रिपोर्ट_____अरुण यादव

आजमगढ़। जिले के मदरसा जामिया नूरुल उलूम, मुबारकपुर की मान्यता से जुड़े भूमि और भवन के अभिलेखों में अनियमितता और कथित फर्जीवाड़े की शिकायत की जांच के बाद मदरसा शिक्षा परिषद ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच में कई गंभीर विसंगतियां सामने आने के बाद रजिस्ट्रार अंजना सिरोही ने मदरसे की मान्यता तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी किया है।

मदरसे की मान्यता से संबंधित भूमि और भवन के दस्तावेजों में अनियमितता की शिकायत हाजी अली इमाम ने की थी। शिकायत के आधार पर रजिस्ट्रार एवं निरीक्षक अंजना सिरोही ने मदरसा प्रबंधन को नोटिस जारी कर सात दिन के भीतर स्पष्टीकरण और मूल दानपत्र प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। विभागीय आदेश के अनुसार, प्रबंधन की ओर से दिया गया जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया।

1997 के कथित दानपत्र में जिले के नाम को लेकर सवाल

जांच के दौरान मदरसे की मान्यता के लिए प्रस्तुत 20 जून 1997 के कथित दानपत्र की वैधता पर भी सवाल उठे। दस्तावेज में जमीन का स्थान तहसील मोहम्मदाबाद गोहना, जनपद आजमगढ़ दर्ज है। विभागीय जांच में कहा गया कि वर्ष 1988 में मऊ जनपद का गठन हो चुका था और मोहम्मदाबाद गोहना मऊ जिले का हिस्सा था। ऐसे में वर्ष 1997 के दस्तावेज में आजमगढ़ जनपद का उल्लेख गंभीर विसंगति माना गया।

खसरा अभिलेखों में मदरसे का उल्लेख नहीं

जांच में फसली वर्ष 1408 से 1412 यानी करीब 1998 से 2004 तक के खसरा अभिलेखों की भी जांच की गई। विभाग के अनुसार संबंधित भूमि के अभिलेखों में इस अवधि में किसी मदरसे या शैक्षणिक संस्था के संचालन का उल्लेख नहीं मिला। विभाग ने इसे भी मदरसे के भूमि संबंधी दावों पर सवाल खड़ा करने वाला तथ्य माना है।

दानपत्र में प्रबंधक के नाम पर भी उठे सवाल

कथित दानपत्र में दर्ज प्रबंधक के नाम को लेकर भी विसंगति सामने आई। जांच रिपोर्ट के अनुसार जिस समय दानपत्र निष्पादित किए जाने का दावा किया गया, उस समय मदरसे के वैध प्रबंधक जहीन अहमद थे, जबकि कथित दानपत्र में निहाल अहमद को प्रबंधक दर्शाया गया है। सहायक रजिस्ट्रार फर्म्स, सोसायटी एवं चिट्स कार्यालय से प्राप्त अभिलेखों के आधार पर इस अंतर का उल्लेख जांच में किया गया है।

10 रुपये के स्टांप पर दानपत्र, पंजीकरण पर भी सवाल

विभाग ने कथित दानपत्र के स्वरूप को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। आदेश के अनुसार अचल संपत्ति के दान के लिए पंजीकरण आवश्यक है, जबकि प्रस्तुत दानपत्र अपंजीकृत है और महज 10 रुपये के स्टांप पर निष्पादित दिखाया गया है। दस्तावेज के नोटरीकरण और पंजीकरण से जुड़े विवरणों को लेकर भी विभाग ने संदेह जताया है।

2013 की रजिस्ट्री ने बढ़ाया संदेह

जांच में वर्ष 2013 में मदरसे के पक्ष में कराई गई भूमि की रजिस्ट्री को भी महत्वपूर्ण माना गया। विभाग के अनुसार इस रजिस्ट्री में पूर्व में किसी अनुबंध या दान किए जाने का उल्लेख नहीं है। इससे वर्ष 1997 के कथित दानपत्र की प्रामाणिकता को लेकर संदेह और गहरा गया।

मान्यता के समय दिए गए दस्तावेज भी जांच के घेरे में

रजिस्ट्रार के आदेश के अनुसार मदरसे की मान्यता के समय प्रस्तुत किए गए भूमि स्वामित्व संबंधी दस्तावेजों की स्थिति भी जांच में स्पष्ट नहीं हो सकी। वर्ष 2013 के पंजीकृत बैनामे और वर्ष 2017 में पोर्टल लॉकिंग की प्रक्रिया के दौरान प्रस्तुत भूमि संबंधी अभिलेखों को लेकर भी सवाल सामने आए।

जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ विभाग

मदरसा प्रबंधन को अपना पक्ष रखने के लिए कई अवसर दिए गए। हालांकि, विभागीय आदेश के अनुसार प्रबंधन की ओर से उपलब्ध कराया गया स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके बाद मदरसा शिक्षा परिषद ने मदरसा जामिया नूरुल उलूम, मुबारकपुर की मान्यता तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया।