
रिपोर्ट____SP त्रिपाठी
आजमगढ़। महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार के आरोपों और हालिया रिश्वत प्रकरण को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच एक बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. अंजनी कुमार मिश्रा को तत्काल प्रभाव से उनके पद से हटाकर मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद विश्वविद्यालय के प्रशासनिक तंत्र में हलचल तेज हो गई है और परिसर में पूरे दिन इस फैसले को लेकर चर्चाओं का दौर चलता रहा। गौरतलब है कि हाल ही में विजिलेंस टीम ने विश्वविद्यालय से जुड़े एक कर्मचारी को कथित तौर पर 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। इस घटना के बाद से ही विश्वविद्यालय प्रशासन पर कार्रवाई की अटकलें लगाई जा रही थीं। माना जा रहा है कि इसी प्रकरण के बाद उच्च स्तर पर पूरे मामले की गंभीर समीक्षा की गई, जिसके परिणामस्वरूप यह प्रशासनिक कदम उठाया गया। सूत्रों मिली जानकारी के अनुसार कुलसचिव के कार्यकाल और विश्वविद्यालय की प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर लंबे समय से विभिन्न स्तरों पर शिकायतें की जा रही थीं। मामला राजभवन और उच्च शिक्षा विभाग तक पहुंचने के बाद निगरानी एजेंसियों की सक्रियता भी बढ़ गई थी। ऐसे में कुलसचिव को पद से हटाने के फैसले को पूरे घटनाक्रम की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। विश्वविद्यालय परिसर में कर्मचारियों और शिक्षकों के बीच यह चर्चा भी रही कि आखिर ऐसी कौन-सी परिस्थितियां बनीं, जिनके चलते कुलसचिव को अचानक पद से हटाकर मुख्यालय से संबद्ध किया गया। सूत्रों का दावा है कि कुछ मामलों की जांच अभी भी जारी है और संबंधित एजेंसियां विभिन्न पहलुओं पर पड़ताल कर रही हैं। हालांकि, जांच पूरी होने और आधिकारिक रिपोर्ट सामने आने तक किसी भी आरोप को अंतिम रूप से सिद्ध नहीं माना जा सकता। वहीं विश्वविद्यालय से जुड़े कई लोगों का मानना है कि रिश्वत प्रकरण में हुई गिरफ्तारी ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। उनका कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष और व्यापक तरीके से आगे बढ़ी तो आने वाले दिनों में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। फिलहाल कुलसचिव को पद से हटाए जाने की कार्रवाई ने विश्वविद्यालय प्रशासन में जवाबदेही, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है। अब सभी की निगाहें जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और शासन स्तर पर होने वाली अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
