रिपोर्ट: हरिवंश चतुर्वेदी

आजमगढ़। जनपद के सगड़ी तहसील क्षेत्र से होकर बहने वाली घाघरा नदी एक बार फिर ग्रामीणों की चिंता का कारण बन गई है। बीते कुछ दिनों से नदी के जलस्तर में गिरावट दर्ज की जा रही है, जिसकी वजह से नदी की कटान काफी तेज हो गई है। इस कटान का सबसे ज्यादा प्रभाव सहबदिया और देवारा खास राजा गांवों पर पड़ रहा है, जहां के ग्रामीणों में दहशत का माहौल व्याप्त है।

बदरहुआ और डिघिया नाले पर दर्ज किए गए जलस्तर के आंकड़े भी इस बात की पुष्टि करते हैं। मंगलवार से बुधवार के बीच बदरहुआ नाले पर जलस्तर 69.46 मीटर से घटकर 69.29 मीटर रह गया, यानी 17 सेंटीमीटर की गिरावट दर्ज हुई। वहीं डिघिया नाले पर जलस्तर 68.68 मीटर से घटकर 68.52 मीटर तक पहुंच गया, जो कि 16 सेंटीमीटर की कमी को दर्शाता है। जलस्तर में इस गिरावट के चलते घाघरा नदी के प्रवाह में बदलाव की स्थिति बनती दिख रही है।

ग्रामीणों के अनुसार नदी का रुख अब आबादी की ओर मुड़ने को आतुर है। सहबदिया गांव की करीब तीन हजार की आबादी पर सीधा खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों ने गुरुवार सुबह लगभग 11 बजे बताया कि यदि यही स्थिति रही और कटान पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो वह दिन दूर नहीं जब नदी का प्रवाह गांव के अंदर तक पहुंच जाएगा।

कटान की सबसे बड़ी मार उन किसानों पर पड़ रही है, जिनकी उपजाऊ भूमि धीरे-धीरे नदी में समा रही है। खेतों के कटने से किसानों की आजीविका पर सीधा असर पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई पहली बार नहीं है जब घाघरा नदी ने इस तरह का कहर बरपाया हो। इससे पहले भी कई गांव इसके तेज कटान के कारण उजड़ चुके हैं।

स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द कटानरोधी कार्य शुरू किए जाएं, ताकि गांवों को बचाया जा सके। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए, तो सहबदिया और देवारा खास राजा जैसे गांवों का अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता है।गांववासियों ने प्रशासन से मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने और स्थायी समाधान के लिए योजना बनाने की मांग की है।

बाढ़ खंड के सहायक अभियंता अरविंद यादव ने ग्रामीणों को आश्वस्त करते हुए कहा कि फिलहाल जलस्तर में गिरावट जारी है, लेकिन खतरे जैसी कोई तत्काल स्थिति नहीं है। उन्होंने बताया कि विभाग पूरी तरह से सतर्क है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो जल्द ही कटानरोधी उपाय शुरू किए जाएंगे।