
रिपोर्ट____अरुण यादव
अशरफिया मदरसे के प्रबंधक को मदरसा शिक्षा परिषद ने नोटिस जारी कर 15 दिन के भीतर जवाब तलब किया है। इससे पहले 9 जनवरी 2026 को हाईकोर्ट ने मदरसे की निलंबित मान्यता निरस्त कर दी थी। न्यायालय ने कहा था कि संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने के लिए पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया था। वहीं उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद ने मदरसा अशरफिया मिस्बाहुल उलूम, मुबारकपुर के प्रबंधक को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। परिषद ने 15 दिन में स्पष्टीकरण और अभिलेख तलब किए हैं। यह कार्रवाई इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में की गई है। मिली जानकारी के अनुसार आपको बता दें कि उच्च न्यायालय ने नौ जनवरी 2026 को मदरसे की निलंबित मान्यता को निरस्त कर दिया था। न्यायालय ने यह कहते हुए निलंबन रद किया था कि संबंधित पक्ष को जवाब देने का पर्याप्त समय नहीं मिला था। इसके बाद न्यायालय ने परिषद को मामले में नया और कारणयुक्त आदेश पारित करने के निर्देश दिए थे। परिषद ने मदरसा प्रबंधन से कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है।
नोटिस के प्रमुख बिंदु
नोटिस में पूर्व शिक्षक शमशुल होदा खान के विदेश प्रवास से जुड़ी जानकारी मांगी गई है। उनकी इंग्लैंड की नागरिकता प्राप्त करने के संबंध में भी स्पष्टीकरण मांगा गया है। उनके दीर्घकालिक अवैतनिक अवकाश के अभिलेख तलब किए गए हैं। चिकित्सा अवकाश से संबंधित दस्तावेज मांगे गए हैं। परिषद ने उनके वेतन भुगतान और सेवा अभिलेखों से संबंधित तथ्यों की भी जानकारी मांगी है। यह सभी बिंदु मदरसे की मान्यता पर फिर से संकट खड़े कर रहे हैं।
सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंक
परिषद ने प्रथम दृष्टया आशंका जताई है कि यदि किसी व्यक्ति ने विदेशी नागरिकता प्राप्त कर ली थी। उसे शिक्षक के रूप में दर्शाकर वेतन दिया गया, तो यह सरकारी धन का दुरुपयोग है। यह वित्तीय अनियमितता और अभिलेखीय कूटरचना जैसे गंभीर प्रश्न उत्पन्न होते हैं। नोटिस में आरोप है कि प्रबंधन ने वास्तविक अनुपस्थिति के बावजूद शिक्षक को कार्यरत दिखाया। इससे सार्वजनिक धन का भुगतान हुआ, जो प्रशासनिक कदाचार की श्रेणी में आता है। वहीं इस पूरे मामले में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी वर्षा अग्रवाल, ने बताया कि परिषद ने मदरसा प्रबंधन को नोटिस प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। प्रबंधन को सभी आवश्यक अभिलेखों के साथ जवाब देना अनिवार्य है। निर्धारित अवधि में उत्तर न मिलने पर परिषद आगे की कार्रवाई करेगी। इस स्थिति में उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर एकपक्षीय निर्णय लिया जा सकता है।
