रिपोर्ट___अरुण यादव

आजमगढ़ । जिले में समाज कल्याण विभाग ने शासन द्वारा 10 शिक्षकों के वेतन भुगतान पर लगाई गई रोक के बाद भी भुगतान कर दिया। अरुण कुमार सिंह ने इसकी शिकायत मंडलायुक्त से की. मंडलायुक्त के निर्देश पर डीएम ने जिला समाज कल्याण विभाग में वित्तीय अनियमितताओं और सहायक अध्यापकों वेतन भुगतान की जांच सीडीओ की अध्यक्षता में गठित टीम से कराई। जांच में आरोपों की पुष्टि होने पर डीएम ने कार्रवाई की संस्तुति के साथ अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी है। वहीं इस पूरे मामले में सीडीओ परीक्षित खटाना ने बताया कि शिकायत मिलने पर डीएम के निर्देश पर यह जांच की गई थी। हमारी ओर से जांच कर रिपोर्ट डीएम को सौंप दी गई है. रिपोर्ट क्या है, हम इस बारे में कुछ भी नहीं बता सकते। अब डीएम साहब की ओर से रिपोर्ट को मंडलायुक्त और शासन को भेजा गया है। शिकायतकर्ता अरुण कुमार सिंह ने 20 फरवरी को दिए गए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया था कि जिला समाज कल्याण अधिकारी और उनके पटल सहायक द्वारा शासकीय धन का दुरुपयोग किया गया. सहायक अध्यापकों की जो नियुक्तियां शासनादेश के विपरीत की गईं थीं, उन्हें शासन से रोक लगने के बाद भी भुगतान कर दिया।मंडलायुक्त के निर्देश पर डीएम ने मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति, जिसमें जिला विकास अधिकारी और मुख्य कोषाधिकारी शामिल थे, से पूरे मामले की जांच कराई।जांच के दौरान शिकायतकर्ता और संबंधित विभागीय अधिकारियों से साक्ष्य और अभिलेख लिए गए। जांच के दौरान यह सामने आया कि कुछ सहायक अध्यापकों की नियुक्तियां अवैध हैं। जिस पर शासन ने उनके वेतन भुगतान पर रोक लगा दिया था। इसके बावजूद उन्हें वेतन का भुगतान किया गया। इस प्रकार कुल 10 अध्यापकों को लगभग 51.46 लाख रुपए का भुगतान अनियमित रूप से किए जाने की पुष्टि हुई है। आख्या में यह भी कहा गया है कि इन मामलों से संबंधित प्रकरण पहले से ही उच्च न्यायालय में विचाराधीन रहे हैं. डीएम रविंद्र कुमार ने जांच रिपोर्ट के साथ कार्रवाई की संस्तुति कर शासन को भेज दिया है। जौनपुर विधायक सुषमा पटेल ने विधानसभा में समाज कल्याण विभाग में 2014 के बाद नियुक्तियों का ब्यौरा मांगा था। शासन स्तर से तब इसकी जांच कराई गई। बीएसए से कराई गई जांच में 42 शिक्षक फर्जी पाए गए। 2021 में तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी ने इनका वेतन भुगतान रोक दिया। मामला कोर्ट में था तो कोर्ट के आदेश पर इन लोगों को बीच-बीच में कंडिशनली भुगतान होता रहा। 2023-24 में शासन के निर्देश पर 17 शिक्षकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई. शेष बचे 25 शिक्षकों पर 2025 में प्राथमिकी दर्ज कराई गई।  इतना ही नहीं शासन ने दिसंबर 2025 में इनके अनुमोदन को भी निरस्त कर दिया। इसके बाद भी विभाग ने कोर्ट के किसी आदेश का हवाला देते हुए जनवरी 2026 में 10 शिक्षकों के वेतन का भुगतान कर दिया. सबसे बड़ी बात तो यह है कि जब काउंटर दाखिल करने की बात आई तो वेतन भुगतान की बात को छिपाकर मार्च 2026 में न्यायालय में काउंटर भी दाखिल कर दिया। मिली जानकारी के मुताबिक, समाज कल्याण की जिन नियुक्तियों पर किए गए वेतन भुगतान को लेकर जांच की गई है, यह नियुक्तियां 2010 से पहले की हैं. इनका शासन से अनुमोदन 2016 के बाद मिला था. नियुक्तियों के बाद रामनयन राय नाम के व्यक्ति ने इन शिक्षकों के अनुमोदन को फर्जी करार देते हुए इसकी शिकायत कर दी. इस शिकायत पर जब जांच हुई तो 30 शिक्षकों का अनुमोदन फर्जी पाया गया था। मीडिया से हुई बातचीत के दौरान समाज कल्याण अधिकारी राजेश चौधरी ने खुद को बेकसूर बताया। अधिकारी का कहना है कि वेतन का भुगतान माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में किया गया था। उन्होंने पैसे लेकर काम करने के आरोपों को गलत करार दिया। जब उनसे CDO और DM की रिपोर्ट में दोष सिद्ध होने के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि उन्हें अभी तक ऐसी किसी रिपोर्ट की आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है।