रिपोर्ट: अरुण यादव/एसपी त्रिपाठी
आजमगढ़। वाराणसी एसटीएफ की टीम ने शनिवार तड़के एक लाख के इनामी अपराधी शंकर कन्नौजिया को मुठभेड़ में मार गिराया। शाम को पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंपना चाहा, लेकिन उन्होंने लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद शव का अंतिम संस्कार सामाजिक संगठन भारत रक्षा दल ने किया।
परिजनों ने शव लेने से किया इनकार
मुठभेड़ के बाद पुलिस ने शंकर कन्नौजिया के भाई कन्हैयालाल कन्नौजिया, भाभी सरोज देवी और भतीजे सुनील कुमार को पोस्टमार्टम हाउस बुलाया। लेकिन शव मिलने पर परिजनों ने उसे स्वीकारने से साफ मना कर दिया। ऐसे में पुलिस ने शव को भारत रक्षा दल को सौंपा। देर रात संगठन के लोगों ने उसका दाह संस्कार किया।
भारत रक्षा दल का संदेश
भारत रक्षा दल के पदाधिकारी हरिकेश विक्रम श्रीवास्तव ने सोशल मीडिया पर लिखा—
‘पाप की कमाई करने वालों को सबक — इसी लिए कहा जाता कमाई के हिस्सेदार बहुत हैं, लेकिन पाप में भागीदारी कोई नही करता, इसने कमाई को कई लोगों पर खर्च किया होगा, उसी में से कोई आगे नहीं आया, गलत रास्ते की कमाई करने वालों के लिए यह अनुकरणीय है। एक लाख के इनामी बदमाश शंकर कन्नौजिया का भोर में एनकाउंटर हुआ, घर का कोई मृतक का दाह संस्कार के लिए नहीं आया,, अभी भारत रक्षा दल परिवार के योद्धाओं ने इनकी मुक्ति के लिए इनका दाहसंस्कार किया.. हम तो शव को शिव मानकर अपना कर्तव्य निभा रहे हैं ..’

अपराध की ओर शंकर का रुख
रौनापार थाना क्षेत्र के हाजीपुर गांव निवासी शंकर का जीवन शुरू से ही कठिनाइयों भरा रहा। जन्म के छठे दिन ही उसकी मां की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद वह मऊ जनपद के दोहरीघाट में मौसी के यहां पला-बढ़ा। तीन भाइयों और दो बहनों में सबसे छोटा शंकर 16 वर्ष की उम्र में ही गलत संगत में पड़ गया। 2001 से शुरू हुआ अपराध का सिलसिला 2025 में आकर मुठभेड़ के साथ समाप्त हुआ।
शंकर का अपराध करने का तरीका बेहद खौफनाक था। वह वाहन हड़पने के लिए चालक का अपहरण करता और फिर धारदार हथियार से सिर काटकर हत्या कर देता था। धड़ को छुपा देता और सिर को नदी में फेंक देता।
2011 का सनसनीखेज मामला
मऊ जिले के दोहरीघाट थाने में 2011 का मुकदमा सभी को हिला देने वाला था। शंकर ने साथियों अनिरुद्ध सोनकर और अरविंद यादव के साथ मिलकर आर्मडा लोडर वाहन लूटने के लिए विन्ध्याचल पांडेय की हत्या की। आरोप है कि पहले उसका सिर काटा गया और फिर धड़ को घाघरा नदी में फेंक दिया गया। इस मामले में उसके दोनों साथी गिरफ्तार कर जेल भेज दिए गए थे, लेकिन शंकर मुख्य आरोपी होते हुए भी फरार रहा।
2024 में दोहराया खौफनाक खेल
एक जुलाई 2024 को शंकर ने गोरखपुर निवासी शैलेंद्र की पिकअप गाड़ी किराए पर ली। 3 जुलाई को उसे लाटघाट बुलाकर साथियों रामछवि और छांगुर के साथ सिर काटकर हत्या कर दी। शव को घर के पीछे दफनाकर नमक डाल दिया गया और सिर को नदी में फेंक दिया गया।
14 जुलाई को पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर शैलेंद्र का धड़ बरामद किया। वहीं, छांगुर के पास से पिकअप गाड़ी मिली। इस वारदात के बाद वाराणसी जोन के एडीजी पियूष मोर्डिया ने 13 सितंबर 2024 को शंकर पर 1 लाख रुपये का इनाम घोषित किया।
मुकदमों का लंबा सिलसिला
शंकर कन्नौजिया के खिलाफ आज़मगढ़ और मऊ जिलों में कई गंभीर मुकदमे दर्ज थे। मऊ जिले में पहला मुकदमा 1999 में मारपीट का दर्ज हुआ। इसके बाद 2001 और 2002 में भी उस पर मामले पंजीकृत हुए। वर्ष 2011 में उसके खिलाफ गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई हुई और उसी साल अपहरण, हत्या तथा लूट का मुकदमा दर्ज किया गया।
आजमगढ़ जिले में भी उसका आपराधिक इतिहास लंबा रहा। वर्ष 2008 में रौनापार थाने में उस पर दो मुकदमे दर्ज हुए। 2024 में जीयनपुर कोतवाली में मामला दर्ज किया गया और 2025 में जहानागंज थाने में मुठभेड़ का मुकदमा पंजीकृत हुआ।
