
रिपोर्ट_____अरूणयादव
आजमगढ़। सगड़ी तहसील क्षेत्र के उत्तरी छोर पर बहने वाली घाघरा नदी के जलस्तर में लगातार तीसरे दिन कमी दर्ज की गई है, लेकिन बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों की परेशानियां अभी भी कम नहीं हुई हैं। कई गांवों में जलभराव के कारण आवागमन प्रभावित है। वहीं, पानी घटने के साथ तटवर्ती क्षेत्रों में कटान का खतरा बढ़ गया है। बेलहिया गांव में पुल नहीं होने के कारण करीब दो दर्जन गांवों के ग्रामीण नाव के सहारे आवागमन करने को मजबूर हैं।बदरहुआ गेज पर घाघरा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे पहुंच गया है। डिघिया गेज पर 18 सेंटीमीटर और बदरहुआ गेज पर 20 सेंटीमीटर जलस्तर में कमी दर्ज की गई। हालांकि डिघिया गेज पर नदी अभी भी खतरा बिंदु से 48 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है, जबकि बदरहुआ गेज पर पानी खतरे के निशान से 14 सेंटीमीटर नीचे है।
झगरहवा का पूरा में तेज हुआ कटान
जलस्तर कम होने के साथ ही देवारा खास राजा के झगरहवा का पूरा में घाघरा नदी ने कटान शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि पिछले 24 घंटे में नदी करीब एक बीघा खेती योग्य भूमि काट चुकी है। वहीं सहबदिया और बरामदपुर में भी कटान का खतरा बढ़ गया है। इससे तटवर्ती इलाकों के ग्रामीणों में चिंता बनी हुई है।
संपर्क मार्गों से पानी हटा, कीचड़ ने बढ़ाई परेशानी
देवारा खास राजा से हाजीपुर, मानिकपुर से अभ्भनपट्टी और खरैलिया से सोनौरा जाने वाले संपर्क मार्गों से बाढ़ का पानी हट गया है, लेकिन रास्तों पर भारी मात्रा में कीचड़ जमा है। इसके चलते पैदल और बाइक से आने-जाने वाले लोग फिसलकर गिर रहे हैं और उन्हें आवागमन में परेशानी हो रही है। बरामदपुर-सहबदिया, चक्की हाजीपुर, देवारा खास राजा के 28 मजरे सहित शाहडीह, भदौरा, बांका, बूढ़नपट्टी और सोनौरा समेत करीब दो दर्जन गांवों से भी बाढ़ का पानी धीरे-धीरे हटने लगा है।
10 बाढ़ चौकियों पर तैनाती
बाढ़ की स्थिति पर नजर रखने के लिए प्रशासन की ओर से 10 बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं। इन चौकियों पर स्वास्थ्य विभाग, पंचायत विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस की तैनाती की गई है। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी की जा रही है।
मच्छरों के बढ़ते प्रकोप से ग्रामीण परेशान
पानी घटने के बाद बाढ़ प्रभावित गांवों में मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि रात में मच्छरों के कारण चैन की नींद लेना मुश्किल हो गया है। इंसानों के साथ पशु भी मच्छरों से परेशान हैं। इससे मच्छरजनित बीमारियों के फैलने की आशंका बढ़ गई है। वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन के निर्देश के बावजूद अभी तक प्रभावित गांवों में कीटनाशक दवाओं का छिड़काव और फॉगिंग शुरू नहीं कराई गई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी प्रभावी पहल नहीं होने की बात कही जा रही है। सर्दी, खांसी और वायरल बुखार से पीड़ित ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बेलहिया में पुल निर्माण की मांग
ग्रामीणों ने बेलहिया गांव में पुल निर्माण की मांग उठाई है। उनका कहना है कि कुछ वर्ष पहले बाढ़ के पानी की तेज धारा में बेलहिया संपर्क मार्ग पर बना पुल कटकर बह गया था। पुल के बह जाने के बाद से आसपास के ग्रामीणों के सामने आवागमन की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। वहीं ग्रामीणों के मुताबिक पर्याप्त संख्या में नाव उपलब्ध नहीं होने के कारण लोगों को नाव के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में रोजमर्रा के काम, बच्चों की पढ़ाई, बाजार और जरूरी सेवाओं के लिए आने-जाने वाले लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पर्याप्त नावों की व्यवस्था कराने के साथ बेलहिया में स्थायी पुल का निर्माण कराने की मांग की है।
