
रिपोर्ट_____अरुण यादव
आजमगढ़। श्रवण बाधित मरीजों के लिए आधुनिक चिकित्सा क्षेत्र से राहत भरी खबर सामने आई है। आजमगढ़ मंडल में पहली कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी सफलतापूर्वक की गई है। मुकेरीगंज स्थित विद्या-श्री ईएनटी एंड लेजर सेंटर के डायरेक्टर एवं ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. विनय प्रकाश सिंह ने 23 वर्षीय साक्षी मद्धेशिया की कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी कर उसे दोबारा सुनने की क्षमता हासिल करने में मदद की।
इस उपलब्धि को लेकर गुरुवार को होटल एसआर में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य कॉक्लियर इम्प्लांट के प्रति लोगों को जागरूक करने के साथ आधुनिक कान, नाक एवं गला तथा श्रवण देखभाल सुविधाओं की जानकारी देना रहा।
शहर के ब्रह्मस्थान निवासी सुरेंद्र मद्धेशिया की 23 वर्षीय पुत्री साक्षी पिछले करीब दो वर्षों से गंभीर बीमारी के कारण सुनने की क्षमता खो चुकी थीं। परिजनों ने काफी उपचार कराया, लेकिन अपेक्षित लाभ नहीं मिला। इसके बाद डॉ. विनय प्रकाश सिंह ने साक्षी का परीक्षण कर कॉक्लियर इम्प्लांट की प्रक्रिया कराने का निर्णय लिया। 27 जून को उनकी सर्जरी की गई। उपचार एवं आवश्यक प्रक्रिया के बाद साक्षी के दोबारा सुनने में सक्षम होने पर परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई।
क्या है कॉक्लियर इम्प्लांट?
प्रेस वार्ता में डॉ. विनय प्रकाश सिंह ने बताया कि कॉक्लियर इम्प्लांट एक आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक श्रवण उपकरण है, जो गंभीर संवेदी-तंत्रिका संबंधी श्रवण हानि वाले चयनित मरीजों के लिए उपयोगी हो सकता है, खासकर तब जब सामान्य श्रवण यंत्रों से पर्याप्त लाभ नहीं मिल रहा हो। उन्होंने बताया कि कॉक्लियर इम्प्लांट केवल सर्जरी तक सीमित प्रक्रिया नहीं है, बल्कि मरीज के चयन एवं मूल्यांकन से लेकर सर्जरी और उसके बाद लंबे समय तक चलने वाले श्रवण पुनर्वास तक कई चरण इसमें शामिल होते हैं।
साक्षी की मां ने इस सफलता के लिए डॉ. विनय प्रकाश सिंह और उनकी पूरी टीम का आभार जताया। उन्होंने कहा कि बेटी के दोबारा सुन पाने से परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य अतिथि डॉ. रामकेवल पासवान के अलावा प्रोफेसर गायत्री चौधरी, डॉ. रिद्धि जायसवाल, डॉ. प्रमोद यादव, डॉ. शिशिर मिश्रा, डॉ. अनिल कमल, डॉ. राकेश पटेल समेत अन्य चिकित्सक एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
आजमगढ़ मंडल में पहली कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी की सफलता को क्षेत्र में आधुनिक ईएनटी चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
