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आज़मगढ़। शाहिद परिवारों के लिया सहारा बना लाइफ लाइन हॉस्पिटल जब देश की सीमाओं पर हमारे वीर सैनिक अपने प्राणों की आहुति देकर राष्ट्र की रक्षा करते हैं, तो उनके पीछे छूटे परिवारों की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की होती है। उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ स्थित लाइफ लाइन हॉस्पिटल इसी सामाजिक उत्तरदायित्व को न केवल समझ रहा है, बल्कि उसे ‘सेवा परमो धर्म:’ के मंत्र के साथ जी भी रहा है। वर्षों से शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों के लिए समर्पित स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर यह अस्पताल आज मानवता और राष्ट्रभक्ति का एक जीवंत केंद्र बन चुका है। लाइफ लाइन हॉस्पिटल की नींव जिस संकल्प के साथ रखी गई थी, उसमें व्यापार से ऊपर सेवा को स्थान दिया गया। अस्पताल प्रबंधन ने स्थापना दिवस पर ही यह निर्णय लिया था कि देश के वीर सपूतों और उनके परिजनों को नि:शुल्क एवं उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवाएं दी जाएंगी। अस्पताल का मानना है कि जिन सैनिकों ने देश की अखंडता के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया, उनके परिवारों का ऋण कभी चुकाया नहीं जा सकता, लेकिन उनकी सेवा करना हमारा परम सौभाग्य है।
एक चिकित्सा संस्थान नहीं, एक परिवार है लाइफ लाइन अस्पताल ने केवल इलाज ही नहीं किया, बल्कि इन परिवारों के साथ एक अटूट भावनात्मक रिश्ता भी बनाया है। इसी अटूट विश्वास की कड़ी में कई महान विभूतियों के परिवार आज ‘लाइफ लाइन परिवार’ का अभिन्न हिस्सा हैं: स्वतंत्रता सेनानी लालचंद जी का परिवार आजाद हिंद फौज के सिपाही कर्नल निजामुद्दीन जी का परिवार शकुंतला जी शहीद सैनिक रामसमुझ जी एवं रमेश यादव जी के परिजन शहीद सिपाही सुमित जी का परिवार। हाल ही में एक ऐसी घटना घटी जिसने अस्पताल के सेवा भाव को पूरी दुनिया के सामने मजबूती से रखा। शहीद सैनिक सुमित जी की माताजी एक गंभीर सड़क दुर्घटना का शिकार हो गईं। जब उन्हें अस्पताल लाया गया, तो उनकी स्थिति अत्यंत चिंताजनक थी। उनके मस्तिष्क में गंभीर चोटें आई थीं और जीवन की उम्मीदें धुंधली पड़ रही थीं। डॉक्टर अनुप कुमार सिंह (विभागाध्यक्ष, न्यूरोसर्जरी)** के नेतृत्व में **डॉक्टर आकाश, डॉक्टर धीरज सिंह** और एनेस्थीसिया विभाग की **डॉक्टर गायत्री कुमारी** ने पूरी रात एक जटिल ब्रेन सर्जरी को अंजाम दिया। “यह ऑपरेशन बेहद जोखिम भरा था, क्योंकि मस्तिष्क के दोनों हिस्सों (Bilateral) में चोटें थीं। लेकिन हमारी टीम का लक्ष्य सिर्फ सर्जरी करना नहीं, बल्कि एक शहीद की माँ को नया जीवन देना था।” — **डॉ. अनुप कुमार सिंह** डॉक्टरों की अथक मेहनत और ईश्वर की कृपा से यह जटिल ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा। आज माताजी स्वस्थ हैं और उनके चेहरे की मुस्कान अस्पताल की टीम के लिए किसी भी पुरस्कार से बड़ी है। यह सफलता केवल चिकित्सा विज्ञान की नहीं, बल्कि उस कर्तव्यनिष्ठा की है जो एक सैनिक के बलिदान के प्रति सम्मान व्यक्त करती है। लाइफ लाइन हॉस्पिटल ने इस अवसर पर एक बार फिर अपने संकल्प को दोहराया है। प्रबंधन का कहना है कि जब तक इस अस्पताल की दीवारें खड़ी हैं, शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों के लिए सेवा और संवेदना का यह द्वार हमेशा खुला रहेगा। यह अस्पताल आज़मगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल पेश कर रहा है कि कैसे एक निजी संस्थान अपनी पेशेवर सीमाओं से ऊपर उठकर राष्ट्र निर्माण और समाज सेवा में योगदान दे सकता है। लाइफ लाइन हॉस्पिटल का यह प्रयास उन बलिदानियों के प्रति एक सच्ची और सक्रिय श्रद्धांजलि है। वहीं ऐसे संस्थानों की बदौलत ही समाज में यह विश्वास कायम रहता है कि देश के लिए जान देने वालों के पीछे पूरा हिंदुस्तान खड़ा है।
