रिपोर्ट______अरुण यादव

आजमगढ़। जिले के सरायमीर थाना क्षेत्र में वर्ष 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने विशेष अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए 38 दोषियों को दी गई मौत की सजा और 11 अन्य दोषियों की उम्रकैद की सजा को यथावत रखा है। मंगलवार को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने अपना फैसला सुनाया। फैसले के बाद आजमगढ़ एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया। वहीं, स्थानीय स्तर पर इस मामले में कोई भी बोलने से बचता रहा।

जानकारी मुताबिक वर्ष 2008 में गुजरात के अहमदाबाद में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी। जांच एजेंसियों के अनुसार इस साजिश का मास्टरमाइंड आजमगढ़ के सरायमीर थाना क्षेत्र के बीनापार निवासी अबुल बशर था। इसके अलावा सरायमीर क्षेत्र के संजरपुर निवासी मोहम्मद सैफ, आरिफ मिर्जा नसीम, इसरौली निवासी आरिफ बदर व शहर कोतवाली क्षेत्र के बदरका निवासी सैफुल रहमान के नाम भी सामने आए थे। मंगलवार को फैसले के बाद संजरपुर और आसपास के गांवों में सन्नाटा पसरा रहा। अधिकांश परिजनों ने इस मामले में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। सरायमीर थाना क्षेत्र के संजरपुर निवासी आरोपी मोहम्मद सैफ के पिता शादाब अहमद उर्फ मिस्टर ने कहा कि उनका परिवार इस फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील करेगा। उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की लड़ाई लड़ी जाएगी। उन्हें अभी भी न्याय मिलने की उम्मीद है और वे उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। इसरौली निवासी आरोपी आरिफ बदर के पुत्र मोहम्मद माविया ने बताया कि वर्ष 2020 में लॉकडाउन लगने के बाद से परिवार की मुलाकात नहीं हो सकी है। उन्होंने कहा कि अब सप्ताह में एक बार वीडियो कॉल और दो बार वॉइस कॉल पर ही बातचीत हो पाती है। लॉकडाउन से पहले परिवार के सदस्य गुजरात जाकर मुलाकात करते थे, लेकिन उसके बाद ऐसा संभव नहीं हो पाया।