आज़मगढ़। फेसबुक पर लोगों की फ्रेंडलिस्ट अब साइबर ठगों के लिए आसान शिकार बनती जा रही है। रिश्तेदार या करीबी बनकर फर्जी इमरजेंसी का झांसा देना, भावनात्मक दबाव बनाकर मदद मांगना और फिर लोगों की मेहनत की कमाई उड़ा लेने वाले एक संगठित साइबर फ्रॉड का खुलासा आज़मगढ़ साइबर क्राइम पुलिस ने किया है। पुलिस ने इस मामले में दो शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस का दावा है कि फर्जी फेसबुक आईडी विदेश से ऑपरेट की जा रही थी, जबकि ठगी का पैसा आज़मगढ़ में लेनदेन किया जा रहा था।


थाना साइबर क्राइम, जनपद आज़मगढ़ की टीम को बीते रविवार को NCRP पोर्टल पर दर्ज शिकायत की जांच के दौरान अहम सुराग हाथ लगे। शिकायतकर्ता मो0 इसतिखार, निवासी बीहटा, पटना (बिहार) द्वारा दर्ज शिकायत के आधार पर थाना साइबर क्राइम में संबंधित धाराओं में मामला पंजीकृत किया गया।
विवेचना के दौरान प्रभारी निरीक्षक देवेन्द्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में साइबर थाना टीम ने तकनीकी विश्लेषण और मोबाइल लोकेशन के आधार पर कार्रवाई करते हुए दो अभियुक्तों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि अभियुक्तों का भाई और मामा, जो बाहर रहते हैं, फेसबुक पर विभिन्न व्यक्तियों की फर्जी आईडी बनाकर उनके रिश्तेदारों और परिचितों से संपर्क करते थे। इमरजेंसी का बहाना बनाकर धनराशि की मांग की जाती थी, जिसे फोन-पे, पेटीएम और गूगल पे स्कैनर के माध्यम से अभियुक्तों के बैंक खातों में ट्रांसफर कराया जाता था।


राशि खाते में आते ही अभियुक्त एटीएम के जरिए पूरा पैसा निकाल लेते और आपस में बांट लेते थे। साइबर फ्रॉड के लिए अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाए गए थे। इस कार्रवाई में पुलिस ने तीन अदद एंड्रॉइड मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं।
गिरफ्तार अभियुक्तों में अरबाज पुत्र जाहिद और मो0 आयाज पुत्र जाहिद, निवासी ग्राम पेन्डरा गंगापुर, थाना सरायमीर, हाल मुकाम ग्राम शेरवा ईदगाह, थाना सरायमीर, जनपद आज़मगढ़ शामिल हैं।


एसपी सिटी चिराग जैन ने बताया कि अब तक की जांच में यह तथ्य सामने आया है कि गिरफ्तार अभियुक्तों के मामा व भाई फर्जी फेसबुक आईडी विदेश में बनाकर वहीं से ऑपरेट कर रहे थे, जबकि आज़मगढ़ में बैठे लोग रुपये का लेनदेन कर रहे थे। अब तक करीब 20 लाख रुपये की ठगी सामने आई है। मामले में आगे की जांच जारी है, बैंक ट्रांजेक्शन और सीडीआर का गहन विश्लेषण किया जा रहा है।