
रिपोर्ट_____SP त्रिपाठी
आजमगढ़। जनपद में फर्जी शैक्षिक प्रमाणपत्र के आधार पर नियुक्ति के मामले में कार्रवाई करते हुए एक सहायक अध्यापिका की सेवा समाप्त कर दी गई है। प्रकरण में जांच एवं सत्यापन रिपोर्टों के आधार पर उनकी नियुक्ति को शून्य घोषित किया गया है। साथ ही आहरित वेतन की रिकवरी के आदेश भी जारी किए गए हैं। बीएसए राजीव कुमार पाठक ने बताया कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा वर्ष 2010-11 में रीता पुत्री विश्वनाथ प्रसाद की नियुक्ति प्राथमिक विद्यालय कोटवा (वर्तमान में बालक उच्च प्राथमिक विद्यालय बदरका, नगर क्षेत्र आजमगढ़) में की गई थी। नियुक्ति के समय प्रस्तुत शैक्षिक एवं प्रशिक्षण प्रमाणपत्रों को सत्य मानकर सेवा प्रदान की गई थी। इसके बाद भदुली गांव निवासी शंकर प्रसाद योगाचार्य द्वारा मंडलायुक्त से शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत के आधार पर प्रकरण की जांच प्रारंभ की गई। शिकायतकर्ता द्वारा आरोप लगाया गया कि संबंधित शिक्षिका ने कूटरचित बीएड अंकपत्र के आधार पर नियुक्ति प्राप्त की है। इस संबंध में प्राचार्य, स्वामी देवानन्द स्नातकोत्तर महाविद्यालय, मठलार (देवरिया) से प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराया गया। प्रथम चरण की जांच रिपोर्ट में उक्त बीएड अंकपत्र को महाविद्यालय के अभिलेखों में दर्ज नहीं पाया गया और उसे फर्जी बताया गया। इसके आधार पर विभाग द्वारा नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया। शिक्षिका द्वारा अपना प्रमाणपत्र सही बताया गया। इसके बाद पुनः सत्यापन प्रक्रिया में प्रारंभिक रिपोर्ट और बाद में प्राप्त दूसरी रिपोर्ट में विरोधाभास सामने आया। आगे की विस्तृत जांच के बाद महाविद्यालय प्राचार्य द्वारा स्पष्ट किया गया कि संबंधित बीएड अंकपत्र वर्ष 2003 का रिकॉर्ड उनके संस्थान के अभिलेख (सारणीयन पंजिका) में उपलब्ध नहीं है और पूर्व में भेजी गई एक रिपोर्ट फर्जी एवं कूटरचित थी। दोबारा प्राप्त अंतिम सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि संबंधित शिक्षिका द्वारा प्रस्तुत बीएड अंकपत्र एवं प्रमाणपत्र संस्थान के अभिलेखों में दर्ज नहीं हैं और वे असत्य हैं। इस आधार पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने आदेश जारी करते हुए रीता की नियुक्ति को नियुक्ति तिथि से शून्य घोषित कर दिया और उनकी सेवा समाप्त करने का आदेश जारी किया। साथ ही वित्त एवं लेखाधिकारी (बेसिक) एवं खंड शिक्षा अधिकारी नगर क्षेत्र को निर्देश दिया गया है कि अब तक आहरित वेतन एवं अन्य धनराशि की रिकवरी सुनिश्चित की जाए। प्रशासनिक आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर प्राप्त की गई नियुक्ति पूर्णतः नियम विरुद्ध है और संबंधित के विरुद्ध आवश्यक विधिक कार्रवाई भी की जाएगी।
