
रिपोर्ट_____SP त्रिपाठी
आजमगढ़ जिले में अवैध प्लाटिंग का कारोबार लगातार फल-फूल रहा है और इसकी चपेट में आकर आम लोगों की गाढ़ी कमाई विवादों में फंसती जा रही है। शहर और आसपास के क्षेत्रों में कृषि योग्य व बाढ़ प्रभावित जमीनों को नियमों के विपरीत आवासीय प्लाट के रूप में बेचने का खेल लंबे समय से जारी है। इसी कड़ी में रविवार को रैदोपुर काली चौरा क्षेत्र स्थित रूपाली डेवलपर के कार्यालय के बाहर खरीदारों की भारी भीड़ जुटने से मामला चर्चा में आ गया। मिली जानकारी के अनुसार नरौली के दक्षिण स्थित रामपुर राजस्व गांव में वर्षों पहले रूपाली डेवलपर द्वारा बड़ी संख्या में लोगों को प्लाट बेच दिए गए थे, लेकिन कई खरीदारों को आज तक जमीन पर कब्जा नहीं मिल सका। इसी को लेकर नाराज खरीदार संबंधित फर्म के कार्यालय पहुंचे और जवाब मांगा। वहीं बताया जा रहा है कि रूपाली डेवलपर से जुड़े रत्नाकर गुप्ता पुत्र पीपी गुप्ता निवासी कुर्मी टोला, आजमगढ़ ने लगभग 30 से 35 लोगों को 20 रुपये के स्टांप पेपर पर इकरारनामा बनाकर चेक सौंपे। इकरारनामे में उल्लेख किया गया कि यदि 1 दिसंबर 2026 तक संबंधित खरीदारों को जमीन पर कब्जा दिला दिया जाता है तो दिए गए चेक वापस कर दिए जाएंगे। हालांकि इकरारनामे में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि तय समय तक कब्जा न मिलने की स्थिति में खरीदार चेक का क्या करेंगे। यही बात अब लोगों के बीच चर्चा और चिंता का विषय बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जमीन विवादित थी तो उसकी प्लाटिंग और बिक्री कैसे की गई। साथ ही सवाल यह भी उठ रहा है कि वर्षों से चल रहे इस कथित अवैध कारोबार पर प्रशासन और शासन की नजर क्यों नहीं पड़ी। वहीं इस पूरे मामले पर रूपाली डेवलपर से जुड़े रत्नाकर गुप्ता ने कहा कि वर्षों पहले फर्म द्वारा प्लाटिंग कर जमीन बेची गई थी, लेकिन कुछ हिस्सेदारों ने विवाद खड़ा कर दिया, जिसके चलते कब्जा नहीं मिल पाया। उन्होंने बताया कि मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है और ग्राहकों के भरोसे के लिए इकरारनामा व चेक दिए गए हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी फर्म कानपुर में पंजीकृत है और पूरे उत्तर प्रदेश में कारोबार के लिए मान्य
