रिपोर्ट_____अरुण यादव 

आज़मगढ़। उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री अंगद यादव को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हत्या के एक मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे अंगद यादव को उनकी बेटी की शादी में शामिल होने के लिए 10 मई से 13 मई 2026 तक अभिरक्षा पैरोल पर रिहा किए जाने का आदेश दिया गया है। सोमवार 11 मई को उनकी बेटी की शादी निर्धारित है, ऐसे में वह पिता के रूप में विवाह की रस्मों और जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकेंगे।इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ, जिसमें माननीय न्यायमूर्ति अब्दुल मोइन और माननीय न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव शामिल थे, ने मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक दायित्वों को ध्यान में रखते हुए यह आदेश पारित किया। अदालत ने कहा कि विशेष परिस्थितियों में याची को सीमित अवधि की पैरोल देना उचित होगा। गौरतलब है कि इससे पहले मार्च 2026 में हाईकोर्ट ने अंगद यादव की पैरोल याचिका खारिज कर दी थी। तब अदालत ने कहा था कि केवल बच्चों की शादी तय करने या रिश्ते तलाशने के लिए किसी कैदी को पैरोल नहीं दी जा सकती। उस समय उन्होंने बेटे-बेटी की शादी तय करने और खेती-बाड़ी देखने के लिए 60 दिन की पैरोल मांगी थी, जिसे सरकार और अदालत दोनों ने अस्वीकार कर दिया था।  अंगद यादव 1995 के हत्या के एक मामले में दोषी ठहराए गए थे। लखनऊ की अपर सत्र न्यायाधीश अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। उनकी सजा के खिलाफ दायर अपीलें हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों में खारिज हो चुकी हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इससे पहले उन्होंने स्वास्थ्य और मानवीय आधार पर भी पैरोल की मांग की थी, लेकिन सरकार ने यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया था कि निजी इलाज के लिए पैरोल का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है।

इस बार याची की ओर से अधिवक्ता समन्वय धर द्विवेदी और अभिषेक मिश्रा ने पैरोल की मांग रखी। उनके साथ जूनियर अधिवक्ताओं के रूप में अतिरेक शाही, अनिकेत त्रिपाठी और तरुण तिवारी भी मौजूद रहे।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में पैरोल अवधि के दौरान पर्याप्त पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने, अंगद यादव को अभिरक्षा में कार्यक्रम स्थल तक ले जाने और निर्धारित अवधि पूरी होने पर दोबारा जेल भेजने के सख्त निर्देश भी दिए हैं।