा किया। इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियरिंग पढ़ने के कारण, बेग बम बनाने के सभी तकनीकी पहलुओं से बखूबी परिचित था। उसका नाम वर्ष 2007 में गोरखपुर, 2008 में जयपुर और अहमदाबाद धमाकों के मामलों में सामने आया। बताया जा रहा है कि सुरक्षा एजेंसियों को शादाब बेग की आखिरी लोकेशन वर्ष 2019 में अफगानिस्तान में मिली थी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 2005 के दशाश्वमेध घाट हमले और श्रमजीवी एक्सप्रेस धमाके में आज़मगढ़ के सक्रिय मॉड्यूल की भूमिका पर पहले भी संदेह जताया गया था। श्रमजीवी एक्सप्रेस ब्लास्ट में 14 लोगों की मौत और 62 घायल हुए थे, जिसमें दो बांग्लादेशी HUJI आतंकियों को 2023 में दोषी ठहराया गया।
बताया जा रहा है पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंडियन मुजाहिदीन का प्रभाव 2007 के बाद और बढ़ा। इसी कड़ी में वाराणसी कचहरी और दशाश्वमेध घाट धमाके भी सामने आए। जांच एजेंसियां वर्तमान में आज़मगढ़ में सक्रिय आतंकवादी मॉड्यूल की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही हैं। एजेंसियों की प्राथमिकता उन फरार हैंडलरों को पकड़ना है, जिनकी भूमिका पूर्व के धमाकों और हालिया घटनाओं में नाम सामने आ रहे हैं।
