रिपोर्ट____SP त्रिपाठी

आजमगढ़। जिले के मार्टिनगंज तहसील क्षेत्र के ठेकमा गांव निवासी एवं डॉ. राम मनोहर लोहिया राजकीय महाविद्यालय, मुफ्तीगंज जौनपुर के शोध छात्र तथा सवर्ण आर्मी भारत आजमगढ़ के जिला मीडिया प्रभारी अखिलानन्द उपाध्याय ने देशवासियों से जनगणना के दौरान संस्कृत भाषा को अपनी दूसरी भाषा के रूप में दर्ज कराने की अपील की है। आगे उन्होंने कहा कि जब जनगणना अधिकारी घरों पर आएं और मातृभाषा के अतिरिक्त दूसरी भाषा के बारे में पूछें, तो लोग निःसंकोच संस्कृत भाषा का उल्लेख करें। उनके अनुसार संस्कृत केवल देवभाषा ही नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान और आत्मा है। मीडिया से हुई बातचीत में अखिलानन्द उपाध्याय ने कहा कि वैदिक एवं उत्तर वैदिक काल में संस्कृत भारत की प्रमुख लोकभाषा रही है और इस भाषा ने पूरे विश्व को दर्शन, विज्ञान, गणित, आयुर्वेद, मनोविज्ञान, संगीत, नाट्यकला और “वसुधैव कुटुम्बकम्” जैसे सार्वभौमिक संदेश दिए हैं। आगे उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा भारत को एकसूत्र में बांधने का कार्य करती है और यह समाज में समरसता तथा मानवता का संदेश देती है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि संविधान सभा में डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा संस्कृत को राष्ट्रभाषा बनाने का प्रस्ताव प्रमुखता से रखा गया था। उन्होंने सभी वर्ग के लोगों से अपील करते हुए कहा कि जनगणना में संस्कृत भाषा का उल्लेख करने से इस भाषा के संरक्षण और संवर्धन को बल मिलेगा तथा सरकार से इसके विकास के लिए सहयोग मिलता रहेगा।