
रिपोर्ट___अरुण यादव
अवैध वसूली, दोहरी परीक्षा प्रणाली और प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर अल्टीमेटम, समय रहते कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी।
आजमगढ़। जिले में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने महाराजा सुहेलदेव राज्य विश्वविद्यालय (एमएसडीएसयू) में व्याप्त भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और परीक्षा प्रणाली में अनियमितताओं को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। परिषद के प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति को ज्ञापन सौंपते हुए विभिन्न गंभीर मुद्दों पर तत्काल प्रभावी कार्रवाई की मांग की है। प्रांत मंत्री शशिकांत मंगलम ने बताया कि 28 अप्रैल को कुलसचिव कार्यालय में कार्यरत कर्मचारी संजय यादव को कथित रूप से रंगे हाथों पकड़ा गया, जिसने प्रारंभिक स्तर पर कुलसचिव की संलिप्तता स्वीकार की है। परिषद ने इस मामले में निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच पूरी होने तक कुलसचिव को पद से हटाने और दोषियों को सेवा से बर्खास्त करने की मांग उठाई है। एबीवीपी ने कुलसचिव पर वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इन गतिविधियों से विश्वविद्यालय की छवि धूमिल हो रही है और प्रशासनिक पारदर्शिता प्रभावित हो रही है। परिषद के अनुसार, विभिन्न विभागों में भी भ्रष्टाचार और लापरवाही की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, जहां फाइलों के निस्तारण में देरी और जवाबदेही का अभाव स्पष्ट दिखाई देता है। परीक्षा शुल्क को लेकर भी परिषद ने बड़ा मुद्दा उठाया है। आरोप है कि शासन द्वारा निर्धारित ₹800 शुल्क के बावजूद संबद्ध महाविद्यालयों में बीए के विभिन्न सेमेस्टरों के लिए ₹1000 से ₹1265 तक वसूले जा रहे हैं। इसके साथ ही रोवर्स-रेंजर्स शुल्क को ₹25 से बढ़ाकर ₹50 किए जाने पर आपत्ति जताते हुए इसे तत्काल वापस लेने और पूरी धनराशि का पारदर्शी हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की गई है। परीक्षा प्रणाली में दोहरी व्यवस्था—महाविद्यालय स्तर पर बहुविकल्पीय प्रश्न और विश्वविद्यालय स्तर पर वर्णनात्मक परीक्षा—को परिषद ने असंगत और छात्रों के साथ अन्यायपूर्ण बताया है। साथ ही निजी और सरकारी महाविद्यालयों के परीक्षा परिणामों में अंतर का विवरण भी मांगा गया है। एबीवीपी ने परीक्षा के दौरान गठित उड़ाका दल की सक्रियता और उनकी कार्रवाइयों का विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है। परिषद का आरोप है कि कुछ निजी महाविद्यालयों के साथ मिलकर संगठित नकल को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो शिक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। वहीं परिषद ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर इन मुद्दों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वह विश्वविद्यालय में पारदर्शिता और सुशासन की मांग को लेकर उग्र आंदोलन करने को बाध्य होगी।
