रिपोर्ट: एसपी त्रिपाठी

आजमगढ़। जिले की पुलिस ने एक घंटे के अंदर मादक पदार्थ गांजे की कीमत में 86 लाख की बढ़ोतरी कर दी। जी हां, इतनी तेजी से तो शायद गांजा तस्कर भी एक घंटे के अंदर रेट नहीं बढ़ाते होंगे, जितना आजमगढ़ पुलिस ने बढ़ा दिया। गनीमत यह रही कि गांजे की मात्रा में कोई बदलाव नहीं किया गया।

दरअसल, आज सुबह एसटीएफ लखनऊ की टीम और गम्भीरपुर पुलिस ने अमौड़ा टोल प्लाजा के पास वाहन चेकिंग के दौरान एक मिनी कंटेनर को पकड़ा। इसमें से 354 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ। साथ ही एक अंतरराज्यीय तस्कर राजीव कुमार यादव पुत्र तिलक सिंह निवासी ग्राम सुरैंदा फूलपुर थाना अजीतमल जनपद औरैया को गिरफ्तार किया गया।

पुलिस के प्रेस नोट के अनुसार गिरफ्तारी आज सुबह करीब 7:30 बजे हुई। पुलिस ने कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर करीब साढ़े तीन बजे प्रेस नोट जारी किया, जिसमें गांजे की कीमत 34 लाख रुपये बताई गई। करीब एक घंटे बाद दूसरा प्रेस नोट जारी किया गया, जिसमें गांजे की कीमत अचानक 86 लाख की बढ़ोतरी करते हुए 1 करोड़ 20 लाख रुपये बता दी गई। इसके एक घंटे बाद एसपी ग्रामीण का बयान जारी हुआ, जिसमें उन्होंने 1 करोड़ 20 लाख रुपये की कीमत पर ही मुहर लगाई।

अब सवाल यह है कि क्या पुलिस ने हड़बड़ी में पहला प्रेस नोट जारी किया? क्या पुलिस को यह डर था कि गिरफ्तारी की असली क्रेडिट लखनऊ एसटीएफ ले लेगी? क्या थाने से जारी प्रेस नोट को सर्किल के अधिकारियों को पहले नहीं भेजा गया? या अगर कोई भूल/त्रुटि हुई तो उसे सुधारने में एक घंटा लग गया?

यह कोई पहला मामला नहीं है। ऐसा कई बार हो चुका है। यही नहीं, जिले के कई ऐसे थानेदार भी हैं जो अपने इलाके के रसूख वाले व्यक्तियों से जुड़े मामलों का प्रेस नोट जारी ही नहीं करते या अगर जारी करते हैं तो फोटो इतनी खराब भेजते हैं कि चेहरा ही साफ नहीं दिखाई देता।
आज के मामले में भूल या त्रुटि भले ही पुलिस को छोटी दिखाई देती हो, लेकिन इस तरह की घटनाओं से हम लोगों के लिए पाठकों के बीच खबरों की विश्वसनीयता बनाए रखना कठिन हो जाता है। यहां तो पुलिस ने गलती की, अभी कुछ दिन पहले एक तहसील की अधिकारी अपने ही बयान को सही करने के चक्कर में दो दिनों तक परेशान रहीं। उन्होंने कुछ और कहानी गढ़ी और उनके अधिकारियों ने कुछ और।

बहरहाल, हो चाहे जो भी—देर आए, दुरुस्त आए। मादक पदार्थ गांजे की कीमत अब  एक करोड़ बीस लाख रुपये ही है।